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मारुति का गुड़गांव प्लांट बंद होगा, 1000 एकड़ ज़मीन देख रही कंपनी

मानेसर, सोहना, सोनीपत में किसी एक जगह जा सकता है प्लांट, 15000 वर्करों की आजीविका दांव पर

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति ने अपने गुड़गांव प्लांट को बंद करके इसे शिफ़्ट करने के फैसला लिया है।

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक खट्टर सरकार ने मारुति कंपनी को तीन जगह ज़मीनें प्रस्तावित की हैं।

ख़बर के अनुसार, मारुति के मुख्य प्लांट मानेसर में, सोहना या सोनीपत के खारखोड़ा में सरकार ज़मीन देने के लिए तैयार है।
लेकिन अभी मारुति ने कोई फैसला नहीं किया है और बताया जा रहा है कि राज्य में मारुति अभी ज़मीन देख रही है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक बुधवार को मारुति सुज़ुकी इंडिया लि. के चेयरमैन आरसी भार्गव ने इतना ज़रूर कहा कि ये प्लांट हरियाणा में ही लगाया जाएगा।

मारुति को इसके लिए 1000 एकड़ ज़मीन की ज़रूरत है। दिल्ली गुड़गांव रोड पर ये मारुति का 39 साल पुराना शुरुआती प्लांट था, जिसकी क्षमता प्रति साल 7 लाख कार बनाने की है।

यहां ये प्लांट 300 एकड़ में फैला है और इन चार दशकों में बसाहट बढ़ जाने के कारण यहां की ज़मीन के दाम आसमान छू रहे हैं।

हालांकि भार्गव का कहना है कि गुड़गांव से प्लांट को शिफ़्ट करना अब ज़रूरी हो गया है क्योंकि इसके आस पास रिहाईशी इमारतें काफ़ी बन गई हैं और अब इससे भी बड़ी जगह प्लांट को शिफ़्ट किया जाएगा।

साढ़े चार हज़ार करोड़ रु. की ज़मीन

गुड़गांव मारुति प्लांट के आस पास की ज़मीन का बाज़ार भाव लगभग साढ़े तीन हज़ार रुपये प्रति वर्ग फ़ुट है।

प्लांट की 300 एकड़ ज़मीन क़रीब एक करोड़ 30 लाख वर्ग फ़ुट बैठती है। एक एकड़ में 43,560 वर्गफुट होते हैं।

बाज़ार पर नज़र रखने वालों का मानना है कि इस हिसाब से इस ज़मीन की कुल क़ीमत लगभग  4573 करोड़ रुपये है, यानी ये ज़मीन कंपनी के लिए ‘बेहिसाब बोनस’ की तरह है।

अगर कंपनी उत्पादन यहीं जारी रखती है तो उसे ज़मीन की ऊंची क़ीमत के कारण जो अचल संपत्ति खड़ी है उस पर कोई लाभ नहीं मिलेगा।

आम तौर पर उद्योग जगत का ये नियम होता है कि शुरुआत में सस्ती ज़मीन लेकर प्लांट खोला जाता है और तमाम तरह के सरकारी टैक्स में छूट ली जाती है लेकिन आबादी बढ़ने के साथ साथ जब दाम बढ़ता है तो ज़मीन पर होने वाला संभावित मुनाफ़ा कंपनी के उत्पादन से अधिक हो जाता है।

और कंपनी उस ज़मीन को रियल इस्टेट को देकर अपना पैसा निकाल लेती है और प्लांट को दूसरी जगह शिफ़्ट कर देती है।

मानेसर, सोनीपत या सोहना

प्लांट में रजिस्टर्ड यूनियन नेताओं का कहना है कि यहां क़रीब 15,000 लोगों को सीधे रोज़गार मिला हुआ है।

हालांकि इसमें परमानेंट वर्करों की संख्या बहुत कम है और इनके अनुपात में कैजुअल, टेंपरेरी वर्करों की संख्या अधिक है।

राज्य के उद्योग मंत्रालय को देखने वाले उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि कंपनी को ज़मीन के तीन विकल्प दिए गए हैं और हरियाणा सरकार हर तरह से मदद करने के लिए तैयार है।

खट्टर सरकार ने 2018 में ही मारुति को आईएमटी सोहना में 1300 एकड़ ज़मीन का प्रस्ताव दिया था, जोकि गुड़गांव से 40 किलोमीटर दूर है।

लेकिन मिट्टी की जांच के बाद पता चला कि यहां पानी की अधिक मात्रा है, जोकि प्लांट के लिए उपयुक्त नहीं है।

खारखोड़ा में पर्याप्त ज़मीन है लेकिन मानेसर ऐसे प्लांट के लिए उपयुक्त जगह दिखती है क्योंकि यहां मारुति का 2007 से ही एक प्लांट चल रहा है और इससे जुड़े अन्य उद्योग भी आस पास ही हैं। मारुति का मानेसर प्लांट 600 एकड़ इलाक़े में फैला है।

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