कोरोनाख़बरेंप्रमुख ख़बरें

होंडा कार्स इंडिया लि. लेकर आई कर्मचारियों के लिए वीआरएस स्कीम

सिर्फ़ ऑफ़िस कर्मचारियों को फायदा, प्रोडक्शन में लगे मज़दूरों को नहीं मिलेगा इसका लाभ

होंडा कार्स इंडिया लिमिटेड ने अपने कर्मचारियों के लिए वीआरएस की योजना शुरू की है।

मौजूदा मंदी के हालात को देखते हुए कंपनी ने ये स्कीम शुरू की है और ये कंपनी के स्टाफ़ कर्मचारियों पर लागू होगी।

टाइम्स नाऊ की एक ख़बर के मुताबिक, इस स्कीम का फ़ायदा कार उत्पादन में लगे वर्करों को नहीं मिलेगा।

कोरोना वायरस संकट के कारण भारत में लगभग सभी क्षेत्रों की हालत बहुत पतली है और इसका सबसे अधिक बुरा असर ऑटो सेक्टर पर पड़ा है। महामारी के कारण बिना सोचे समझे किए गए लॉकडाउन ने पहले से ही बिक्री और उत्पादन में कमी से जूझ रहे ऑटो सेक्टर के लिए नई मुसीबत ला दी है।

लॉकडाउन के पहले ही ऑटो सेक्टर में बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की जा रही थी और कहा जा रहा था ये सेक्टर मंदी की चपेट में पहले ही आ चुका है।

कंपनी की वीआरएस स्कीम के तहत 40 साल की उम्र पूरा कर चुके या कंपनी में पांच साल तक काम कर चुके ऑफ़िस स्टाफ़ इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

जयपुर की बोश कंपनी में 70 लाख का वीआरएस पैकेज, 500 वर्करों ने किया अप्लाई

Reporters On Wheels: ऑटो सेक्टर में परमानेंट वर्करों की ताबड़तोड़ छंटनी के बीच एक अच्छी ख़बर जयपुर से है। कंपनी के क़रीब 500 परमानेंट वर्करों ने वीआरएस के लिये किया है आवेदन। प्रेसिडेंट भगवान सिंह कहते हैं कि ये मज़दूर वर्गीय एकता और एकजुट संघर्षों का ही नतीजा है कि कंपनी को तीन साल के अंदर अपने ऑफ़र को दोगुना करना पड़ा है। बिना संघर्ष के कुछ नहीं मिलता। रिपोर्टर्स ऑन ह्वील्स की ज़मीनी रिपोर्टिंग को निकली वर्कर्स यूनिटी टीम ने जयपुर में बोश के मज़दूर यूनियन के प्रतिनिधियों से मिली।

Posted by Workers Unity on Monday, July 27, 2020

24 जुलाई से आई स्कीम

अगर कर्मचारी वीआरएस का विकल्प चुनते हैं तो उन्हें संतोषजनक आर्थिक पैकेज और स्वास्थ्य से संबधित सुविधाएं दी जाएंगी।

कंपनी ने वादा किया है कि वालंटियरी रिटायरमेंट के बाद भी वैश्विक स्तर पर जानी मानी प्लेसमेंट एजेंसी के द्वारा उनकी मदद करेगी ताकि उनका आगे का भविष्य सुगम हो सके।

होंडा के अनुसार, वीआरएस कंपनी और कर्मचारी दोनों के हित में है।

एक बयान में कंपनी ने कहा है कि हमने ऑफ़िस एसोसिएट्स के लिए वीआरएस स्कीम लेकर आ रहे हैं। ये स्कीम कंपनी की दक्षता बढ़ाने के साथ साथ कर्मचारियों के लिए कुल सुविधाओं के मामले में लाभकारी है।

ये स्कीम 24 जुलाई 2020 से शुरू की गई है और ये सभी विभागों के लिए है।

Reporters On Wheels: ऑटो उद्योग में रह जाएगी सिर्फ 10 हज़ार वाली नौकरियां

Reporters On Wheels: दिल्ली से जयपुर तक वर्कर्स यूनिटी की ज़मीनी रिपोर्टिंग में क्या कुछ देखने को मिला, कोरोना के बाद श्रम बाज़ार की क्या स्थिति रहेगी, ऑटो इंडस्ट्री में ताबड़तोड़ छंटनी, वीआरएस के पीछे क्या तर्क है, इसका सार संकलन क्या है, इस विशेष वीडियो में सुनिए विश्लेषण।

Posted by Workers Unity on Tuesday, July 28, 2020

ऑटो सेक्टर में छंटनी

उल्लेखनीय है कि ऑटो सेक्टर के भारी मंदी की चपेट में आने के बाद बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है।

कई कंपनियों ने वीआरएस आदि के मार्फ़त अपने कर्मचारियों को कम कर रही हैं।

इसी तरह जयपुर में बोश कंपनी ने अपने यहां प्रोडक्शन में लगे मज़दूरों को 69 लाख रुपये का आर्थिक पैकेज देकर वीआरएस का ऑफ़र दिया है और क़रीब 500 मज़दूरों ने आवेदन भी किया है।

लेकिन वेंडर कंपनियों ने परमानेंट मज़दूरों को सीधे नौकरी से निकालना शुरू कर दिया और इसके लिए कोई आर्थिक पैकेज भी नहीं दे रही हैं। इन्हीं में एक है मानेसर की श्रीराम इंजीनियर्स, जहां 20-20 साल से काम कर रहे परमानेंट मज़दूरों को क़रीब दो दो लाख रुपये देकर घर भेज दिया गया।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं। वर्कर्स यूनिटी के टेलीग्राम चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें।)

Tags
Show More

Related Articles

Back to top button
Close
Enable Notifications.    Ok No thanks