मज़दूरों के बाद छात्र नौजवानों पर पुलिसिया दमन की चौतरफ़ा निंदा, अमित शाह के इस्तीफ़े की उठी मांग

मज़दूरों के बाद छात्र नौजवानों पर पुलिसिया दमन की चौतरफ़ा निंदा, अमित शाह के इस्तीफ़े की उठी मांग

20 जुलाई को जंतर मंतर पर जो कुछ हुआ, मुख्यधारा की मीडिया के लाख छुपाने के बावजूद पूरे देश और दुनिया में सोशल मीडिया के मार्फत फैल चुका है।

छात्रों नौजवानों की जिस बर्बरता के साथ पुलिस लाठी चार्ज में पिटाई के दृश्य सामने आ रहे हैं, वो दिल दहला देने वाले हैं।

मज़दूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों, नौजवान संगठनों और किसान यूनियनों ने मोदी सरकार की पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा की है।

प्रकाश राज, शबाना आज़मी समेत तमाम बॉलीवुड कलाकारों ने छात्रों का समर्थन किया है। पहलवान बजरंग पुनिया ने सरकार से जवाबदेही की मांग की है।

इस पुलिसिया बर्बरता के ख़िलाफ़ मुंबई, भोपाल समेत पूरे देश भर में प्रदर्शन हुए हैं। उत्तराखंड के रामनगर में समाजवादी लोकमंच ने छात्रों पर दमन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया।

ब्रिटेन और यूरोप एवं अन्य देशों के भारतीय दूतावासों के सामने प्रदर्शन हुए हैं। और मजबूर होकर विपक्षी पार्टियों और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी मैदान में उतरने पर मजबूर होना पड़ा है।

लाठी चार्ज के दूसरे दिन राहुल गांधी, और अन्य विपक्षी नेता पीएम नरेंद्र मोदी के आवास के पास धरने पर बैठ गए, जिन्हें हिरासत में ले लिया गया।

उल्लेखनीय है कि बजरंग पुनिया ने भारत की स्टार महिला पहलवान विनेश फोगाट के साथ मिलकर कई महीनों तक जंतर मंतर पर धरना दिया था।

यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी बयान जारी कर लाठीचार्ज की घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने एक बयान जारी कर मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

Jnatar mantar youth protest
दिल्ली पुलिस पर आरोप है कि उसने ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया और लड़कियों के साथ बर्बर बर्ताव कर खाकी वर्दी को शर्मसार किया.

20 जुलाई का आंदोलन मोदी सरकार के लिए चेतावनी-एटक

एटक नेशनल सेक्रेटेरिएट की ओर से आज 20 जुलाई 2026 प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 20 जुलाई को जंतर मंतर संसद मार्ग टॉल्स्टॉय मार्ग और आसपास की सड़कों पर एक लाख से ज़्यादा लोगों के जुटने के लिए बधाई।

बयान में कहा गया है कि मार्च में शामिल होने वाले लोग देश के कोने कोने से आए थे और उनमें ज़्यादातर छात्र और युवा थे जो खराब शिक्षा व्यवस्था और अलग अलग कोर्स में एडमिशन या सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए परीक्षा प्रणाली में गहरे भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट हुए थे।

बयान के अनुसार, बेरोज़गारी अभूतपूर्व स्तर पर है और छात्रों व युवाओं के जीवन में अनिश्चितता भी एक बड़ा मुद्दा है। यह गुस्सा तब और बढ़ गया जब जाने माने शिक्षाविद और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को विरोध स्थल से हटा दिया गया जहाँ वे शिक्षा मंत्री की जवाबदेही की माँग के समर्थन में 20 दिनों से अनशन पर बैठे थे। पेपर लीक के बाद अभी तक 20 से ज़्यादा छात्रों ने आत्महत्या की है।

एटक ने चेताया है कि यह सत्ताधारी पार्टी के लिए एक चेतावनी है कि वे अब देश के छात्रों और युवाओं के बढ़ते गुस्से को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।

तमाम अन्य ट्रेड यूनियनों ने भी मोदी सरकार की कड़ी निंदा की है।

Jnatar mantar youth protest police
20 जुलाई को संसद मार्च में लड़कियों की पिटाई की गई, उनके साथ अभद्रता की गई.

धर्मेंद्र प्रधान और अमित शाह इस्तीफ़ा दें- युवा भारत

25 सालों से चल रहे युवा भारत नामक संगठन ने एक बयान जारी कर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग की है।

युवा भारत की धनबाद इकाई ने एक बयान जारी कर देश भर से “संसद मार्च”के लिए आए नौजवानों के ऊपर पुलिस द्वारा बर्बरतम लाठीचार्ज, आंसू गैस छोड़ने और पत्थर बाजी करने तथा उनका विभिन्न तरीके से उत्पीड़न किये जाने की “युवा भारत” कठोर शब्दों में निंदा की है।

बयान में कहा गया है कि आंदोलन में शामिल सभी नौजवानों,सभी संगठनों को हमारी ओर से बधाई । आंदोलनकर्ताओं ने जो रास्ता दिल्ली में दिखाया है वह देश के मजदूर और किसानों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है । देश के सभी जनवादी, क्रांतिकारी तथा शोषित, उत्पीड़ित समाज की मुक्ति की कल्पना करने वाले कार्यकर्ताओं, संगठनो से हमारी अपील है कि इस आंदोलन के पक्ष में पूरे देश में और सशक्त माहौल युवाओं,छात्रों, किसानों, मजदूरों आदि के साथ मिलकर बनाएं।

युवा भारत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त करने और आंदोलन पर बर्बरतम दमन के लिए गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग की है।

jantar mantar police brutality goons
जंतर मंतर पर बच्चों की पिटाई करने वाले ये सादे कपड़े में लोग भी धे, जिन्हें दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल बताया जा रहा है

आंदोलन अब जनता के हाथ में

केंद्र की मोदी सरकार ने अपने तानाशाही रवैया की पराकाष्ठा को प्राप्त कर खुद को अजेय समझने लगी थी, जंतर मंतर पर 20 जुलाई को शुरू हुए संसद मार्च ने उसे शर्मसार कर दिया है।

बच्चियों के साथ जिस तरह पुरुष पुलिसकर्मियों ने पिटाई की, उनके साथ अभद्रता की उसकी चारो तरफ निंदा हो रही है। कुछ वीडियो में दिखाई देता है कि पुरुष पुलिसकर्मी लड़कियों को थप्पड़ मार रहे हैं, उनके पीछे डंडे से ठेल रहे हैं।

पुलिस के साथ सादे कपड़े पहने भी करीब एक दर्जन लोगों की सोशल मीडिया यूज़र्स ने पहचान की है जिन्हें भाड़े के गुंडे कहा जा रहा है।

बीजेपी सरकार में भाड़े के गुंडों को जनता पर दमन करने का बीते एक दशक से पुराना चलन चला आ रहा है, जिसे कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर हुए संसद मार्च ने पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

पहले आशंका थी कि सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के नेतृत्व को हो सकता है कि मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने ही खड़ा किया हो लेकिन 20 जुलाई आते आते बेरोज़गारी और शिक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली के गुस्से ने युवाओं को कूदने पर मजबूर कर दिया और यह आंदोलन अब सीजेपी के हाथ से निकल कर जनता के हाथ में पहुंच गया है।

13 अप्रैल को नोएडा में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे

दिल्ली एनसीआर के मज़दूर आंदोलन के बाद नौजवान और अब किसान

इसी साल फ़रवरी में पानीपत की सरकारी तेल रिफ़ाइनरी से शुरू हुए मज़दूर आंदोलन ने जल्द ही पूरे दिल्ली एनसीआर को अपने आगोश में ले लिया था।

इसके चलते बीजेपी की तानाशाही सरकारों को न्यूनतम मज़दूरी में इजाफ़ा करना पड़ा था।

मज़दूर आंदोलन की आग अभी समाप्त भी नहीं हुई थी कि छात्रों नौजवानों का गुस्सा भड़क गया और उसका ट्रिगर था भारत के प्रधान न्यायाधीश के द्वारा बेरोज़गार नौजवानों को कॉकरोच कहना।

एक व्यंगात्मक सोशल मीडिया अभियान से कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत हुई और रातों रात उसके करोड़ों फॉलोवर हो गए, इससे अंदाज़ा लग गया था कि लोगों में कितना गुस्सा भरा है।

shambhu border farmer

भारत एक नई अंगड़ाई ले रहा

जिस पर राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आ गया जिसमें सीधे तौर पर सत्तारूढ़ बीजेपी और आरएसएस का हाथ बिल्कुल सामने उजागर हो गया। इसने राम के नाम पर राजनीति करने वाली बीजेपी और आरएसएस की साख को धूल में मिला दिया।

इसने उन युवाओं को अपनी बर्बादी का अहसास दिलाया जिन्हें धर्म के नाम पर सरकार की हर करतूतों के समर्थन के लिए बंधुआ बना लिया गया था।

लेकिन मोदी सरकार की परेशानी अभी और बढ़ने वाली है क्योंकि 2020-21 में 13 महीने तक दिल्ली को घेर रखने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर मोदी सरकार ने छुप छुपा कर अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया और खेती को पूरी तरह अमेरिका के हवाले किया तो किसान फिर से प्रदर्शन शुरू कर देंगे।

बल्कि दो दिन पहले हरियाणा और पंजाब के शंभू बॉर्डर पर हज़ारों किसानों ने मार्च किया और एक बड़े प्रदर्शन में सरकार को सीधी चुनौती दी।

पंजाब में चूंकि जल्द ही चुनाव होने वाले हैं इसलिए वहां सरगर्मी बढ़ गई है। एक दिन पहले ही पंजाब के बिजली कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं।

देश के एक नई अंगड़ाई ले रहा है।

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Workers Unity Team

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