न्यूयॉर्क में 30 सालों में रेलवे की सबसे बड़ी हड़ताल, ‘समझौता नहीं तो, ट्रेन नहीं’ के नारों में गूंजा अमेरिका

न्यूयॉर्क में 30 सालों में रेलवे की सबसे बड़ी हड़ताल, ‘समझौता नहीं तो, ट्रेन नहीं’ के नारों में गूंजा अमेरिका

ईरान पर अमेरिका और इसराइल के ग़ैर क़ानूनी हमलों के कारण पूरी दुनिया में महंगाई चरम पर है और इसका सीधा असर फ़ैक्ट्री मज़दूरों, रेलवे वर्करों, एयरलाइंस और आम महेनतकश जनता पर पड़ रहा है। जिस अमेरिका ने इस जंग में छेड़ा अब उसी जंग की आग में वो झुलसने को अभिशप्त है।

अमेरिका के चमकते न्यूयॉर्क शहर में तीन दशक बाद हुई लोंग आइसलैंड रेल रोड हड़ताल ने उस संकट को सड़क के गुस्से में बदल दिया जिसे अमेरिकी साम्राज्यवादी बीते कई दशकों से भड़काने में लगे हुए थे।

इस हड़ताल ने लाखों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जबकि यूनियन का आरोप है कि बढ़ती महंगाई के बीच चार साल से वेतन नहीं बढ़ा, जबकि इसकी पैरेंट कंपनी एमटीए बजट का हवाला देकर समझौते से पीछे हट रही है।

बीबीसी की न्यूज़ के मुताबिक़, जमैका, क्वींस स्टेशन के बाहर सोमवार सुबह सैकड़ों रेलकर्मी हाथों में तख्तियां लिए खड़े थे। इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड, जिन पर आम दिनों में ट्रेन के समय चमकते रहते हैं, पूरी तरह खाली थे। पटरियों पर सन्नाटा था, लेकिन नारों की आवाज तेज थी।

“नो कॉन्ट्रैक्ट (समझौता नहीं)”

“नो ट्रेन (ट्रेन नहीं)।”

एक यूनियन सदस्य लाउडस्पीकर से नारा लगाता है और सामने खड़ी भीड़ एक सुर में जवाब देती है।

फिर नारा लगता है- “होकुल? जानो?” दरअसल न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल और एमटीए प्रमुख जानो लीबर की ओर उनका ईशारा है।

भीड़ जवाब देती है- “लाइज (झूठों के सरदार)”

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तस्वीरें साभार बीबीसी

आम जनता का समर्थन

पास से गुजर रहे कुछ लोग भी रुककर हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में आवाज उठाते दिखे। कई कर्मचारियों के हाथों में “Wages Not Waste (मज़दूरी है हमारी, कोई कचरा नहीं)” लिखी तख्तियां थीं।

उनका कहना है कि वे किसी राजनीतिक लड़ाई में नहीं, बल्कि अपने घर चलाने की लड़ाई में सड़क पर उतरे हैं।

करीब 3500 कर्मचारियों की इस हड़ताल ने लोंग आईसलैंड रेल रोड (एलआईआरआर) की सेवा पूरी तरह रोक दी है।

हर रोज लगभग ढाई लाख यात्री इस रेल नेटवर्क पर निर्भर रहते हैं, जो लॉन्ग आइलैंड के उपनगरों को क्वींस और मैनहैटन से जोड़ता है।

एलआईआरआर अमेरिका का सबसे व्यस्त रेलवे नेटवर्क है जिसे मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एमटीए) चलाता है और उसका प्रबंधन करता है।

सोमवार पहली ऐसी सुबह रही जब दफ्तर जाने वाले यात्रियों को बिना ट्रेनों के सफर करना पड़ा।

बस स्टॉप पर लंबी कतारें दिखीं। कई लोग घंटों पहले घर से निकले। कुछ यात्रियों ने कार पूल का सहारा लिया तो कई ने घर से काम करने का फैसला किया। एमटीए ने वैकल्पिक बस सेवा शुरू की है, लेकिन अधिकारियों ने माना कि बसें सामान्य यात्री संख्या का छोटा हिस्सा ही संभाल सकती हैं।

new york Rail strike
तस्वीरें साभार बीबीसी

सैलरी का गुस्सा

हड़ताल की जड़ वेतन विवाद है। पांच यूनियनों ने शनिवार से काम बंद किया, क्योंकि एमटीए के साथ नया समझौता तय नहीं हो सका।

जिन रेल यूनियनों के गठबंधन में यह हड़ताल चल रही है जिसमें शामिल हैं-

  1. ब्रदरहुड ऑफ लोकोमोटिव इंजीनियर्स एंड ट्रेनमेन (बीएलईटी),
  2. ब्रदरहुड ऑफ रेलरोड सिग्नलमेन,
  3. इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ मशीनिस्ट्स (आईएएम) डिस्ट्रिक्ट 19,
  4. इंटरनेशनल ब्रदरहुड ऑफ इलेक्ट्रिकल वर्कर्स
  5. ट्रांसपोर्टेशन कम्युनिकेशंस यूनियन

दोनों पक्ष चार साल के समझौते के शुरुआती तीन वर्षों पर सहमत हो चुके थे, लेकिन आखिरी साल के वेतन ढांचे पर बातचीत अटक गई।

अपने अंतिम प्रस्ताव में यूनियनों ने 16 जून, 2023 से 16 जुलाई 2026 तक लागू होने वाली 14.5% वेतन वृद्धि और सभी कर्मचारियों के लिए 3,000 डॉलर की एकमुश्त राशि की मांग की।

यूनियन नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों को पिछले चार साल में वेतन वृद्धि नहीं मिली, जबकि न्यूयॉर्क में किराया, स्वास्थ्य खर्च और रोज़मर्रा की जरूरतों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

ब्रदरहुड ऑफ़ लोकोमोटिव इंजीनियर एंड ट्रेनमैन के नेता गिल लैंग ने कहा, “हम पिकेट लाइन पर खड़ा नहीं होना चाहते। लेकिन तीन साल तक बिना वेतन बढ़ोतरी के अब और समझौता संभव नहीं है।”

दूसरी तरफ एमटीए प्रमुख जानो लीबर का कहना है कि एजेंसी ऐसा समझौता नहीं कर सकती जिससे उसका बजट संकट में पड़ जाए। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारी पहले ही देश के सबसे अधिक वेतन पाने वाले रेलकर्मियों में शामिल हैं।

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तस्वीरें साभार बीबीसी

पिछली हड़ताल 1994 में हुई थी

यह एलआईआरआर की 30 साल से ज्यादा समय में पहली बड़ी हड़ताल है। इससे पहले 1994 में दो दिन की हड़ताल हुई थी।

लेकिन अमेरिका में रेलवे हड़तालों का इतिहास इससे कहीं पुराना और ज्यादा टकराव भरा रहा है।

1877 की ‘ग्रेट रेलरोड स्ट्राइक’ को अमेरिकी श्रमिक आंदोलन की पहली बड़ी राष्ट्रीय हड़ताल माना जाता है, जब वेतन कटौती के खिलाफ रेल कर्मचारियों ने कई शहरों में काम रोका था।

इसके बाद 1894 की पुलमैन हड़ताल ने पूरे देश में रेल सेवा बाधित कर दी थी और संघीय सेना तक तैनात करनी पड़ी थी।

हाल के वर्षों में भी अमेरिका और पश्चिमी देशों में श्रमिक आंदोलन तेज हुए हैं। 2022 में अमेरिका में मालगाड़ी रेल कर्मचारियों की संभावित राष्ट्रीय हड़ताल ने पूरे सप्लाई नेटवर्क को संकट में डाल दिया था।

उस समय राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन को दखल देना पड़ा था। ब्रिटेन में भी 2022 और 2023 के दौरान रेल कर्मचारियों ने वेतन और काम की शर्तों को लेकर महीनों तक हड़तालें कीं, जिससे लंदन समेत कई शहरों की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई।

न्यूयॉर्क की मौजूदा हड़ताल भी उसी वैश्विक बेचैनी की तस्वीर दिखाती है, जहां महंगाई, बढ़ती जीवन लागत और कॉर्पोरेट बजट के बीच वर्कर अपने हिस्से की सुरक्षा मांग रहे हैं।

फिलहाल बातचीत रुकी हुई है। लेकिन क्वींस स्टेशन के बाहर खड़े कर्मचारियों के लिए लड़ाई सिर्फ समझौते की नहीं, बल्कि सम्मान और गुजारे की है। उनके नारों में वही गूंज साफ सुनाई देती है।

“नो कॉन्ट्रैक्ट। नो ट्रेन।”

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तस्वीरें साभार बीबीसी

हालिया सालों में हुई दुनिया की बड़ी हड़तालें-

  • अमेरिका रेल हड़ताल संकट (2022)-  मालगाड़ी रेल कर्मचारियों ने पेड लीव और वेतन को लेकर राष्ट्रीय हड़ताल की चेतावनी दी, जिससे सप्लाई चेन ठप होने का खतरा पैदा हुआ।
  • ब्रिटेन रेल हड़तालें (2022–2024)- RMT और ASLEF यूनियनों ने वेतन, नौकरी सुरक्षा और काम की शर्तों को लेकर देशभर में बार-बार रेल सेवाएं रोकीं।
  • हॉलीवुड राइटर्स स्ट्राइक, अमेरिका (2023)- Writers Guild of America के हजारों लेखकों ने AI, स्ट्रीमिंग भुगतान और कॉन्ट्रैक्ट शर्तों को लेकर काम बंद किया।
  • SAG-AFTRA एक्टर्स स्ट्राइक, अमेरिका (2023)- फिल्म और टीवी कलाकारों ने AI इस्तेमाल और कम भुगतान के खिलाफ ऐतिहासिक हड़ताल की।
  • जर्मनी एयरपोर्ट और ट्रांसपोर्ट हड़ताल (2024)- सार्वजनिक परिवहन और एविएशन कर्मचारियों ने महंगाई के बीच वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर काम रोका।
  • फ्रांस पेंशन विरोध प्रदर्शन और हड़तालें (2023)- राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पेंशन सुधार योजना के खिलाफ लाखों कर्मचारी सड़कों पर उतरे।
  • कनाडा पोर्ट स्ट्राइक, ब्रिटिश कोलंबिया (2023)- बंदरगाह कर्मचारियों की हड़ताल से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
  • दक्षिण कोरिया ट्रक ड्राइवर हड़ताल (2022)- ईंधन कीमतों और न्यूनतम भुगतान की मांग को लेकर ट्रक चालकों ने राष्ट्रीय स्तर पर काम रोका।
  • फिनलैंड राजनीतिक हड़तालें (2024)- ट्रेड यूनियनों ने सरकार की श्रम नीतियों और सामाजिक सुरक्षा कटौती के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध किया।
  • भारत बैंक कर्मचारियों की हड़ताल (2024)- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों ने निजीकरण और भर्ती से जुड़े मुद्दों पर काम बंद किया।
  • सैमसंग कर्मचारी हड़ताल, दक्षिण कोरिया (2024)- Samsung Electronics के कर्मचारियों ने बेहतर वेतन और बोनस की मांग को लेकर कंपनी के इतिहास की बड़ी हड़ताल की।
  • बोइंग फैक्ट्री हड़ताल, अमेरिका (2024)- विमान निर्माण कर्मचारियों ने वेतन और कार्य परिस्थितियों को लेकर उत्पादन रोक दिया।
  • लॉस एंजिलिस होटल वर्कर्स स्ट्राइक, अमेरिका (2023)- होटल कर्मचारियों ने बढ़ते किराए और कम वेतन के खिलाफ लंबी हड़ताल चलाई।
  • अमेजन वेयरहाउस विरोध, यूरोप और अमेरिका (2023–2024)- कर्मचारियों ने काम के दबाव, निगरानी और वेतन मुद्दों पर कई देशों में प्रदर्शन किए।
  • बेल्जियम राष्ट्रीय हड़ताल (2025)- ट्रेड यूनियनों ने वेतन, पेंशन और श्रम सुधारों के खिलाफ देशव्यापी बंद का आह्वान किया।

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Workers Unity Team

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