पंजाब के बिजली कर्मचारी आज आधी रात से हड़ताल पर, क्या भगवंत मान सरकार मानेगी

पंजाब के बिजली विभाग के कर्मचारी सोमवार की आधी रात से हड़ताल पर जाने का एलान किया है।
बिजली कर्मचारियों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बिजली निगम के कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े विभिन्न संगठनों ने प्रबंधन के सामने 33 सूत्रीय मांगपत्र रखा है। इसमें वेतनमान, पेंशन, महंगाई भत्ता, पदोन्नति, नियमित भर्ती, आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण, भत्तों की बहाली और कार्यस्थल पर सुविधाओं जैसे कई अहम मुद्दे शामिल हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाए ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत मिल सके.
पंजाब में संगरूर सर्किल के बिजली कर्मचारी नेता निर्भय सिंह ने कहा है कि इस हड़ताल में एम्प्लाइज़ ज्वाइंट फोरम, एकता मंच, इंजीनियर ऑफ़िसर्स एसोसिएशन और ग्रिड सब स्टेशन से जुड़ी सभी यूनियनें 20 जुलाई की रात 12 बजे से हड़ताल पर चले जाएंगी।
निर्भय सिंह ने कहा कि इस हड़ताल की सारी ज़िम्मेदारी पंजाब की भगवंत मान सरकार और बिजली बोर्ड के मैनेजमेंट की होगी क्योंकि पिछली कई वार्ताओं में तमाम वादे और लिखित आश्वासनों के बावजूद कर्मचारियों की मांगों को अमल में नहीं लाया गया।
उन्होंने कहा, “ये हड़ताल आज से शुरू हो रही है लेकिन अगर कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी गईं तो ये हड़ताल आगे भी बढ़ सकती है और हम पीछे नहीं मुड़ेंगे।”

प्रमुख मांगें
मांगपत्र में सबसे प्रमुख मांग नए नियुक्त कर्मचारियों को केंद्रीय वेतनमान की जगह बिजली निगम का वेतनमान देने की है।
इसके साथ ही 17 जुलाई 2020 से पहले भर्ती हुए वर्कचार्ज कर्मचारियों को सहायक लाइनमैन मानते हुए निगम का वेतनमान देने की मांग की गई है। 15 जनवरी 2015 के बाद भर्ती कर्मचारियों को प्रोबेशन के दौरान सभी भत्तों सहित पूरा वेतन देने की भी मांग उठाई गई है।
कर्मचारी संगठनों ने 1 जनवरी 2016 से पहले और बाद में भर्ती कर्मचारियों के वेतन संशोधन और पदोन्नति से जुड़े मामलों में समान लाभ देने की मांग की है। महंगाई भत्ते की 18 प्रतिशत बकाया किस्तें जारी करने, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने और प्रोबेशन के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को वास्तविक मूल वेतन के आधार पर पारिवारिक या विशेष पेंशन देने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई है।
मांगपत्र में वेतन संशोधन के दौरान 15 प्रतिशत वृद्धि, पेंशन संशोधन में फैक्टर बढ़ाने, डेवलपमेंट टैक्स की कटौती बंद करने और सोलैशियम नीति में बदलाव की मांग की गई है।
इसके अलावा विवाहित बेटियों, कपल केस, आयु सीमा में छूट और अन्य लंबित मामलों को दोबारा आवेदन का अवसर देने की भी बात कही गई है।
कर्मचारी संगठनों ने 1 जुलाई 2021 से बंद किए गए ग्रामीण और बॉर्डर एरिया भत्ते बहाल करने, जनरेशन इंसेंटिव का बकाया जारी करने, क्लर्क और लाइन स्टाफ के विशेष व जोखिम भत्तों में बढ़ोतरी तथा जूनियर इंजीनियरों के समयबद्ध पदोन्नति वेतनमान को जारी रखने की मांग की है।
मांगपत्र में विभिन्न श्रेणियों में समान वेतनमान, अनुबंध सेवा को नियमित सेवा में जोड़ने, पदोन्नति कोटा बढ़ाने और रिक्त पदों पर समयबद्ध पदोन्नति देने की मांग भी शामिल है। साथ ही विभाग में रिक्त पदों को नियमित भर्ती से भरने, सहायक लाइनमैन और लाइनमैन की भर्ती तेज करने तथा अप्रेंटिस पास कर्मचारियों को जल्द पदोन्नत करने की बात कही गई है।
कर्मचारी संगठनों ने राजनीतिक आधार पर तबादलों पर रोक लगाने, कैशलेस इलाज की सुविधा लागू करने, आउटसोर्स कर्मचारियों को विभाग के अधीन लेकर नियमित करने, ओवरटाइम का समय पर भुगतान करने और पेंशनरों के लंबित लाभ जारी करने की भी मांग रखी है।
इसके अलावा विभागीय परीक्षाओं का नियमित आयोजन, कार्यालयों और सब स्टेशनों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने, महिला कर्मचारियों के लिए अलग सुविधाएं विकसित करने और ग्रिड सब स्टेशनों में आधुनिक व्यवस्थाएं करने की मांग भी की गई है।
मांगपत्र में थर्मल प्लांटों और अन्य इकाइयों में नियमित पद सृजित करने, निजी कंपनियों के बजाय निगम के नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति करने, वेतन और पेंशन विसंगतियों को दूर करने, कंप्यूटर प्रशिक्षण को मान्यता देने, रियायती बिजली सुविधा बहाल करने, लंबित अनुशासनात्मक मामलों का समयबद्ध निपटारा करने और पूर्व सैनिक कर्मचारियों को सेवा संबंधी लाभ देने की मांग भी शामिल है।
इसके अलावा कर्मचारी संगठनों ने फील्ड और ग्रिड स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त समितियां बनाने, ईआरपी प्रणाली लागू करने के लिए कर्मचारियों को लैपटॉप और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, अतिरिक्त गैर-विभागीय ड्यूटी समाप्त करने तथा विदेश यात्रा के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग भी उठाई है।
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