कर्नाटक में न्यूनतम वेतन में डेढ़ गुने से अधिक वृद्धि, अकुशल और कुशल मज़दूरों की सैलरी कितनी हुई जानिए

कर्नाटक में न्यूनतम वेतन में डेढ़ गुने से अधिक वृद्धि, अकुशल और कुशल मज़दूरों की सैलरी कितनी हुई जानिए

कर्नाटक ने राज्य में न्यूनतम वेतन में डेढ़ गुने से भी ज़्यादा लगभग 60 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है और इसके साथ ही न्यूनतम मज़दूरी अधिकतम 31,100 रुपये प्रतिमाह हो गई है।

22 मई को जारी कर्नाटक सरकार के नोटिफ़िकेशन के अनुसार कर्मचारियों को ख़तरे के अधार पर तीन ज़ोन में बांटा गया है, जिसमें मजदूर 83 अलग-अलग तरह के कामों से जुड़े हुए हैं।

राज्य में क़रीब 1 करोड़ मजदूरों के लिए यह ऐसे समय में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है जब ईरान जंग के कारण महंगाई चरम पर है और दस दिनों के अंदर तीन बार पेट्रोल डीज़ल के दाम बढ़ गए हैं।

इससे पहले मज़दूरों के व्यापाक विरोध प्रदर्शन के कारण हरियाणा में न्यूनतम सैलरी में 33 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई और उत्तर प्रदेश के नोएडा ग़ाजियाबाद में 22 प्रतिशत की न्यूनतम सैलरी बढ़ाने की घोषणा की गई थी।

अधिसूचना में क्या कहा गया है?

बीबीसी की ख़बर के अनुसार, कर्नाटक सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अकुशल से लेकर अत्यधिक कुशल मज़दूरों के लिए ज़ोन 3 से जोन वन में न्यूनतम वेतन की दर 19,300 रुपये से लेकर 31,000 रुपये तक है।

कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने कहा, “हमने 16,500 रुपये की बेसिक सैलरी में हर साल 500 रुपये महंगाई भत्ता जोड़कर, अकुशल मजदूरों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर करीब 23,000 रुपये कर दिया है।’

उन्होंने कहा कि न्यूनतम मज़दूरी की पूरी गणना साल 1991 के रेप्टोकोस ब्रेट मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आधारित थी। इस फ़ैसले में इस बारे में खास दिशा-निर्देश तय किए गए थे कि मज़दूरी कैसे तय की जानी चाहिए।

संतोष लाड ने कहा ‘‘इसमें माता-पिता और दो छोटे बच्चों वाले परिवार के लिए ज़रूरी भोजन को ध्यान में रखा गया था, जिसमें औसत कैलोरी की खपत 2700 तय की गई थी, साथ ही 62-72 गज़ कपड़ा, प्रोटीन, सब्ज़ियाँ और फल भी शामिल थे। क़ीमतों की गणना तीन बाज़ारों में जाँच करने के बाद की जानी थी। इसके अलावा शिक्षा, सेहत और मकान किराये के लिए 20 प्रतिशत और जोड़ा गया था।’’

1991 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कार्यान्वयन तब हुआ, जब ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने अधिसूचना जारी होने पर संशोधित वेतन के मुद्दे को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने न्यूनतम वेतन की गणना के आधार के रूप में विशेष रूप से ‘रेप्टाकोस ब्रेट केस’ के फ़ॉर्मूले को अपनाने को कहा था।

पिछले महीने उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़े पैमाने पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद कुशल मज़दूरों के लिए न्यूनतम वेतन 16,868 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और अकुशल के लिए 13,690 रुपये कर दी थी।

दूसरी ओर हरियाणा ने अत्यधिक कुशल मज़दूरों के लिए मज़दूरी 19,425 रुपये, कुशल के लिए 18,500 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 16,780 रुपये और अकुशल के लिए 15,290 रुपये कर दी थी।

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भत्ता और भत्ते की गणना

1. परिवर्तनीय महंगाई भत्ता

महंगाई भत्ते की गणना सालाना की जाएगी। पिछले कैलेंडर वर्ष के 12 महीनों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) अंकों के औसत के आधार पर, यह गणना हर साल 1 अप्रैल से की जाएगी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इकाइयों के वार्षिक औसत अंक से ऊपर होने वाली आनुपातिक वृद्धि या कमी ही गणना का आधार बनेगी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 9469 से अधिक होने वाली प्रत्येक सूचकांक इकाई के लिए, सभी श्रेणियों के श्रमिकों को प्रतिदिन चार (4) पैसे का महंगाई भत्ता दिया जाएगा।

महंगाई भत्ते की गणना की विधि:

a) मासिक वेतन पाने वालों के लिए:
मासिक महंगाई भत्ता = CPI इकाइयों में वार्षिक वृद्धि या कमी × महंगाई भत्ते की दर × 30 दिन

दैनिक वेतन भोगियों के लिए, इस गणना के उद्देश्य से मासिक वेतन दरों को 26 दिनों (4 छुट्टियों को छोड़कर) से विभाजित किया जाएगा। यदि गणना में कोई भिन्न (fraction) आता है, तो उसे निकटतम रुपये में पूर्णांकित (rounded off) किया जाएगा।

b)दिहाड़ी पाने वालों के लिए:
दैनिक महंगाई भत्ता = वार्षिक वृद्धि वाली इकाइयाँ × महंगाई भत्ते की दर × 30 दिन ÷ 26

2. महिलाओं, पुरुषों, तीसरे लिंग (third gender) के व्यक्तियों और दिव्यांग व्यक्तियों को एक ही प्रकार का काम करने के लिए समान अनुपात में समान वेतन दिया जाएगा।
3. अधिसूचना में उल्लिखित श्रेणियों में एक ही प्रकार का काम करने वाले श्रमिकों को वही वेतन दिया जाएगा जो उस प्रकार का काम करने वाले अन्य श्रेणी के श्रमिकों को दिया जा रहा है।
4. पीस-रेट (piece-rate) के आधार पर काम करने वाले श्रमिक — 8 घंटे के काम का वेतन, उसी प्रकार का काम करने वाले किसी अन्य श्रमिक के दैनिक वेतन से कम नहीं होगा। एक दिन के काम का अर्थ है 8 घंटे का काम। यदि श्रमिकों को 8 घंटे से कम समय के लिए काम पर लगाया जाता है, तो दिन या मासिक वेतन दर के आधार पर आनुपातिक वेतन की गणना तदनुसार की जाएगी।
5. दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी अपनी मासिक वेतन दरें निकालते समय अपने वेतन की गणना 26 दिनों के आधार पर करेंगे। यदि गणना में कोई भिन्न आता है, तो उसे निकटतम रुपये में पूर्णांकित किया जाएगा।
6. किसी प्रतिष्ठान में घोषित छुट्टियों या अतिरिक्त त्योहार की छुट्टियों के दिनों में काम करने वाले श्रमिकों को, न्यूनतम वेतन अधिनियम और नियमों के तहत निर्धारित सामान्य न्यूनतम वेतन का दोगुना भुगतान किया जाएगा।
7. यदि कोई श्रमिक निर्धारित अवधि से अधिक समय तक काम करता है, तो उसे उस अतिरिक्त कार्य अवधि के लिए दोगुना वेतन दिया जाएगा। 8. मज़दूरी की गणना में, आने वाले भिन्नात्मक मानों को 50 पैसे तक पूर्णांकित किया जाएगा।
9. मज़दूरों को मज़दूरी चेक के माध्यम से या सीधे उनके बैंक खातों में जमा करके दी जाएगी।

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