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बेलसोनिका में 160 ठेका मज़दूरों को घर बैठने का नोटिस, कंपनी ने पंखे तक कर दिए बंद

बेलसोनिका वर्कर्स यूनियन ने लेबर कमिश्नर कार्यालय में मांगपत्र दे रखा है और इस दौरान किसी मज़दूर को नहीं निकाला जा सकता

By खुशबू सिंह

मानेसर में स्थित बेलसोनिका ऑटो कॉम्पोनेन्ट फैक्ट्री में 5-6 सालों से ठेका पर काम कर रहे 160 मज़दूरों को फैक्ट्री ने अचानक से “नो वर्क, नो पे” नोटिस दे दिया है।

बेलसोनिका कंपनी चार पहिया वाहन बनाने की मारुति के ऑटो पार्ट्स बनाती है।

बेलसोनिका यूनियन के जनरल सेक्रेटरी जसवीर सिहं ने बताया, “160 मज़दूरों को फैक्ट्री ने चुपके से घर पर ही नोटिस भेज दिया है। नोटिस पर कोई नाम पता नहीं है।”

उनके अनुसार, “फैक्ट्री में 1391 कर्मचारी काम करते हैं। इनमें से 450 मज़दूर अस्थाई थे, 290 मज़दूरों को फैक्ट्री 17 मई को निकाल चुकी थी। बाकी के 160 मज़दूरों को फैक्ट्री प्रबंधन लॉकडाउन के बाद से काम पर नहीं बुला रहा था, जब हमने प्रबंधन से कारण पूछा तो टाल-मटोल करने लगा। फिर 15 जून को खुलासा हुआ कि फैक्ट्री के तरफ से अस्थाई मज़दूरों को “नो वर्क, नो पे” नोटिस दे दिया गया है।”

जसवीर सिंह का दावा है कि सिर्फ काम से निकाला ही नहीं गया है जो लोग वेतन लेने के लिए फैक्ट्री में मौजूद नहीं थे, उन्हें उनका वेतन भी नहीं दिया गया है।

लॉकडाउन के बाद 17 मई को फैक्ट्री खुल गई थी। स्थाई मज़दूरों से काम कराया जा रहा था।

160 अस्थाई मज़दूरों को कोरोना के कारण आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए काम से निकाल दिया है।

जसवीर सिंह ने कहा, “फैक्ट्री प्रबंधन का दावा है कि जैसे ही हालात में सुधार आता है 160 मज़दूरों को काम पर रख लिया जाएगा।”

ये सारे वर्कर लॉर्ड वरुण कारपोरेट सर्विस लिमिटेड कंपनी के तहत ठेके पर रखे गए हैं।

लेबर कोर्ट में मांग पत्र पड़ा है लम्बित

उन्होंने कहा, “बेलसोनिका का लेबर कोर्ट में मांग पत्र लम्बित पड़ा है। कानूनन जब तक मांग पत्र क्लीयर नहीं हो जाता है, तब तक प्रबंधन बिना सरकार से अनुमति लिए किसी भी कर्मचारी को काम से नहीं निकाल सकता है।”

उनका कहना है कि ‘प्रबंधन ने मज़दूरों के साथ धोखा किया है। इसीलिए हम आने वाले सप्ताह में विरोध प्रदर्शन करने वाले हैं।’

जसवीर सिंह ने कहा, “श्रम कानून के रद्द होने के बाद फैक्ट्री मालिक मज़दूरों का शोषण करने पर उतारू हैं। बेलसोनिका में पहले एसी में काम करते थे, पर अब 45 डिग्री की गर्मी में पंखा भी बंद कर दिया गया है।”

इस से पहले देश की 60 साल पुरानी सबसे बड़ी साइकिल निर्माता  कंपनी “एटलस” ने दशकों से काम कर रहे कर्मचारियों को एक झटके में बेरोजगार कर दिया था।

कंपनी ने गेट पर लगाए गए नोटिस में दावा किया गया था कि आर्थिक तंगी के कारण और कहीं से फंड ना मिलने पर कंपनी पर ताला लगाने और कर्मचारियों को ले ऑफ़ देने का फैसला लेना पड़ा।

12 करोड़ बेरोज़ग़ार

बेलसोनिका इंडिया प्रा.लि. की शुरुआत 6 अगस्त 2006 में हुई थी। इसके सीईओ हिरोकी सुजुकी हैं।

5 मई को, इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, निजी क्षेत्र के एक प्रमुख थिंक टैंक का कहना है कि लॉकडाउन के चलते भारत में अप्रैल में 12 करोड़ 20 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं।

लॉकडाउन के कारण 130 करोड़ आबादी वाले देश में कई उद्दम बंद हो गए हैं।

इसके चलते 3 मई को समाप्त हुए सप्ताह में देश में बेरोजगारी दर 27.1% पर पहुंच गई। इस बात का खुलासा सेंटर फॉर मॉनिटारिंग इंडियन इकोनॉमी के सर्वे में हुआ है।

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