मेगा एआई डेटा सेंटर परियोजनाओं का इतना कड़ा विरोध क्यों हो रहा है?

पिछले हफ़्ते आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में लोगों ने प्रस्तावित मेगा डेटा सेंटर परियोजनाओं के विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।
द हिंदू अख़बार की एक स्टोरी के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में सरकार ने विशाखापत्तनम और अनकापल्ली ज़िले की तीन जगहों पर करीब 601 एकड़ ज़मीन आवंटित की।
इसके बाद गूगल की कंपनी राइडन इन्फोटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 1 गीगावॉट एआई डेटा सेंटर हब विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें अडानी इन्फ्रा/अडानीकॉननेक्स को आधिकारिक भागीदार बनाया गया है।
महाराष्ट्र में ठाणे के निवासी अमेज़न के प्रस्तावित हाइपरस्केल डेटा सेंटर परियोजना का विरोध कर रहे हैं। 7,203.29 करोड़ रुपये की यह परियोजना 53.73 एकड़ में फैली हुई है और ठाणे के बलकुम पाड़ा और माजीवाड़ा गांवों में इसका निर्माण चल रहा है।
विशाखापत्तनम के नागरिक समूहों ने आंध्र परियोजना का विरोध करते हुए पानी और बिजली जैसे संसाधनों पर बढ़ने वाले दबाव और इसके पर्यावरणीय असर को लेकर चिंता जताई है।
यह परियोजना आदविवारम-मुदासरलोवा, तरलुवाड़ा और रामबिल्ली, इन तीन स्थानों पर विकसित की जा रही है।
अभियान चलाने वाले लोगों का कहना है कि सुपर अल नीनो जैसी मौसमीय स्थिति ने राज्यभर में जल संसाधनों पर पहले ही दबाव बढ़ा दिया है।
महाराष्ट्र में शिवसेना सांसद ने जताया विरोध
द वायर की एक स्टोरी के मुताबिक़, सात जुलाई को ठाणे से शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने ठाणे नगर निगम को पत्र लिखकर घनी आबादी वाले इलाके में इस परियोजना को मंज़ूरी दिए जाने पर गंभीर चिंता जताई।
सांसद म्हस्के की प्रमुख मांगों में परियोजना को दी गई सभी मंज़ूरियों की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से समीक्षा कराना, उसके बाद सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करना और स्थानीय निवासियों, विशेषज्ञों तथा जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक बुलाना शामिल है।
ठाणे में लोगों ने परियोजना के बारे में अधूरी जानकारी, पानी की खपत के आंकड़ों में विरोधाभास और स्थानीय लोगों से पर्याप्त सलाह-मशविरा न होने को विरोध की बड़ी वजह बताया है।
‘वेकअप ठाणेकर’ नामक नागरिक समूह ने पानी की वास्तविक खपत पर स्पष्ट जानकारी और सार्वजनिक सुनवाई की मांग की है। समूह ने शोर और वायु गुणवत्ता के आधारभूत मापदंड तय करने और स्थानीय लोगों को मिलने वाले वास्तविक लाभ के बारे में स्पष्टता की भी मांग की है।
हालांकि अमेज़न की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “भारत में हमारे डेटा सेंटरों, जिसमें ठाणे साइट भी शामिल है, में फिलहाल कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और कूलिंग के मक़सद से हम स्थानीय समुदाय के पीने योग्य पानी या पेयजल स्रोतों से पानी नहीं लेते हैं।”
आंध्र प्रदेश में विरोध
विशाखापत्तनम के अभियानकर्ता सोहन हतंगड़ी ने कहा कि लोगों का विरोध तकनीक या निवेश के ख़िलाफ़ नहीं है, बल्कि ऐसी परियोजना के ख़िलाफ़ है जिसमें शहर ज़मीन और प्रोत्साहन देता है, लेकिन बदले में स्थायी रोज़गार और सहायक उद्योग बहुत कम मिलते हैं।
ग्रीन विशाखा के अध्यक्ष राजा राम मोहन राय ने कहा कि यह परियोजना “प्रकृति के लापरवाह दोहन” का ख़तरा पैदा करती है।
उनका कहना है कि कंबालाकोंडा ईको-फ़ॉरेस्ट, रामबिल्ली वन्यजीव अभयारण्य के आसपास का इलाक़ा और शहर को पीने का पानी देने वाला मुदासरलोवा जलाशय इस परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं।
ठाणे में कार्यकर्ता “बिना योजना वाले विकास” का विरोध कर रहे हैं। वेक-अप ठाणेकर की संयोजक साधना प्रधान ने कहा, “हम पहले से पानी की कमी, बिजली कटौती और दूसरी समस्याओं से जूझ रहे रिहायशी इलाक़ों में डेटा सेंटर नहीं बना सकते।”
समूह सरकार की प्रतिक्रिया मिलने के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहा है। उसने ठाणे नगर आयुक्त और अमेज़न के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की थी। साधना प्रधान ने कहा, “हमें निराशा हुई क्योंकि उनके पास इस बुनियादी सवाल का जवाब नहीं था कि कूलिंग के लिए ज़रूरी पानी कहां से आएगा।”
ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम के जल आपूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता डी। मुरली कृष्ण ने कहा कि शहर के लिए सबसे बड़ी चिंता पर्याप्त जल भंडारण क्षमता का न होना है, जिसकी ओर इंजीनियर पहले ही आंतरिक स्तर पर ध्यान दिला चुके हैं।
उन्होंने बताया कि जलाशयों के लिए लगभग 1,000 से 2,000 एकड़ भूमि अलग रखनी होगी और करीब 5,000 मिलियन क्यूबिक फीट भंडारण क्षमता शहर की ज़रूरतों को लगभग छह महीने तक पूरा कर सकती है।
उधर, ठाणे परियोजना को 422 मेगावॉट बिजली और 193 जनरेटरों के बैकअप की ज़रूरत होगी।
वेकअप ठाणेकर समूह का कहना है कि अमेज़न और ठाणे नगर निगम ने पानी की खपत के बारे में अलग-अलग आंकड़े दिए हैं। अमेज़न ने जहां रोज़ाना 125 किलोलीटर पानी की ज़रूरत बताई है, वहीं निगम ने कहा है कि वह प्रतिदिन 12 मिलियन लीटर पुनर्चक्रित सीवेज जल उपलब्ध कराएगा।
बलकुम के निवासी जतिन कोठारे ने कहा कि शहर पहले ही “40 एमएलडी पानी की कमी” से जूझ रहा है।
उन्होंने सवाल किया, “तो फिर डेटा सेंटर की पानी की ज़रूरतें आप कैसे पूरी करेंगे?”
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