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स्थायी-अस्थायी का भेद मिटा बेलसोनिका यूनियन ने कैज़ुअल मज़दूरों को दी यूनियन की सदस्यता

कंपनी प्रबंधन पर बदले की कार्यवाही करने के आरोप, यूनियन का जोर कैजुअल परमानेंट एकता पर

मारुति के कंपोनेंट बनाने वाली बेलसोनिका ऑटो कॉम्पोनेंट इंडिया एम्प्लाइज यूनियन ने बृहस्तपतिवार को गुड़गांव लघु सचिवालय पर एक दिवसीय भूख हड़ताल के दौरान कंपनी के कैजुअल वर्करों को यूनियन सदस्यता देने की घोषणा की।

गुड़गांव से लेकर धारुहेड़ा तक क़रीब 19 कंपनियों में पिछले साल से ही लंबित मांग पत्र पर सुनवाई न होने और पिछले महीने ही संसद से पास कराए गए तीन लेबर कोड  के ख़िलाफ़ ये भूख हड़ताल आयोजित की गई थी।

पूरे दिन चली इस भूख हड़ताल के अंत में कैजुअल वर्करों को यूनियन की सदस्यता के फ़ार्म भरवाए गए और मज़दूर वर्गीय एकता का नारा बुलंद किया गया।

यूनियन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ‘शासक वर्ग द्वारा मजदूर वर्ग पर किये जा रहे हमलों का केवल एक ही जबाव है कि मजदूर खुद को वर्ग के तौर पर लामबंद करे। स्थाई और ठेका का विभाजन मजदूरों का खून चूसने, उनकी एकता को खण्डित करने के लिए पूँजीपतियो ने किया है।’

सभा को संबोधित करते हुए यूनियन के महासचिव जसबीर ने नारा दिया- ‘हम इस विभाजन को नहीं मानते’ और साथ ही सभी मजदूरों की वर्गीय एकजुटता का आह्वान किया।

गुड़गांव में ठेका प्रथा के बाद ये पहला मौका है जब ठेका और स्थाई मजदूर को एक यूनियन में संगठित किया गया है। इसके लिए यूनियन ने अपने संविधान में संशोधन किया। यूनियन के नेताओं का दावा है कि पूरे एनसीआर में ऐसी कोई यूनियन नहीं है जो कैजुअल वर्करों को सदस्यता देती हो।

बेलसोनिका यूनियन के अध्यक्ष अतुल कुमार ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि कंपनी में इस समय क़रीब 145 कैेजुअल वर्कर बचे हैं क्योंकि लॉकडाउन के दौरान सैकड़ों कैजुअल वर्करों को मैनेजमेंट ने मनमाने तरीक़े से निकाल दिया।

उनका कहना है कि ट्रेड यूनियन एक्ट में कहीं भी नहीं लिखा है कि कैजुअल वर्कर यूनियन के सदस्य नहीं बन सकते हैं। अतुल कुमार ने ये भी बताया कि सदस्यता के पूरे प्रारूप को मैनेजमेंट और लेबर कोर्ट में जमा किया जाएगा।

लेबर कोड और लंबित मांग पत्रों पर आक्रोश

44 केंद्रीय श्रम कानूनों को खत्म कर 4 श्रम संहिताओं या लेबर कोड में बदलकर घोर मज़दूर विरोधी बदलाव को वापस लिया जाए। क़रीब 20 माह से लंबित सामूहिक मांग पत्रों को तत्काल हल किया जाए।

लेबर कोड में केंद्र सरकार ने हड़ताल करने के कानूनी अधिकार को सीमित करते हुए पूर्व श्रम कानूनों में 15 दिन पूर्व हड़ताल के नोटिस को बदलकर 60 दिन हड़ताल से पूर्व नोटिस देने का प्रावधान कर दिया गया। लेबर कोड के तहत अगर यूनियन का कोई डिस्प्यूट पेंडिंग हैं तो मजदूर यूनियन हड़ताल नहीं कर सकती है।

अगर हड़ताल गैर कानूनी घोषित हो जाती है तो मजदूर व मजदूर यूनियन पर 50 हजार से 2 लाख रुपए तक का जुर्माने व जेल का प्रावधान किया गया है। यही नहीं हड़ताल का समर्थन करने वाले व्यक्ति व समूह पर भी इन्हीं जुर्माने व जेल का प्रावधान किया गया है।

छंटनी व तालाबंदी की कानूनी सीमा को फैक्ट्री में कार्यरत पूर्व संख्या 100 को बढ़ाकर 300 कर दी गई है। स्थाई रोज़गार पर फिक्स टर्म एम्प्लॉयमेंट के तहत मज़दूर रखे जाएंगे।

यूनियन के प्रतिनिधि अजीत के अनुसार, “एक तरीके से ‘रखो व निकालो’ की खुली छूट पूंजीपतियों को देने के साथ साथ ट्रेड यूनियन आन्दोलन का अपराधिकरण करने की साजिश है। साथ ही ये भी कवायद चल रही है कि स्थाई नौकरियों को फिक्स टर्म में बदलने की साज़िश रची जा  रही है। इन मज़दूर विरोधी लेबर कोड का बेलसोनिका यूनियन विरोध करती है।”

बेलसोनिका यूनियन के अध्यक्ष अतुल कुमार ने कहा कि ‘कोरोना महामारी को अवसर में तबदील करते हुए 20 माह से लम्बित स्थाई व अस्थाई मजदूरों के मांगपत्र को कोरोना महामारी के बहाने घाटे का नाम लेकर बेलसोनिका प्रबंधन हल करने से मना कर रहा है।’

मैनेजमेंट पर उकसावे वाली कार्यवाही का आरोप

उनके अनुसार, महामारी का पूरा भार मजदूरों पर डालने पर मैनेजमेंट उतारू है। वेतन भत्तों में कटौती से लेकर ठेका श्रमिकों को कोरोना महामारी के दौरान बहार निकाला गया। अब यहां तक कि 20 माह से लंबित मांगपत्र को हल करने की बजाय श्रम विभाग से मिलकर कोरोना की आड़ में वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

यूनियन नेताओं का आरोप है कि मांगपत्र के चलते बेलसोनिका प्रबंधन तरह तरह के फैक्ट्री के अंदर साज़िश कर उकसावेपूर्ण कार्यवाही कर रहा है। कैंटीन के खाने में मीनू को मनमर्जी से बदलकर मजदूरों को भूखा रहने पर मजबूर किया जा रहा है।

कैंटीन में खाना कम बनवाना आदि समस्याओं से लेकर शॉप फ्लोर में मजदूरों को बिना किसी कारण ट्रान्सफर करना, मजदूरों के साथ बदले की भावना से काम करना अब रोज़ाना की घटनाएं हो गई हैं।

यहां तक कि प्रबंधन मांगपत्र को छोड़कर सत्यापित स्थायी आदेशों के लिए चंडीगढ़ के चक्कर काट रहा है ताकि मजदूर विरोधी बदलावों का जल्द से जल्द फायदा उठाकर स्थायी नौकरियों पर हमला किया जा सके।

यूनियन ने कहा है कि घोर मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताओं व 20 माह से लम्बित मांगपत्र को लेकर भूख हड़ताल के बाद व्यापक संघर्ष की रूपरेखा तैयार  की जाएगी।

इस भूख हड़ताल में बेलसोनिका यूनियन के पदाधिकारी अतुल कुमार, जसबीर सिंह, अजित सिंह, मोहिंदर कपूर, मुकेश कुमार, राजपाल, राजेश कुमार व अरविन्द कुमार शामिल थे और बेलसोनिका के पूरे मज़दूर अपनी शिफ्टों के हिसाब से इसमें शामिल हुए।

कार्यक्रम में मारुति यूनियन गुड़गांव , मारुति यूनियन मानेसर, पॉवर ट्रैन यूनियन मानेसर, सुजुकी बाइक यूनियन खेड़की दौला, FMI यूनियन मानेसर, रिको यूनियन धारूहेड़ा, हेमा यूनियन गुड़गांव, सत्यम यूनियन मानेसर, मुंजाल शोवा यूनियन मानेसर, एटक से अनिल पवार, इमके से श्यामवीर, रोहित व योगेश, मुकु यूनियन के पूर्व महासचिव कुलदीप जांघू, राम कुमार, CITU से सतवीर, आशा वर्कर्स- मिड डे मील की ओर से सरोज, PTI टीचर 1983 की ओर से यूनियन नेता आदि शामिल हुए।

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