मानेसर से लेकर नोएडा तक ताबड़तोड़ गिरफ़्तारियां, कई मज़दूर नेताओं को जेल भेजा

मानेसर से लेकर नोएडा तक ताबड़तोड़ गिरफ़्तारियां, कई मज़दूर नेताओं को जेल भेजा

हरियाणा के गुड़गांव-मानेसर और उत्तर प्रदेश के नोएडा में भड़के मज़दूरों के व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद से दर्जनों प्रदर्शनकारी वर्करों और मज़दूर नेताओं के साथ मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं की ताबड़तोड़ गिरफ़्तारियां हुई हैं।

बीते 9 अप्रैल के प्रदर्शन के सिलसिले में हरियाणा पुलिस ने मानेसर गुड़गांव औद्योगिक क्षेत्र से 56 से अधिक वर्करों को गिरफ़्तार किया गया है जबकि इंकलाबी मज़दूर केंद्र के नेताओं श्यामबीर, हरीश और राजू, बेलसोनिका यूनियन के मज़दूर नेता अजीत और पिंटू यादव, और मुंजाल शोवा के मज़दूर आकाश को भी गिरफ़्तार कर भोंडसी जेल भेज दिया है।

उधर, द हिंदू की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार यानी 14 अप्रैल को बताया कि नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शनों के सिलसिले में 300 लोगों को गिरफ़्तार किया गया जबकि सात एफ़आईआर दर्ज़ की गई हैं।

इसके अलावा नोएडा में मज़दूर संगठन बिगुल मज़दूर की ओर से कहा गया है कि उसके कार्यकर्ताओं रूपेश, आकृति, सृष्टि व मनीषा को गिरफ़्तार किया गया है। साथ ही
यह भी दावा किया गया है कि जब दो वकील और कुछ कार्यकर्ता सूरजपुर कोर्ट पहुंचे तो यूपी पुलिस ने उठा लिया।

उत्तराखंड के रुद्रपुर में कई मज़दूर संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हरियाणा, यूपी में मज़दूरों के हक़ और दमन व गिरफ्तारियों के विरोध में प्रदर्शन और पुतला दहन किया
हरियाणा, यूपी में मज़दूरों के हक़ और दमन व गिरफ्तारियों के विरोध में प्रदर्शन और पुतला दहन

मज़दूर संगठनों ने जताया विरोध

कई मज़दूर संगठनों ने इन गिरफ़्तारियों का विरोध किया है और बयान जारी किया है।

इंकलाबी मज़दूर केंद्र ने एक बयान जारी कर कहा है कि “9 अप्रैल की घटना के लिए इंकलाबी मज़दूर केंद्र के कार्यकर्ताओं श्यामवीर, हरीष और राजू, बेलसोनिका के अजीत और पिंटू यादव और मुंजाल शोवा के आकाश को गिरफ़्तार करने और उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने की हम कड़ी निंदा करते हैं।”

बयान में कहा गया है कि 9 अप्रैल की घटना के लिए फ़ैक्ट्री प्रबंधन और पुलिस प्रशासन ज़िम्मेदार है और इस पूरी घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए।

बयान के अनुसार, “देशी विदेशी पूंजी के दबाव में मज़दूर कार्यकर्ताओं को फंसाया जा रहा है। केंद्र की मोदी सरकार और हरियाणा की बीजेपी सरकार एक दम नग्न होकर पूंजीपतियों के हितों को साध रही है।”

एक्टू के महासचिव राजीव डिमरी ने एक बयान जारी कर कहा है कि “ऐक्टू के गौतम बुद्ध जिला कमिटी अध्यक्ष, कामरेड अमर सिंह समेत अन्य कई यूनियन नेताओं को घरों में नजरबंद कर दिया गया है। कई मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं और मजदूरों को कानूनी मदद करने के लिए गए वकीलों तक को नोएडा पुलिस ने अपना निशाना बनाया है। ऐक्टू इस तरह के तमाम दमनात्मक कार्रवाइयों की भर्त्सना करता है और उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा सरकार से सभी गिरफ्तार मजदूरों और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग करता है।”

डिमरी ने कहा कि “निरंतर चल रहे प्रदर्शनों से यह बात साफ है कि देश के मजदूर कॉरपोरेट मुनाफाखोरों और डबल–ट्रिपल इंजन की सरकारों के गठजोड़ को साफ देख पा रहे हैं और इससे बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। ऐक्टू सरकार को चेतावनी देना चाहता है कि अगर जल्द ही मालिकों और सरकार ने अपनी ज़िद्द नहीं छोड़ी तो तमाम दमन के बावजूद आनेवाले दिनों में ये आंदोलन और तेजी से फैलेंगे।”

मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान नाम के एक ट्रेड यूनियनों के मंच ने बयान जारी कर गिरफ़्तारियों की निंदा की है।

मासा ने एक बयान जारी कर कहा, “9 अप्रैल 2026 को गुड़गांव–मानेसर में मॉडेलमा और रिचा ग्लोबल के 56 से अधिक मज़दूरों — जिनमें 20 महिलाएं भी शामिल हैं — की गिरफ्तारी और उन पर हत्या के प्रयास, आगजनी व दंगे जैसी संगीन धाराओं का आरोपण अत्यंत निंदनीय है।”

“इसके साथ ही इंकलाबी मज़दूर केंद्र के कार्यकर्ताओं श्यामबीर, हरीश और राजू, बेलसोनिका के अजीत और पिंटू यादव, तथा मुंजाल शोवा के मज़दूर आकाश को 9 अप्रैल की तोड़फोड़ और आगजनी का साजिशकर्ता बताकर गिरफ्तार करना एक सुनियोजित षड्यंत्र है। मासा स्पष्ट करता है कि 9 अप्रैल की घटना के लिए कार्यकर्ता और मज़दूर नहीं, बल्कि फैक्टरी प्रबंधन से जुड़े लोग और पुलिस–प्रशासन जिम्मेदार हैं। इसकी निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिए।”

नोएडा में मज़दूर कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और पुलिस द्वारा उठाए जाने को मासा ने ‘कानून के राज का खुला मखौल’ करार दिया है।

बयान के अनुसार, “साथ ही सीटू नेताओं जयभगवान व विनोद को फेसबुक पर भड़काऊ भाषण का आरोप लगाकर नोटिस जारी करना, और लखनऊ पुलिस द्वारा कवयित्री कात्यायनी, पत्रकार सत्यम वर्मा तथा पत्रकार व अमर उजाला के भूतपूर्व संपादक संजय श्रीवास्तव को हिरासत में लेना — यह सब मिलकर एक ही दमनकारी रणनीति के हिस्से हैं।”

बयान में कहा गया है कि “बाहरी तत्वों का बहाना बनाकर इस न्यायसंगत और लोकतांत्रिक आंदोलन में एकजुटता व्यक्त करने आए मज़दूर संगठनों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना इसी दमनकारी रणनीति का हिस्सा है — जिसका एकमात्र उद्देश्य आंदोलन को तोड़ना और मज़दूरों को अलग-थलग करना है।”

अप्रैल 2026 में अब तक हुई मजदूरों की स्वतःस्फूर्त हड़तालें

ऊर्जा क्षेत्र :-

1) IOCL पानीपत (हरियाणा) – 01 अप्रैल

पुरानी मांगें पूरी न होने पर हड़ताल फिर से शुरू हुई, लेकिन 1 दिन बाद खत्म हो गई।

2) NTPC पतरातू (झारखंड) – 01 अप्रैल

मज़दूरी, 8 घंटे काम, और काम की स्थितियों को लेकर।

3) NTPC नवीनगर (बिहार) – 01 अप्रैल
मज़दूरी, 8 घंटे काम, OT, काम की स्थितियों को लेकर।

4) अडानी पावर प्लांट, रायखेड़ा (रायपुर, छत्तीसगढ़) – 01 अप्रैल
मज़दूरी, 8 घंटे काम, OT, काम की स्थितियों को लेकर।

औद्योगिक क्षेत्र 

सामान्य मांगे: वेतन वृद्धि, 8 घंटे कार्यदिवस, ओवरटाइम, कार्य की बेहतर शर्तें।
मुख्यतः ठेका मजदूरों द्वारा संचालित।

IMT मानेसर, हरियाणा में:

5) होंन्डा – 02 अप्रैल – 2 दिन बाद सफल रही।
6) मुंजाल शोवा – 04 अप्रैल
7) सत्यम ऑटो कम्पोनेन्ट – 04 अप्रैल
8) रूप पॉलिमर लिमिटेड – 06 अप्रैल
9) ऋचा ग्लोबल – 07 अप्रैल – कई प्लांटों में ठेका मज़दूरों की हड़ताल।
10) मॉडेलमा एक्स्पोर्ट – 08 अप्रैल

11) रिको ऑटो
12) सुपराजीत इंजीनियरिंग
13) सिरमा SGS टेक्नॉलजी
14) फोरजा मेडी प्रा. लि.
15) फैशन (एफ ए होम ऐंड अपेरल)
16) औमोवियो इंडिया
17) प्रीकोल लि.
18) सरिता हांडा एक्सपोर्ट

नोएडा, यूपी में :-
19) ऋचा ग्लोबल (व अन्य गार्मेंट फैक्ट्रियाँ) – 09अप्रैल

13 अप्रैल को नोएडा में मदरसन समेत कई कंपनियों के मज़दूर सड़कों पर उतरे

फरीदाबाद, हरियाणा में :-
20) भारत गियर्स लि. – 09 अप्रैल

पानीपत, हरियाणा में :-
21) गुप्ता स्पिनिंग मिल – 10 अप्रैल

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