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कोरोना के बाद सड़कों पर किसानों, मज़दूरों, छात्रों का सैलाब उमड़ेगाः किसान नेता वीएम सिंह

किसान संगठनों का 9 अगस्त को कॉपोरेट के ख़िलाफ़ बड़ा आंदोलन, मज़दूर संगठन भी होंगे शामिल

कृषि क्षेत्र में मोदी सरकार द्वारा कारपोरेट परस्त क़ानून बनाए जाने के ख़िलाफ़ किसान संगठन आगामी 9 अगस्त को अगस्त क्रांति के मौके पर पूरे देश भर में आंदोलन करेंगे।

किसान नेता और 250 किसान संगठनों की समन्यव समिति के अध्यक्ष वीएम सिंह ने वर्कर्स यूनिटी के फेसबुक लाइव में मोदी सरकार द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ खुल कर बात की।

उन्होंने देश में सभी किसानों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा, “नौ अगस्त के दिन जो कि अगस्त क्रंति का दिन होता है। उस दिन हम ट्रेड यूनियनों और किसानों की मदद से कॉरपोरेट हटाओ आदोलन करेंगे और कॉपोरेटवाद खत्म करके दम लेंगे।”

वीएम सिंह ने कहा, “किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए हम पूरे देश भर में आंदोलन कर रहे थे। इस आंदोलन को बढ़ते देख मोदी सरकार ने किसानों को बरगलाने के लिए नई चाल चली और 10 दिन के भीतर किसान सम्मान योजना लागू कर दी।”

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Posted by Workers Unity on Saturday, July 4, 2020

किसान मौतों के आंकड़े छिपा रही सरकार

उन्होंने कहा, “2014 के बाद से किसानों की मौत में भयंकर वृद्धि हुई है। नोटबंदी के बाद ये आंकड़ा और बढ़ गया। अब कोरोना किसानों को बिना मौत मार रहा है।”

पहले तो सरकार किसानों के मौत का आकड़ा छुपाने में जुटी हुई थी, पर अब कोरोना जैसी भयानक महामारी के कारण मर रहे मृतकों का आकड़ा भी छुपा रही है।

वे कहते हैं, “सरकार चाहे जो भी कर ले हमारी आवाज को नहीं दबा सकती है। कोरोना को देखते हुए हम आंदोलन ज़मीन पर नहीं कर रहे हैं। पर सोशल मीडिया पर भी हम सरकार की नाक में दम करने वाले हैं।”

मोदी सरकार पर तिखी टिप्पणी करते हुए उन्होंने ने कहा, “आपने किसान के साथ इंसाफ तो नहीं किया पर उनका गला दबाने के लिए डीज़ल पेट्रोल और महंगा कर दिया है।”

वे कहते हैं, “कोरोना के समय पूंजीपति अपने घर में बैठै थे उस समय यही किसान अपनी जान को जोख़िम में डाल कर गेंहू की कटाई कर रहा था। ताकि इस देश में कोई भूखा न रहे।”

पर सरकार ने क्या किया, “पूंजीपतियों को कर्ज माफ कर दिया और किसानों को फांसी लगाने के लिए छोड़ दिया। यही है इंसाफ?”

वीएम सिंह ने किसान बीमा फसल योजना को बेकार की योजना कहा।

मोदी कारपोरेट परस्त

उन्होंने कहा, “हमें कमजोर बनाने के लिए नेताओं ने किसानों और मज़दूरों को दो वर्गों में बाट दिया है। उंची जाति और नीची जाति। मेहनत करने वाले वर्ग में हर जाति शामिल है।”

उन्होंने कहा, “इस देश में 75 प्रतिशत किसान हैं। यदि ये सभी लोग इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर जाएं तो देश की कोई ताकत इन्हें नहीं रोक सकती है।”

साथ ही उन्होंने कहा, “कोरोना के कारण लोग आंदोलन नहीं कर रहे है। पर जब कोरोना खत्म हो जाएगा तो सरकार के क्रूरता के खिलाफ मज़दूरों- किसानों के आक्रोश के सैलाब को सरकार नहीं रोक पाएगी।”

उन्होंने वन नेशन वन मार्केट को कारपोरेट कंपनियों के हित वाला करार दिया और कहा कि अगर मोदी सरकार को कहना ही है तो उसे वन नेंशन और वन मिनीम सपोर्ट प्राइज घोषित करनी चाहिए।

वीएम सिंह ने कहा कि सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के जुमले के बारे में किसानों को चौकन्ना कर दिया। 20  लाख करोड़ में से एक फूटी कौड़ी भी किसानों को नहीं दिया गया है। कर्ज के तले दबे किसानों को फिर कर्ज लेने के लिए मज़बूर कर रही है मोदी सरकार।

(‘कोरोना के बाद का भारत’ श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित एक ऑनलाइन सेमिनार में वर्कर्स यूनिटी के फेसबुक लाइव में बोलते हुए किसान नेता वीएम सिंह ने अपनी बातें रखीं। इसे टेक्स्ट में रूपांतरित किया है खुशबू सिंह ने।)

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

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