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श्रीराम इंजीनियर्स में परमानेंट मज़दूरों को तीसरी बार कंपनी से निकाला, कई की शहीद हो चुकी हैं अंगुलियां

कंपनी प्रबंधन ने लॉकडाउन का वेतन अभी तक नहीं दिया, मज़दूर धरने पर

By खुशबू सिंह

कोरोना का ये समय सरकार और पूंजीपतियों के लिए किसी अवसर से कम नहीं साबित हो रहा है। सरकार कोरोना के आड़ में श्रम कानूनों को खत्म कर रही है और पूंजीपति कंपनियों के मालिक कानून को ताक पर रख कर मज़दूरों को काम से निकाल रहे हैं।

हरियाणा के मानेसर में स्थित “श्रीराम इंजीनियर्स” कंपनी ने अलग-अलग विभाग में काम करने वाले 50 परमानेंट मज़दूरों को लॉकडाउन के बाद तीसरी बार काम से बाहर निकाल दिया है।

ये मज़दूर कंपनी गेट के सामने ही धरने पर बैठे हैं और नौकरी बहाल किए जाने की मांग कर रहे हैं।

पिछले 20-23 सालों से काम कर रहे मज़दूरों को कंपनी ने आर्थिक तंगी का हावाला देकर बिना नोटिस दिए काम से तीसरी बार निकाला है।

श्रीराम इंजीनियर्स में मेटल की शीट बनाई जाती है, पैकिंग होती है, और इसमें काम करने वाले अधिकतर मज़दूरों की अंगुलियां कटी हुई हैं।

मज़दूरों का आरोप है कि श्रीराम इंजीनियर्स ने मज़दूरों को लॉकडाउन के समय एक रुपया भी नहीं दिया था। लॉकडाउन के बाद जब फैक्ट्री खुली तो कुछ दिन काम कराने के बाद मज़दूरों को काम से निकालने का सिलसिला शुरू हो गया।

29 जून को मज़दूरों को तीसरी बार काम से निकाला गया है। दरअसल लॉकडाउन के बाद से मज़दूरों को दो बार काम से निकाला गया पर मज़दूर कानूनी लड़ाई लड़ कर काम पर फिर आ गए थे।

 

 

97 में से 50 को निकाला

श्रीराम इंजीनियर्स में काम करने वाले मज़दूर धर्मेंद्र दुबे ने बताया की “कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने प्रबंधन को आदेश दिया था कि मज़दूरों को काम पर रखा जाए पर कंपनी प्रबंधन ने हमें फिर से निकाल दिया है। कोर्ट की अगली सुनवाई 2 जुलाई को है। ”

उन्होंने आगे कहा “ प्रबंधन ने कहा है कि हम कोर्ट में बोल देंगे कि मज़दूरों को काम पर नहीं रख सकते हैं। सरकार के अनुसार इन मज़दूरों का जो भी पैसा बनेगा हम दे देंगे”

उन्होंने बताया कि  “हम प्रबंधन से लॉकडाउन का वेतन मांगते हैं तो वे कहते हैं जा कर सरकार से मांग लो। कोर्ट में फैसला अगर कंपनी प्रबंधन के पक्ष में आया तो हम अपनी लड़ाई इंसाफ मिलने तक जारी रखेंगे।”

निकाले गए मज़दूर धरने पर बैठे हैं। इनका दावा है कि इन मज़दूरों का साथ कंपनी के भीतर काम कर रहे कुछ और लोग भी दे रहे हैं।

उनका कहना है कि इसी बात को मद्देनजर रखते हुए कंपनी प्रबंधन ने गेट पर नोटिस चिपका कर मज़दूरों को नो वर्क नो पे की धमकी दी है।

श्रीराम इंजीनियर्स कंपनी में इस समय 97 के आसपास मज़दूर हैं जिसमें से कंपनी 50 मज़दूरों को निकाल चुकी है।

sriram engineers manesar
कंपनी में काम करने वाले अधिकांश मज़दूर की कोई न कोई अंगुली कटी हुई है। ये कंपनी में पिछले दो दो तीन तीन दशक से काम कर रहे हैं और परमानेंट हैं। अब इन्हें निकाल दिया गया है। फ़ोटोः वर्कर्स यूनिटी

इन सभी मज़दूरों को लॉकडाउन का वेतन नहीं दिया गया है, और लॉकडाउन में मिली ढील में जब कंपनियों को शुरू किया गया तो इन 50 मज़दूरों को काम से निकालने और रखने का सिलसिला चल रहा है। मज़दूर भयंकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।

श्रम कानूनो को खत्म करने वाली सरकार इशारों-इशारों बता रही है कि वे पूंजीपतियों की सरकार है।

5 मई को, इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, निजी क्षेत्र के एक प्रमुख थिंक टैंक का कहना है कि लॉकडाउन के चलते भारत में अप्रैल में 12 करोड़ 20 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं।

लॉकडाउन के कारण 130 करोड़ आबादी वाले देश में कई उद्दम बंद हो गए हैं।

इसके चलते 3 मई को समाप्त हुए सप्ताह में देश में बेरोजगारी दर 27.1% पर पहुंच गई। इस बात का खुलासा सेंटर फॉर मॉनिटारिंग इंडियन इकोनॉमी के सर्वे में हुआ है।

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