हिसार की सफ़ाई कर्मचारी मंजीत कौर कौन हैं, जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल

हिसार की सफ़ाई कर्मचारी मंजीत कौर कौन हैं, जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल

ये हैं हिसार (हरियाणा) की सफ़ाई कर्मचारी मंजीत कौर। पुलिस की ज़्यादती का सामना करते हुए उनका एक छोटा सा वीडियो वायरल हो गया है।

हरियाणा में सफ़ाई कर्मचारियों की हड़ताल 20 दिनों से चल रही है। यह हड़ताल इसलिए हो रही है क्योंकि हरियाणा की बीजेपी सरकार ने मई में सफ़ाई कर्मचारियों और फ़ायर डिपार्टमेंट के कर्मचारियों की ऐसी ही एक लंबी राज्यव्यापी हड़ताल के बाद किए गए वादों से पीछे हट गई थी।

हिसार की 41 महिला सफ़ाई कर्मचारियों की आत्मकथाओं वाली किताब ‘ज़हर जो हमने पिया’ में मंजीत कौर की आत्मकथा ‘संघर्ष जारी है’ शीर्षक से छपी है।

प्रमुख अधिकार कार्यकर्ता और गांव सवेरा चैनल के संस्थापक मंदीप पुनिया ने अपने फ़ेसबुक पेज पर साझा किया और बताया कि इसे रिटायर्ड आईएएस अफ़सर अशोक गर्ग ने इसे प्रस्तुत किया है।

manjeet kaur hiisar

By मंजीत कौर 

मेरा जन्म 15 जनवरी, 1990 में सर्दी के माह में छोटे-से गाँव नथवान, रतिया के पास जिला फतेहाबाद में एक बहुत गरीब परिवार में हुआ था। पिता जी शराब पीते थे। हम चार बहनें थीं। एक बहन कुछ दिन की ही थी, तभी निमोनिया की शिकार हुई और दुनिया छोड़ गई। फिर एक भाई हुआ। जिस दिन भाई हुआ, घर में चाय का भी जुगाड़ नहीं था।

नानी हल्दी, नमक, मिर्च-मसाला सब लाई थी। माँ घरों का गोबर डालती थी, वे बदले में गेहूँ-दूध देते थे। भाई तीन साल का हुआ ही था कि माँ ने लड़ाई में जहर खाकर जान दे दी। हमें दादी ने पाला।

मैं कक्षा छह तक पड़ी, पाँचवीं तक गाँव में, एक साल रतिया। वहाँ तक जाने के लिए कोई साधन नहीं था, एक साल तक लिफ्ट लेकर जाती थी, साइकिल खरीदने की हैसियत नहीं थी। कबड्डी खेलती थी मैं। स्कूल स्तर पर, फिर ब्लॉक और जिला स्तर पर। फिर और आगे नम्बर पड़ा, पर मैं हिस्सा न ले सकी। चौथी कक्षा में खेल शुरू किया और छठी कक्षा तक खेली।

घर के खराब हालात के कारण स्कूल छोड़ दिया। रोटी के लिए चाचा के बच्चे रखती थी। चाचा के घर पंखा चलते देख हम भाई-बहन सोचते थे, काश! हमारे घर भी पंखा होता। स्कूल छूटते ही शादी कर दी। मैं 14 साल की थी, सास देखने आई, देखते ही मैं उन्हें पसन्द आ गई। 8 दिन में शादी कर दी गई।

उनका घर बहुत सुंदर था, यही देखकर शादी कर दी थी। यह पापा की पसन्द थी। पति ट्रक कण्डक्टर था, मेरा नाम कुलविन्द्र से मनजीत रख दिया। नाम बदलने पर मुझे बहुत बुरा लगा। सास जल्दी उठने को कहती, पड़ोसियों को बुला लेती। मेरे पति 19 साल के थे और मैं सिर्फ 15 साल की, जब मुझे बेटी हुई। नाम रखा प्रमिला।

पति की एक्सीडेंट में मौत हुई। जब जवान हुई तो विधवा हो गई और माँ बन चुकी थी। मुझे रंगीन सूट पसन्द थे, सफेद पहनने पड़े।

तेरहवीं पर परिवार आया, वे बोले-‘लत्ता ओढ़ाओ, उम्र छोटी है’। मेरा देवर था, पर सास ने मना कर दिया। परिवार के लोगों ने कहा- हम बहू को रखेंगे। पर सास ने एक साल बाद रखने की हामी भरी। भाई मुझे जबरदस्ती अपने घर ले गया, तब मैं गर्भवती थी। मैंने जब इस बारे सास को बताया तो वो मुझे वापस ले आई। सास मुझसे लडती रहती। सतमासा बेटा पैदा हुआ।

आठ माह का बेटा हुआ तब तक कभी पीहर तो कभी सासरे भटकती रहीं। फिर मैंने सास को कहा- अपने बेटे के बच्चे को ले जाए। सास ने रायशुमारी की सबने उसे समझाया-बहू ले आ। सास व देवर सुखदेव मुझे ले आए। आई.टी.आई. में पढ़ता था देवर। उसी से मेरी शादी की गई। फिर मुझे एक बेटी हुई, इतने में उसने आई.टी.आई. पूरी कर ली।

सास ने कहा- मजदूरी करनी पड़ेगी। वह घर से हिसार आ गया। रतन सैनी ठेकेदार के पास 3500 रुपए में ट्रैक्टर चलाने लगा। जब एक महीने की बेटी हुई, मुझे भी ले आया। अब मेरे दो बेटी और एक बेटा (बड़ी प्रमिला, लड़का गुरदिता, परी) थे। मैं हिसार आ गई, महाबीर कॉलोनी में रतन सैनी के प्लॉट में रहने लगे।

खाट-बिस्तर नहीं था। जमीन पर सोती थी। पाँच-दस रुपए की चाऊमिन खाकर सोते थे। रोटी महँगी पड़ती थी। सर्दियों में एक तख्ता मिला, हम चारों उसी पर सोते थे। बड़ी बेटी सास के पास थी। दिन-रात मेहनत की,ट्रैक्टर चलाया। पति लगातार बाहर रहते थे, धीरे-धीरे सैलरी बढ़ती गई। 2012 में मेरा एक और बेटा हआ। नाम रखा अजय।

2014 में मुझे नगर-निगम में पे-रोल पर नौकरी मिली। पर मेरे पति को नहीं मिली। फिर मेरी लगातार बदली होती रही, कभी यहाँ कभी वहाँ। कमेटी वाले बदली करवाते थे। दोबारा रतन सिंह सैनी को ठेका मिल गया। 4 लोगों-गोलू, पवन, सुखदेव व रमेश को नौकरी नहीं मिली। डेढ़ साल बाद गोलू व पवन को नौकरी मिली।

रमेश, सुखदेव रह गए। 2014 से 2020 तक पति वहीं रहे। रमेश को भी नौकरी मिल गई। बस मेरा घरवाला सुखदेव फिर रह गया नौकरी से। हमें न्याय नहीं मिला, क्यों नौकरी नहीं मिली? क्यों मेरे घरवाले के कागज ठीक से नहीं देखे गए?

मेरे पति ने 12 तक पढ़ाई की, कम्प्यूटर कोर्स किया। आई.टी.आई. की है। सबको नौकरी मिली, उसे नौकरी क्यों नहीं मिली?

घोषणा के बावजूद हमें प्लॉट भी नहीं मिले।

गरीबों के साथ रूखा व्यवहार किया जाता है। गरीबों में भी वही खून होता है, जो अमीरों में। पर गरीबों की कोई कदर नहीं है। मैं तो बहुत ही गरीब हूँ, न तो मेरे

पिता हैं, न मेरी माँ है। मेरे तो 4 बच्चे हैं। 2 बेटी व 2 बेटे हैं, जिनके साथ गुजारा करती हूँ। सरकार कहती है कि आपको प्लॉट देंगे। आपकी गरीबी दूर करेंगे। विधवा पेंशन 5000 रुपए की जाएगी। न पेंशन बढ़ी, न प्लॉट मिले।

मैं अपनी बेटियों, प्रमिला व परी को पढ़ा-लिखाकर बड़ा अफ़सर बनाना चाहती हूँ लेकिन महँगाई इतनी बढ़ गई है कि आम आदमी का गुज़ारा नहीं हो सकता।

जनता की पुकार सरकार सुन नहीं रही है, क्या सरकार के कान बंद हो गए हैं? गरीब की सुनवाई नहीं हो रही है। सरकार कहती थी कि कोई गरीब नहीं रहेगा, मुझे तो यही लगता है कि हम ही नहीं रहेंगे।

बेटी प्रमिला 12वीं क्लास में है। उसका सपना है कराटे में अपना भविष्य बनाने का। बड़ा बेटा इंजीनियर बनना चाहता है जबकि परी का सपना डॉक्टर बनने का है। छोटे का सपना है, आर्मी ज्वाइन करने का।

इनके सपने पूरे करने के लिए अभी हमारी लड़ाई जारी है।

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Workers Unity Team

4 thoughts on “हिसार की सफ़ाई कर्मचारी मंजीत कौर कौन हैं, जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल

  1. Klikam tu od wiosny, wiec mysle ze moge cos skrobnac. Znalazlem to przez znajomego z innego watku, z prostego powodu — wkurzalo mnie tego cyrku z dokumentami gdzie indziej. To co FieryPlay ma w lobby wyglada solidnie — jakies 2500 pozycji, w wiekszosci Pragmatic Play, Play’n GO, NetEnt i troche Yggdrasil i paroma rzeczami od Big Time Gaming.

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