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वर्क फ्रॉम होम का मजा बन गया सजा, आधी रात को आ जाता है बॉस का फोन

घर से काम कराने से कॉरपोरेट कंपनियों ने दोगुने से ज्यादा काम लेना कर दिया शुरू, निजी जीवन बेपटरी

आईटी प्रोफेशनल प्रियंका सुबह 5.30 बजे जूम ऐप पर कॉल आने पर गहरी नींद से ये बुदबुदाते हुए उठीं, ‘उफ! यहां काम का कोई टाइम ही नहीं है। ’

ऐसा सिर्फ प्रियंका के साथ ही नहीं। घर से ऑनलाइन काम करने वालों के लिए आम बात हो चुकी है। प्रियंका की ही तरह तमाम दूसरे कर्मचारी हैं।

कर्मचारियों को धीरे-धीरे इस बात का अहसास होने लगा है कि वर्क फ्रॉम होम का मतलब है 24 घंटे मौजूद रहना। कभी न खत्म होने वाले जूम कॉल्स। प्रबंधन काम का बोझ बढ़ाता जा रहा है, क्योंकि लॉकडाउन में कही जा नहीं सकते। आवाज उठाएंगे तो सैलरी कटने का डर, काम से निकालने की धमकी।

एक बड़ा परेशानी ये खड़ी हो गई है कि ऑफिस और घर के जीवन में कोई फर्क ही नहीं बचा है। लॉ फर्म में काम करने वाले एक कर्मचारी ने कहना, ‘हमसे 24 घंटे मौजूद रहने की उम्मीद की जाती है, छुट्टी के दिन भी, सिर्फ इसलिए कि बॉस को लगता है कि इस हालात में हम हर समय घर में ही रह रहे हैं।’

इंटरनेट पर दिन भर में 20 करोड़ मीटिंग

भारत में कर्मचारी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के काम करने के मानदंड से कई गुना ज्यादा काम कर रहे हैं। हर दिन 8 घंटे काम करने के साथ समान्य तौर पर 48 घंटे लगातार काम करना प्रति सप्ताह बराबर है, लेकिन हकीकत खासी बदल चुकी है।

माइक्रोसॉफ्ट की टीम ने देखा कि एक दिन में 20 करोड़ तक मीटिंग होती हैं। अप्रैल 29 तक रोजाना एक नया रिकॉर्ड बन गया, एक दिन में हर मिनट 40 करोड़ से ज्यादा मीटिंग हुईं। कर्मचारियों के तनाव को समझते हुए टेक्नोलॉजी में अगुवा गूगल ने मई माह में कर्मचारियों को आराम करने के लिए छुट्टी दे दी थी।

इस मामले में वित्तीय लेनदेने वाली वेबसाइट रोज़रपे में पीपुल ऑपरेशन के हेड अनिरुद्ध भारत ने कहा, ‘अलग अलग रह रहे लोगों में सहयोग सबसे बड़ी चुनौती होती है। काम से संबंधित वर्चुअल मीटिंग्स और जुड़ाव बनाए रखने से मुख्य काम के घंटे पूरे होने में मदद मिलती है। इसको लेकर कर्मचारियों को अपनी स्थिति साफ़ रहती है।’

कर्मचारियों पर अधिक मीटिंग का संज्ञान लेते हुए, गेमिंग यूनिकॉर्न ड्रीम स्पोर्ट जोकि ड्रीम11 चलाता है, ने सप्ताह में गुरुवार को कोई मीटिंग न करने की घोषणा की है। हफ्ते में एक दिन सीधे 4 घंटे के लिए बिना किसी मीटिंग के काम होगा। स्टार्टअप ने लंच ब्रेक भी 60 मिनट से 90 मिनट कर दिया।

ड्रीम स्पोर्ट्स के सीएचआरो केविन फ्रेंट्स का कहना है, ‘कोविड-19 के कारण लोगों के रोजमर्रा के जीवन में प्रचंड बदलाव के साथ अर्थव्यवस्था भी धीमी पड़ गई है। जो की लोगों के बीच चिंता और असुरक्षा का कारण बनती जा रही है। कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक सुख को ध्यान में रखते हुए ड्रीम स्पोर्ट्स हर तरह का खेल, गतिविधियों का आयोजन करता रहता है, ताकि कर्मचारियों के मनोबल बढ़ाया जा सके।’

कनेक्टिविटी, कुर्सियां और कोई चाय नहीं

एक कर्मचारी ने बताया, ‘ वर्क फ्रॉम होम अपने साथ कई नई मुसीबतें भी लाया है। समय के बीच तालमेल बड़ा मसला है। ऑफिस की तरह घर में आराम से बैठकर काम करना मुश्किल है और यहां तो हम टी ब्रेक भी नहीं ले सकते। कर्मचारियों का सुझाव है कि हफ्ते में एक बार निजी स्तर पर कर्मचारियों जुड़ाव के लिए भी बात होनी चाहिए।’

वहीं अनिरुद्ध भारत कहते हैं, “रोज़रपे में घर से काम करने वाले कर्मचारियों की मदद करने को उन्हें भत्ता देते हैं, ताकि कर्मचारी घर से अराम से काम कर सकें, यही प्राथमिकता है। किसी के घर पर हाई स्पीड इंटरनेट नहीं है, दूसरे के घर पर काम करने के लिए अरामदायक कुर्सी नहीं है।”

वो बताते हैं, “हमने पाया है कि दिए जाने वाले भत्ते से घर पर दफ्तर स्थापित करने या छूट पर मिलने वाले ऐसे आरामदायक कुर्सियों जैसे उत्पादों पर कोई सवाल नहीं होता, जबकि इससे कर्मचारियों का जीवन आसान होता है, ऐसा होने में अभी वक्त लगेगा।”

बेंगलुरू में एचआर टेच स्टार्टअप स्प्रिंग वर्क, ऑफिस में खाली पड़ी कुर्सियों को कर्मचारियों के घर भेज रहा है, जबकि कुछ को इंटरनेट कनेक्शन ठीक कराने के लिए भी प्रयास हो रहा है।

ड्रीम 11 ने कर्मचारियों को खुश करने के लिए सीजनल सरप्राइज देने के लिए डोर स्टेप डिलीवरी की योजना बनाई है। ये योजना मुंबई से बाहर के कर्मचारियों के लिए यात्रा की व्यवस्था करके उन्हें सुरक्षित घर वापस लाने में मदद करती है। इसके अलावा ड्रीम 11 रेड जोन में फंसे कर्मचारियों के लिए राशन की व्यवस्था भी कर रहा है।

(बिजऩेस इनसाइडर से साभार संचिता दास की कहानी। वर्कर्स यूनिटी के लिए हिंदी रुपांतरण खुशबू सिंह द्वारा)

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