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योगी सरकार के फरमान पर फूटा युवा बेरोजगार का गुस्सा, सरकार को कड़ा जवाब देने की तैयारी

शिक्षक, छात्रों, युवाओं और कर्मचारियों ने सरकार की नई नियमावली को बताया बर्बादी का पैगाम

पांच साल तक सरकारी भर्तियो में कर्मचारियों को संविदा पर रखने के योगी सरकार के फरमान का कल युवा मंच समेत अन्य संगठनों द्वारा रोजगार अधिकार दिवस में विरोध किया जाएगा। कल संसद के मानसून सत्र के पहले दिन रोजगार बने मौलिक अधिकार पर आयोजित देशव्यापी कार्यक्रम की तैयारी के लिए 13 सितंबर को युवा मंच की प्रदेश समिति की वर्चुअल मीटिंग यह निर्णय हुआ।

बैठक में इलाहाबाद के सलोरी में पीसीएस में चयनित न हो पाने के कारण छात्र द्वारा आत्महत्या करने पर गहरा दुख व्यक्त किया गया। बैठक में राजेश सचान, अनिल सिंह, विनोवर शर्मा, अम्बुज मलिक,शैलेश मौर्य, स्नेहा राय, करन सिंह, जितेंद्र धांगर, नागेश गौतम, आमिर खान, अमित सिंह, अश्विनी कुमार चंदवन, शहनवाज खान आदि ने युवाओं से सरकार को कड़ा जवाब देने का आह्वान किया।

इस तरह की प्रतिक्रियाओं से उतारा जा रहा गुस्सा

वर्कर्स यूनिटी से बातचीत में समूह ‘ग’ से भर्ती होकर ग्राम विकास अधिकारी बतौर बीस साल से सेवा दे रहे कर्मचारी रणविजय ने कहा कि नई नियमावली सिर्फ सरकार का जिम्मेदारी से पल्ला झाडऩा और विकास योजनाओं के नाम पर बंदरबांट करने की जुगत है। संविदा पर भर्ती कर्मचारी मूल्यांकन के लिए सिर्फ अपने अफसरों की जेब भरेंगे और अफसर नेताओं की।

उन्होंने मायूसी से कहा, समूह ‘ग’ से पंचायती राज और बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त होने से कोई नहीं बचा सकता, अगर ये व्यवस्था लागू हो गई तो। सरकार की तानाशाही से लगता है कि मौजूदा कर्मचारियों को भी निकालने का आदेश कभी भी आ सकता है, बिना किसी तर्क के।

बेरोजगार युवा अंशु गंगवार ने कहा, इस तानाशाही सरकार ने रोजगार के मामले में बहुत तंग किया है। 2022 अब दूर नहीं है। लगभग 2 साल से कोर्ट में भर्ती फंसी है, उसका जिम्मेदार कौन? सरकार या विद्यार्थी। अब नई नीति लाकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने जा रहे हो। निद्रा में ना सोएं, खुलकर विरोध करें, क्योंकि हमारे लिए खतरा है, उसके साथ साथ भविष्य में आने वाली पीढ़ी के लिए भी यह खतरा है।

उन्होंने अपील की कि जमकर विरोध करें, चाहे वो ट्विटर, ज्ञापन , आदि किसी भी माध्यम से हो, अपना विरोध दर्ज करें। अगर कुछ किया नहीं तो सब कुछ हाथ से निकल जाएगा। हमने वोट रोजगार के लिए दिया, ना की रोजगार छिनने के लिए।

अंशु ने सरकार से सवाल किया कि आप युवाओं के लिए सब नियम बनाते हो, कभी जीवन मे अपने लिए भी नियम बनाओ तब कहने को हकदार हो, जब आप साल या 6 महीने में आप 60 प्रतिशत युवाओं के लिए कह सकते हो, अपने लिए भी यह प्रस्ताव अपनी विधानसभा में लाओ, तब देखते हैं कौन पास होता है और कौन फेल। जब समय आएगा, तब तुमको भी उखाड़ कर फेकने की ताकत रखती है आम जनता।

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महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सबसे बड़े महाविद्यालय बरेली कॉलेज के शिक्षक संघ अध्यक्ष आलोक खरे ने कहा, ऐसी सलाह देने वालों को दूर रखना चाहिए योगी जी को, क्या गारंटी है कि इस फैसले के बाद अफरशाही कर्मचारियों का शोषण नहीं करेगी, कर्मचारियों को टिके रहने के लिए घूस नहीं देनी होगी। ये युवा विरोधी- छात्र विरोधी फैसला है।

रुहेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र नेता गजेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, 30-35 साल पर नौकरी , 5 साल संविदा पर 50 की उम्र में जबरन रिटायरमेन्ट…और क्या चाहिए अक्ल के मारे अंधभक्तो? सरकार के तानाशाही रवैये के विरोध कीजिए। अन्यथा सरकारी नौकरियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का समय आ गया। विधानसभा के सामने की सडक़, जीपीओ का पार्क बुला रहा है तुमको।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक सिंह ने कहा, प्रदेश सरकार की युवा विरोधी नीति के साथ ही केंद्र ने जीडीपी को बढ़ाने की नई पॉलिसी जारी कर दी है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय का आदेश है कि किसी भी विभाग में नौकरियों के नए पद सृजित नहीं किए जाएंगे, इसके लिए व्यय विभाग से अनुमति लेनी होगी। हजारों पद तो पहले ही खत्म किए जा चुके हैं। क्या यह समझें कि सरकार कह रही है कि हम नई नौकरी नहीं दे पाएंगे?

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