भारत की न्यूनतम मज़दूरी: ख़रीदने की क्षमता के हिसाब से कितना कमाते हैं मज़दूर?

भारत की न्यूनतम मज़दूरी: ख़रीदने की क्षमता के हिसाब से कितना कमाते हैं मज़दूर?

भारत में सैलरी बढ़ाने को लेकर अभी बीते फ़रवरी से तमाम शहरों, ख़ासकर राजधानी दिल्ली समेत इसके आस पास के औद्योगिक इलाक़ों में मज़दूरों का स्वतःस्फूर्त आंदोलन देखा गया, उसकी जड़ में न्यूनतम मज़दूरी का अपेक्षाकृत निम्नतम स्तर भी रहा है। 

दरअसल, दुनिया भर में न्यूनतम मज़दूरी के बारे में आंकड़े जुटाने वाली संस्था अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के आंकड़ों के आधार पर विज़ुअल कैपिटलिस्ट ने ख़रीदने की क्षमता के आधार पर न्यूनतम मज़दूरी को लेकर 130 देशों की एक रैंकिंग तैयार की है। आंकड़े 2024 के न्यूनतम मज़दूरी के आधार पर तैयार किये गए हैं।

इसके अनुसार, मासिक न्यूनतम मज़दूरी के मामले में भारत 130 देशों में 111वें स्थान पर है।

यह आंकड़ा क्रय शक्ति समानता यानी पीपीपी के हिसाब से तैयार की गई है, जिसके अनुसार, भारत की न्यूनतम मजदूरी 233 डॉलर प्रति माह है। यह आंकड़ा चीन, अमेरिका और जापान से काफ़ी कम है, जो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में न्यूनतम मजदूरी के स्तर में बड़े अंतर को दिखाता है।

लेकिन इन आंकड़ों की और गहराई में जाएं, आईए पीपीपी यानी पर्चेंजिंग पावर पैरिटी या क्रय शक्ति समानता को समझें।

minimum wage around world
curtsy- Visual Capitalist

पीपीपी क्या है?

सरल भाषा में, पीपीपी यह बताता है कि अलग-अलग देशों में एक जैसी रकम से कितनी चीज़ें खरीदी जा सकती हैं।

मान लीजिए भारत में 1000 रुपये में जितना सामान खरीदा जा सकता है, वही सामान अमेरिका में 10 डॉलर में मिलता है। ऐसे में पीपीपी के आधार पर 1000 रुपये और 10 डॉलर की खरीद क्षमता को बराबर माना जा सकता है।

इसलिए जब किसी देश की न्यूनतम मजदूरी को पीपीपी के हिसाब से डॉलर में बताया जाता है, तो सिर्फ मुद्रा की मौजूदा विनिमय दर नहीं देखी जाती, यह भी देखा जाता है कि उस मज़दूरी से उस देश में स्थानीय क़ीमतों के हिसाब से कितना सामान और सेवाएं खरीदी जा सकती हैं।

भारत की पीपीपी से समायोजित न्यूनतम मज़दूरी के 233 डॉलर का मतलब है कि भारत की न्यूनतम मज़दूरी की खरीद क्षमता को अमेरिकी क़ीमतों के संदर्भ में मापने पर वह लगभग 233 डॉलर के बराबर बैठती है। यह ज़रूरी नहीं कि भारतीय मज़दूरों को वास्तव में 233 डॉलर मिलते हों।

अब आते हैं आईएलओ के आंकड़ों पर।

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न्यूनतम मज़दूरी किस देश की कितनी?

स्विट्जरलैंड इस सूची में 3,804 डॉलर प्रति माह के साथ सबसे ऊपर है। हालांकि, वहां न्यूनतम मज़दूरी पूरे देश के लिए एक जैसी नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर तय की जाती है।

शीर्ष 10 देशों में से आठ यूरोप के हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड इस सूची में यूरोप के बाहर के दो देश हैं।

अमेरिका 1,257 डॉलर प्रति माह के साथ 130 देशों में 25वें स्थान पर है। यह आंकड़ा 7.25 डॉलर प्रति घंटे की संघीय न्यूनतम मज़दूरी के आधार पर है।

दुनिया भर में न्यूनतम मज़दूरी में काफ़़ी अंतर है। केवल घोषित न्यूनतम मज़दूरी की तुलना करने से यह साफ़ नहीं होता कि कर्मचारी अपनी कमाई से वास्तव में कितनी चीज़ें खरीद सकते हैं।

जहां किसी देश में एक समान राष्ट्रीय न्यूनतम मज़दूरी नहीं है, वहां ILOSTAT देशों के बीच तुलना के लिए लागू दूसरे न्यूनतम मज़दूरी स्तरों का इस्तेमाल करता है।

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एशिया में सबसे ऊपर दक्षिण कोरिया

स्विट्जरलैंड 3,804 डॉलर प्रति माह के साथ इस सूची में सबसे ऊपर है। इसके बाद जर्मनी, ब्रिटेन और नीदरलैंड लगभग 2,900 डॉलर प्रति माह के आंकड़े के साथ आते हैं।

एशिया में दक्षिण कोरिया 2,362 डॉलर प्रति माह के साथ सबसे आगे है। ILO ने 2024 में अमेरिका की तुलना के लिए राज्यों की औसत न्यूनतम मजदूरी 10.69 डॉलर प्रति घंटे के बजाय 7.25 डॉलर प्रति घंटे की संघीय न्यूनतम मज़दूरी को आधार बनाया है।

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