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वर्कर्स यूनिटी हेल्पलाइन के सदस्यों की जानकारियां इकट्ठा कर रही पुलिस

कॉल करने वाले बता रहे खुद को दिल्ली पुलिस के ख़ुफ़िया विभाग से जुड़ा

वर्कर्स यूनिटी हेल्पलाइन से जुड़े लोगों को पिछले दिनों अज्ञात नंबरों से कई फ़ोन आए। फ़ोन करने वालों ने खुद को दिल्ली पुलिस के सीआईडी और स्पेशल ब्रांच से जुड़ा होना बताया।

इस संबंध में कई फ़ोन कॉल्स आने के बाद इसकी लिखित शिकायत डीसीपी, पूर्वी दिल्ली और डीसीपी, विजिलेंस, दिल्ली पुलिस को भेज दी गई है।

इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री समेत दिल्ली के कई प्रतिनिधियों को भी इसके संज्ञान में लाया गया है। हम उम्मीद करते हैं कि वर्कर्स यूनिटी के समर्थक विपरीत परिस्थितियों में साथ खड़े रहेंगे।

17 अप्रैल को वर्कर्स यूनिटी से जुड़े तीन सदस्यों को कॉल आए। पहले कॉल में एक महिला थी जिसने खुद दिल्ली पुलिस के सीआईडी विभाग से बताया और अन्य सदस्यों की जानकारी मांगी।

दीपाली नाम की इस महिला का कहना था कि ‘दिल्ली में बांद्रा जैसी स्थिति न पैदा हो इसलिए दिल्ली पुलिस ये सुनिश्चित करना चाहती है कि ज़मीनी हालात क्या हैं?’

इन्होंने बाकी सदस्यों के घर का पता, और ऑफ़िस के बारे में भी पूछताछ की।

18 अप्रैल को अपना नाम सुरेश बताने वाले एक व्यक्ति का कॉल दो अन्य लोगों के पास गया। सुरेश ने खुद को दिल्ली पुलिस स्पेशल ब्रांच से जुड़ा बताया और टीम के एक सदस्य के घर भी पहुंच कर पूरी जानकारी ले गए, जैसे क्या करते हैं, कहां जाते हैं, आय का स्रोत क्या है आदि।

हालांकि ये सुनिश्चित नहीं है कि दिल्ली पुलिस से जुड़े होने का दावा करने वाले इन व्यक्तियों की पहचान असली है कि नहीं।

लेकिन लॉकडाउन के दौरान पत्रकारों, सामाजिक कर्मियों और छात्रों पर जिस तरह मुकदमे दर्ज किए गए, उनकी गिरफ़्तारियां हुईं, उससे पुलिस या सरकारी मशीनरी की मंशा पर सवाल खड़े हुए हैं।

अभी तक सरकार या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक संदेश वर्कर्स यूनिटी को प्राप्त नहीं हुआ है इसलिए अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी।

लेकिन अब दिल्ली पुलिस की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो आधिकारिक रूप से बताए कि क्या पूछताछ करने वालों का ताल्लुक उनके ही विभाग से है।

अगर है तो ग़ैरक़ानूनी रूप से जानकारी इकट्ठा क्यों की जा रही है जबकि वर्कर्स यूनिटी एक रजिस्टर्ड वेबपोर्टल है और इसकी पैरेंट संस्था को कॉमर्स मिनिस्ट्री से काम करने के लिए मंज़ूरी मिल चुकी है।

मज़दूरों के हक़ में काम करने वाली संस्थाओं पर इस तरह की ग़ैरक़ानूनी कार्रवाई करने की जितनी निंदा की जाए कम है।

वर्कर्स यूनिटी हेल्पलाइन अपना काम जारी रखे हुए है और सरकार के किसी भी दमनात्मक कार्यवाही का क़ानून जवाब दिया जाएगा।

वर्कर्स यूनिटी हेल्पलाइन के बारे में कुछ बातें

वर्कर्स यूनिटी एक स्वतंत्र मीडिया के उसूलों को मानने वाला वेब पोर्टल है और ज़मीनी सच्चाई दिखाने का काम करता है।

कोरोना के चलते लॉकडाउन के कारण फंसे हुए मज़दूरों को मदद पहुंचाने के लिए पोर्टल से जुड़े लोगों ने 24 मार्च को एक हेल्पलाइन बनाई और मज़दूरों की मदद  का काम शुरू किया।

इसके लिए फंड रेज़िंग वेबसाइट मिलाप से फंड इकट्ठा किया गया और दोस्तों ने भी इसमें मदद की।

इसी वजह से वर्कर्स यूनिटी हेल्पलाइन के सदस्य दिल्ली एनसीआर के साथ ही साथ देश के दूर दराज़ इलाक़ों में मज़दूरों को मदद पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

हमने दिल्ली के अलग अलग क्षेत्रों में, हरियाणा के मानेसर, गुड़गांव, नोएडा, ग़ाज़ियाबाद में सीधे मदद पहुंचाई है। इसके लिए दिल्ली पुलिस की ओर से जारी कर्फ्यू पास भी हासिल किए गए हैं।

इसके अलावा अन्य राज्यों, महाराष्ट्र के मुंबई, नागपुर, जम्मू, तमिलनाडु के चेन्नई, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, पंजाब के लुधियाना समेत कई जगहों पर नेटवर्क के ज़रिए और पेटीएम के सहारे मदद पहुंचाई है।

अबतक सैकड़ों मज़दूर परिवारों और हज़ारों मज़दूरों को वर्कर्स यूनिटी की ओर से किसी न किसी तरह की मदद पहुंचाई जा चुकी है। जिसमें क़रीब साढ़े चार लाख रुपये खर्च हुए हैं।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

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