विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में भीषण दुर्घटना, खौलता स्टील मज़दूरों पर गिरा, 8 की मौत कई घायल
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के वाइज़ैग स्टील प्लांट में पिघला हुआ स्टील मज़दूरों पर गिरने से आठ मज़दूरों की मौत हो गई।
बीबीसी के अनुसार, आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री वंगलपुडी अनीता ने इस दुर्घटना में आठ लोगों की मौत होने की पुष्टि की है।
अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई अन्य लोग बुरी तरह झुलस गए हैं और उनका इलाज चल रहा है।
समाचार एजेंसियों के अनुसार, पुलिस ने बताया कि पिघले हुए धातु का तापमान क़रीब 1,600 डिग्री सेल्सियस था।
एसएमएस-1 प्लांट में गर्म सांचे की क्रेन की डोंगी गिर गईं, जिससे खौलता हुआ पिघला स्टील बाहर गिरने लगा और कई मज़दूर उसकी चपेट में आ गए।
मृतकों में एसएमएस-1 विभाग के प्रमुख सहित पांच स्टील प्लांट के कर्मचारी और तीन ठेका मज़दूर शामिल थे।
अधिकारियों के मुताबिक, स्टील मेल्टिंग शॉप (एसएमएस) में पिघली हुई धातु ले जा रही एक बड़ी डोंगी अपनी जगह से हटकर गिर गई, जिससे भीषण आग लग गई।
चश्मदीदों ने बताया कि कई टन पिघला हुआ स्टील फैलने और वहां मौजूद कर्मचारियों को अपनी चपेट में लेने से कुछ ही पल पहले उन्होंने धमाके की आवाज़ सुनी थी।
सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और तस्वीरें आ रही हैं जिनमें ज़मीन पर जले हुए शव पड़े दिखाई देते हैं और दुर्घटना की भयावहता का अंदाज़ा देते हैं।
आंध्र प्रदेश के बीजेपी के वाइस प्रेसिडेंट ने भी ये वीडियो एक्स पर पोस्ट किया है।
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सीआईएसएफ़ ने क्या बताया?
सीआईएसएफ़ ने एक्स पर एक बयान जारी कर घटना के बारे में बताया है.
बयान के अनुसार, 8 जून 2026 को लगभग शाम 4:30 बजे, विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के एसएमएस-1 कंटीन्यूअस कास्टिंग डिपार्टमेंट एरिया में मशीन नंबर 2 लैडल पर एक धमाका हुआ।
इमरजेंसी कॉल मिलने पर, सीआईएसएफ़ फ़ायर विंग के कर्मचारियों ने तुरंत कार्रवाई की और बचाव व आग बुझाने का काम शुरू किया। डिफ्यूज़र ब्रांच से पानी की बौछार करके आग पर काबू पाया गया, जिससे इसे और फैलने से रोका जा सका।
बचाव टीमों ने प्रभावित इलाके से घायलों और पीड़ितों को बाहर निकाला; इसमें लगभग 25 मीटर की ऊंचाई से सीढ़ियों के ज़रिए लोगों को निकालना भी शामिल था। चल रहे बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए यूनिट लाइन्स और फ़ायर स्टेशन से सीआईएसएफ़ फ़ायर सर्विस के अतिरिक्त कर्मचारियों को बुलाया गया।
सीआईएसएफ़ के कर्मचारी बचाव, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, साइट मैनेजमेंट और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्लांट मैनेजमेंट, स्थानीय पुलिस, ज़िला प्रशासन, एपीएसएफ़एस, एनडीआरएफ़ और एसडीआरएफ़ की मदद कर रहे हैं।
दुर्भाग्य से, इस घटना में लोगों की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं। सीआईएसएफ़ पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है और इलाज करा रहे लोगों के जल्द ठीक होने की कामना करता है।
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सरकार के मंत्री पहुंचे
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू ने विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र में हुई दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और राहत कार्यों में तेजी लाने का आदेश दिया।
दूसरी ओर, राज्य की गृह मंत्री अनीता और विशाखापत्तनम के सांसद भरत ने विशाखापत्तनम स्टील प्लांट दुर्घटना स्थल का दौरा किया।
दुर्घटना के कारणों के बारे में कर्मचारियों से पूछताछ की गई।
अधिकारियों को घायल कर्मचारियों को सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने विशाखापत्तनम स्टील प्लांट दुर्घटना में घायल हुए लोगों का विवरण जानने और अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया है और प्रभावितों के परिजनों के लिए 08912590100 और 08912590102 हेल्पनाइन नंबर उपलब्ध कराए हैं।
इस समय केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री कुमारस्वामी विशाखापत्तनम के दौरे पर हैं।
घटना की जानकारी मिलने के बाद सीआईएसएफ़ और एनडीआरएफ़ की टीमें दुर्घटना स्थल पर पहुंच गईं।
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विजाग स्टील प्लांट में पहले भी हुई हैं भीषण दुर्घटनाएं
जून, 2012: 13 जून 2012 की रात स्टील मेल्ट शॉप-2 के ऑक्सीजन प्लांट में एक भीषण विस्फोट और आग लगने से 19 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। यह इस प्लांट के इतिहास में सबसे बड़ी जनहानि वाली दुर्घटनाओं में से एक थी।
मई, 2012: 1 मई 2012 को नए चालू हुए ब्लास्ट फर्नेस-3 में एक विस्फोट के कारण 2 ठेका मज़दूरों की जलकर मौत हो गई थी और कई झुलस गए थे। इसके अलावा 22 मई 2012 को सिंटर प्लांट में आग लगने से रॉ मटीरियल ले जाने वाली कन्वेयर बेल्ट पूरी तरह पिघल गई थी।
फ़रवरी, 2012: स्टील मेल्ट शॉप में बड़ी मात्रा में गर्म धातु के रिसाव की घटना दर्ज की गई थीl
वर्ष 2011: अप्रैल और जून 2011 के दौरान प्लांट में कई दुर्घटनाएं हुईंl 10 और 14 अप्रैल 2011 को लेडल से लगभग 140 टन पिघला स्टील जमीन पर गिरने से भारी आग लग गई। इसके अलावा 17 अप्रैल 2011 को रॉ मटीरियल हैंडलिंग प्लांट में आग की घटना में कन्वेयर बेल्ट को भारी नुकसान हुआ था।
विजाग स्टील प्लांट को मोदी सरकार बेचने की फिराक में थी
वर्कर्स यूनिटी में अगस्त 2021 में प्रकाशित यश मालवीय की एक स्टोरी के मुताबिक़, मोदी सरकार उस समय विशाखापत्तनम स्टील प्लांट को बेचने जा रही थी। इस स्टील प्लांट की स्थापना 1977 में हुई थी राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड या विज़ाग स्टील प्लांट भारत सरकार की 14 नवरत्न कंपनियों में से एक है।
यह प्लांट लगभग 65, हज़ार लोगों को रोजगार देता है। स्टील प्लांट के निजीकरण को लेकर विशाखापत्तनम और आंध्र प्रदेश में लगातार सात महीनों से विरोध प्रदर्शन चला और दिल्ली भी पहुंचा।
कर्मचारियों का आरोप है कि 2 लाख करोड़ की सम्पत्ति वाले प्लांट को केंद्र सरकार महज़ 32 हज़ार करोड़ में बेचने पर उतारू है। पूरे विशाखापट्टनम की अर्थव्यवस्था इस पर टिकी है इसकी वज़ह से इससे जुड़े कई दूसरे उद्योग भी वहाँ चलते हैं।
इस वक्त प्लांट में लगभग 18 हज़ार पक्के कर्मचारी हैं और लगभग 17000 ठेके पर रखे गए कर्मचारी हैं।
यह मात्र एक स्टील प्लांट नही है यह तेलगु अस्मिता का प्रश्न है इस प्लांट को विशाखापट्टनम में स्थापित करने के लिए एक लंबा संघर्ष हुआ था।
70 के दशक में हुए इस प्लांट के लिए ‘विशाखापट्टनम उक्कू – अंधेरुला हक्कू आंदोलन’ में 32 लोगों की जान गई थी और सांसदों और विधायकों सहित, 70 विधायकों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। तब जाकर इस प्लांट की स्थापना हुई थी।
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