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कंपनियों में सामूहिक छंटनी, वेतन कटौती को लेकर बेलसोनिका यूनियन ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

कंपनी में अस्थाई मज़दूरों की छंटनी, परमानेंट मज़दूरों की सैलरी भत्ते में कटौती को वापस लेने की मांग

मानेसर में मारुति की ऑटो पार्ट्स बनाने वाली बेलसोनिका कंपनी के मज़दूरों ने बुधवार को रैली निकालकर उद्योगों में वेतन कटौती और छंटनी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

मज़दूर नेताओं ने डीसी गुड़गांव को भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें श्रम क़ानूनों में हो रहे बदलाव को वापस लेने की मांग की गई।

यूनियन की ओर जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्तमान समय में कोरोना महामारी की आड़ में पूंजीपति वर्ग ने मजदूर वर्ग पर बड़ा हमला बोल दिया है। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव व यहां तक कि श्रम कानूनों को कोरोना की आड़ में निरस्त करने का काम किया जा रहा है।

बड़े पैमाने पर स्थाई व अस्थाई मजदूरों को फ़ैक्टरियों से निकाला जा रहा है।

बेलसोनिका यूनियन प्रतिनिधि अजीत ने कहा कि बेलसोनिका, मारुति, हीरो, मुंजाल शोवा, श्री राम इंजीनियर, एफ.एम.आई., मार्क एग्जास्ट व रिको धारूहेड़ा आदि कंपनियों से बड़े पैमाने पर स्थाई व अस्थाई मजदूरों को काम से निकाल दिया गया है।

165 अस्थाई मज़दूरों का वेतन नहीं

उन्होंने कहा कि बहुत सी फैक्ट्रियों में लंबित चल रहे मांग पत्रों पर प्रबंधन कोई बातचीत नहीं कर रहा है, ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

प्रदर्शन में शामिल वक्ताओंने कहा कि सरकार ने कोरोना महामारी को अवसर में तब्दील कर दिया है। सरकार तमाम सार्वजनिक उद्यमों को ओने पौने दामो पर पूंजीपतियों को बेचने पर उतारू है। रेलवे, कोयला खनन, भारत पेट्रोलियम आदि सार्वजनिक उद्यमों को निजी हाथों में सुपुर्द करने की तैयारी कर चुकी है।

बेलसोनिका यूनियन के जनरल सेक्रेटरी जसवीर सिंह ने कहा कि बेलसोनिका प्रबंधन भी कोरोना महामारी की आड़ में यूनियन से मुक्ति पाने की तलाश में है। कोरोना महामारी के नाम पर बेलसोनिका प्रबंधन ने लगभग 300 ठेका मजदूरों को मई माह में निकाल दिया गया था।

लगभग 165 अस्थाई मजदूरों को जून माह का वेतन नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा कि बेलसोनिका प्रबंधन द्वारा लगभग 240 स्थायी मजदूरों के वेतन में गैर कानूनी वेतन कटौती की गई व हाज़िरी भत्ते में भी कटौती की गई है।

bellsonica protest

उद्योगों में भारी छंटनी वेतन कटौती पर आक्रोष

पिछले लगभग एक साल चार माह से लंबित चल रहे सामूहिक मांग पत्र को हल करने की बजाय प्रबंधन वापस उठाने का दबाव बना रहा है।

मज़दूर नेताओं ने कहा कि कोरोना काल में जिस तरह पूंजीपति वर्ग की ओर से शोषण बढ़ा है, मज़दूरों में भी आक्रोष बढ़ा है और इसीलिए 9 अगस्त को देश स्तर पर मज़दूरों और किसानों का एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि मोदी और खट्टर सरकार ये न सोचे कि वो श्रम क़ानूनों पर बुलडोज़र चलाती रहेगी और मज़दूर वर्ग बहुत दिन तक सोता रहेगा।

प्रदर्शन में बेलसोनिका यूनियन के अलावा, मारुति सुज़ुकी पॉवर ट्रेन , सुज़ुकी बाइक, FMI यूनियनें, एटक से अनिल पवांर, एचएमएस से जसपाल राणा, इंकलाबी मजदूर केंद्र से रोहित, सीटू से कवंर पाल, श्यामझा कॉलोनी से राम जी, स्वराज इंडिया से मनीष मक्कड़ और बेलसोनिका के लगभग 150 मजदूरों शामिल हुए।

Bellsonica protest

ज्ञापन में मांगें

1. उदारीकरण, निजीकरण, वैश्विकरण की पूंजीपरस्त नीतियों को रद्द किया जाये।
2. सरकार द्वारा सरकारी संस्थाओं के निजीकरण पर रोक लगाई जाये।
3. सरकार द्वारा श्रम कानूनों में सुधार के नाम पर किये जा रहे मज़दूर विरोधी बदलाव को रद्द किया जाए।
4. ठेकेदारी प्रथा, नीम परियोजना व फिक्स टर्म एम्प्लॉयमेंट जैसी मजदूर विरोधी नीतियों को रद्द किया जाये।
5. घाटे में चल रहे निजी उद्योगों का राष्ट्रीयकरण करके सरकार संचालित करें।
6. बेलसोनिका कंपनी में लंबे समय से काम कर रहे अस्थाई मजदूरों को स्थाई किया जाए।
7. बेलसोनिका मजदूर यूनियन द्वारा दिये गए सामूहिक मांग पत्र जो एक साल चार माह से लंबित है को जल्द से जल्द सम्मानजनक समझौता करवाया जाये।

8. आउट सोर्सिंग के कार्य पर रोक लगाई जाये।
9. लॉक डाउन के दौरान निकाले गए मजदूरों को सवेतन काम पर वापिस लिया जाये।
10. बेलसोनिका प्रबंधन द्वारा लॉक डाउन के दौरान की गई वेतन कटौती को वापस लिया जाए।
11. सभी मजदूरों को मई व जून माह का हाजिरी भत्ता दिया जाए।

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