यूनियन लीडर शिव कुमार के उत्पीड़न पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने तत्काल दख़ल की अपील की
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रक्षा के लिए बनी ऑब्ज़र्वेटरी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स डिफ़ेंडर्स ने हरियाणा के एक ट्रेड यूनियन लीडर शिव कुमार के उत्पीड़न को गंभीर बताते हुए, भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
यह ऑब्ज़र्वेटरी, इंटरनेशनल फ़ेडरेशन फ़ॉर ह्यूमन राइट्स (एफ़आईडीएच) और वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर (ओएमसीटी) की पार्टनरशिप में गठित की गई है।
ऑब्ज़र्वेटरी ने एक बयान जारी कर कहा है कि उसे सूचना दी गई है कि भारतीय अधिकारियों द्वारा शिव कुमार को लगातार परेशान किया जा रहा है। शिव कुमार दलित समुदाय के एक मुखर मज़दूर अधिकार कार्यकर्ता हैं और हरियाणा में ठेका मज़दूरों के लिए काम करने वाले मजदूर अधिकार संगठन (एमएएस) के सदस्य हैं।
बयान के अनुसार, 16 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने तथाकथित ‘लखनऊ षड्यंत्र मामले’ (एफ़आईआर संख्या आरसी-01/2023/एनआईए/लखनऊ) के संबंध में शिव कुमार को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है, जिसमें औपचारिक रूप से उनका नाम कार्यवाही में शामिल किया गया और उनकी गिरफ्तारी का तत्काल ख़तरा पैदा हो गया है।
इस तत्काल अपील के प्रकाशन के समय तक, शिव कुमार पर औपचारिक रूप से कोई आरोप नहीं लगाया गया है। दरअसल यह अपील 13 मई को जारी की गई थी।
बयान के मुताबिक़, लखनऊ षड्यंत्र मामला, उत्तरी भारत में माओवादी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के कथित प्रयासों की जांच के लिए एनआईए द्वारा सितंबर 2023 में शुरू की गई एक आपराधिक जांच है।
यह मामला कई भारतीय राज्यों के मानवाधिकार रक्षकों, मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं, छात्रों और वकीलों के ख़िलाफ़ खोला गया है।
अधिकारियों ने इस मामले का इस्तेमाल भारतीय दंड संहिता की धारा 120ए (वर्तमान में नवगठित भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61 के तहत) के तहत “आपराधिक षड्यंत्र” से संबंधित कथित अपराधों और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए, 1967) की धारा 10 सहित विभिन्न धाराओं के तहत “चरमपंथी संगठनों से संबंध” के आरोपों की जांच के लिए किया है।
इस मामले के दायरे में, अधिकारियों ने मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक न्याय आंदोलनों में लगे व्यक्तियों, विशेष रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों के साथ काम करने वालों के खिलाफ गिरफ्तारियां, पूछताछ और निगरानी की है।
हिरासत में टॉर्चर के आरोप
यह पहली बार नहीं है जब शिव कुमार को इस तरह के मानसिक और शारीरिक शोषण से गुज़रना पड़ा है। इससे ठीक एक महीने पहले, 12 मार्च 2026 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उन्हें दयाल सिंह कॉलेज के पास से बिना किसी वारंट या कारण बताए अवैध रूप से उठा लिया था।
आरोप है कि न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में उन्हें लगभग 60 घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया। पुलिस अधिकारियों ने उन पर दबाव डाला कि वे अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ झूठी गवाही दें।
जब शिव कुमार ने ऐसा बोलने से इनकार कर दिया, तो पुलिस ने टॉर्चर किया। उन्हें निर्वस्त्र किया गया, बेरहमी से पीटा गया और अमानवीय यातनाएं दी गईं।
आख़िरकार, उनके पिता द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबयस कॉर्पस) याचिका के बाद, 14-15 मार्च की रात उन्हें रिहा किया गया।
ऑब्ज़र्वेटरी के अनुसार, शिव कुमार ने 2021 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान उनकी हुई गिरफ़्तारी के बाद पुलिसिया टॉर्चर के आरोप लगाए थे। 16 जनवरी 2021 को हरियाणा पुलिस ने उन्हें अगवा कर लिया था। उस दौरान उन पर पिस्तौल तानकर जान से मारने की धमकियां दी गईं, आँखों पर पट्टी बांधकर तलवों पर लाठियां बरसाई गईं और सिर पर ठंडे पानी की बौछारें मारकर सोने नहीं दिया गया।
इस मामले में जुलाई 2022 में न्यायिक जांच की रिपोर्ट आई जिसमें कहा गया कि पुलिस हिरासत में शिव कुमार को अवैध रूप से रखकर प्रताड़ित किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चिंता
‘द ऑब्जर्वेटरी’ ने याद दिलाया है कि भारत ‘इंटरनेशनल कोवेनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स’ (आईसीसीपीआर) का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है, जिसके तहत किसी को भी प्रताड़ित करना या अवैध हिरासत में रखना मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।
संगठन ने मांग की है कि संयुक्त राष्ट्र के संधियों के तहत शिव कुमार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे बिना किसी डर के हाशिए पर मौजूद लोगों की आवाज़ बुलंद कर सकें।
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