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महिला कर्मचारियों के लिए पीरियड्स की पेड लीव देने की घोषणा

बिहार में पीरियड्स वाली महिला कर्मचारियों को साल के 24 दिन पेड लीव

महिलाओं को पीरियड्स के लिए साल में 10 छुट्टी देने का ज़ोमैटो कंपनी ने ऐलान किया है। ये छुट्टियां पेड लीव होंगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, जोमाटो की तर्ज पर सूरत में वीपानान कंपनी ने भी महिला वर्कर्स के लिए सालाना 12 छुट्टी देने की घोषणा कर दी हैं। ये छुट्टियां पेड लीव में शामिल हैं।

ज़ोमैटो से पहले नाइकी कंपनी ने इसकी पहल 2007 में सबसे पहले की थी, और जापान ने तो सेकेंड वर्ल्ड वार के बाद ही पीरियड्स पर छुट्टियां देने की घोषणा कर दी थी।

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शेष ने इस पर टिप्पणी करते हुए अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा है, “बिहार में लालू प्रसाद जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब 1992 में ही सभी महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए हर महीने दो दिनों का विशेष अवकाश शुरू किया गया था, जिसे महिलाएं अपनी जरूरत के मुताबिक ले सकती हैं।”

दरअसल, 1990 में बिहार में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल चल रही थी। इस हड़ताल में महिलाओं के लिए माहवारी के दौरान होने वाली तकलीफों के मद्देनजर अवकाश की मांग भी शामिल थी।

तब से यह बिहार में लागू है और महिलाएं अपनी जरूरत के मुताबिक हर महीने दो दिनों का यह अवकाश ले सकती हैं। बाद में नीतीश कुमार ने 50 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को इससे बाहर कर दिया था। देश के किन राज्यों में इस तरह की व्यवस्था है, इस बारे में जानकारी नहीं है।

2.3 करोड़ लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं

वहीं स्कूपहूप हिंदी में 27 फरवरी 2020 में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, स्कॉटलैंड में स्कॉटिश संसद ने देश की सभी महिलाओं के लिए सैनिटरी प्रोडक्ट्स को मुफ़्त करने के प्लैन को मंज़ूरी दे दी  है।

इस निर्णय के साथ ही ऐसा करने वाला स्कॉटलैंड दुनिया का पहला देश बन गया।

एनडीटीवी इंडिया में 28 मई 2018 में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 35.5 करोड़ महिलाओं को पीरियड्स आता है, ये इस देश की आबादी का 30 प्रतिशत है।

बावजूद इसके कई राज्यों में पीरियड्स को लेकर कोई जागरुकता नहीं है। इसमें उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, वेस्ट बंगाल, राजस्थान जैसे राज्य शामिल हैं।

दसरा नाम के एनजीओ ने 2014 में स्पॉट ऑन नाम की एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि, भारत में पीरियड्स इस कदर टैबू बना हुआ है की हर साल यहां 2.3 करोड़ लड़कियां स्कूल इसी कारण छोड़ देती हैं।

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