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सैलरी और राशन को लेकर सूरत में सड़क पर उतरे हज़ारों प्रवासी मज़दूर

ज़रूरी सुविधाएं देने या वापस घर जाने की इजाज़त देने की मांग

सैलरी न मिलने पर आख़िरकार प्रवासी मज़दूरों का गुस्सा फ़ूट पड़ा और शुक्रवार की रात 10 बजे के क़रीब सूरत में हज़ारों प्रवासी मज़दूर सड़कों पर उतर पड़े।

अधिकांश मज़दूर ओडिशा, यूपी और बिहार से हैं और लॉकडाउन के चलते वो सूरत में ही फंस कर रह गए हैं। काम बंद होने की वजह से खाने पीने तक की दिक्कत हो गई है।

यहां ज़्यादातर टेक्सटाईल व अन्य कारखानों में काम करने वाले प्रवासी मज़दूर हैं। ये मज़दूर सैलरी, राशन और अपने घर वापस जाने की इजाज़त देने की मांग कर रहे थे।

लॉकडाउन के चलते उनकी नौकरियां चली गईं, 10 तारीख़ आने के बावजूद उन्हें सैलरी नहीं मिली और राशन की दिक्कत से दोचार होना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि मज़दूर संगठन और स्वयंसेवी संस्थाएं इन मज़दूरों को खाना मुहैया करने का काम कर रही हैं। शुक्रवार की शाम कथित तौर पर जब खाना ख़त्म होने की ख़बर फैली तो हज़ारों मज़दूर सड़क पर आ गए।

सैलरी और राशन की मांग को लेकर सूरत में हज़ारों मज़दूर सड़क पर उतरे

गुजरात की डायमंड सिटी सूरत में सैलरी न मिलने पर आख़िरकार प्रवासी मज़दूरों का फूटा गुस्सा। 10 अप्रैल रात को सूरत में हज़ारों मज़दूर सड़कों पर निकल आए। मज़दूर सैलरी, राशन और अपने घर वापस जाने की इजाज़त देने मांग कर रहे थे।#LockDown #RationToWorkers #Salary #WorkersDemand #Gujarat #Surat

Posted by Workers Unity on Friday, April 10, 2020

हंगामें के बीच कुछ गाड़ियों में आग लगा दी गई। इस संबंध में पुलिस ने 60 से अधिक मज़दूरों को गिरफ़्तार किया है।

वर्करों का कहना है कि उनके पास न तो पैसा है और न ही भोजन।

बीबीसी गुजराती के मुताबिक, सूरत में पुलिस उपायुक्त राकेश बारोट ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पता चला कि ज्यादातर लोग ओडिशा के थे और वे अपने घर लौटने की मांग कर रहे थे।

बारोट के अनुसार, कुछ गाड़ियों में भी आग लगाई गई, जिसे काबू कर लिया गया।

सहायक पुलिस आयुक्त ए पटेल ने कहा कि ये मज़दूर घर लौटने की मांग कर रहे थे। मूल रूप से भोजन में देरी के बाद मज़दूर इकट्ठा हो गए और आगजनी की घटना हुई।

मज़दूरों के विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस और रैपिड एक्शन फ़ोर्स की टुकड़ियां तैनात कर दी गईं।

मारुति मज़दूरों पर हमला पानी की कालाबाज़ारी के लिए हुआ था! अलीहर मानेसर से ग्राउंड रिपोर्ट

आठ अप्रैल को मानेसर के अलीहर गांव की एक बिल्डिंग में स्थानीय गुंडों ने तांडव मचाया था और कमरे कमरे में जाकर पिटाई की थी। वर्कर्स यूनिटी की टीम जब वहां पहुंची तो सच्चाई खुलकर सामने आ गई। #workersunity #workersunity2020

Posted by Workers Unity on Thursday, April 9, 2020

डायमंड सिटी के नाम से मशहूर सूरत शहर में हीरे, वस्त्र और वस्त्र सहित उद्योग हैं। इन उद्योगों में काम करने के लिए ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित राज्यों से बड़ी संख्या में श्रमिक आते हैं।

तालाबंदी की घोषणा के साथ, बड़ी संख्या में मज़दूरों को उनकी नौकरी से निकाल दिया गया था। नौकरी और भविष्य की असुरक्षा के चलते हज़ारों मज़दूर पैदल ही अपने घरों को लौट गए।

बावजूद बहुत सारे मज़दूर अपने काम की जगहों पर ही फंस कर रह गए हैं और सरकार की ओर से राशन और पैसे की व्यवस्था न करने के कारण उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

सूरत में पावरलूम में काम करने वाले मज़दूरों का एक बड़ा वर्ग अभी भी सूरत में रुका हुआ है, लेकिन लॉकडाउन की स्थिति के बीच, वे भूख से संघर्ष कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही हरियाणा के मानेसर में स्थित अलीहर गांव में सैकड़ों मज़दूरों की बेरहमी से पिटाई की गई थी।

प्रशासन और स्थानीय दबंगों की ओर से लगातार मज़दूरों को लाठी डंडे मारकर उन्हें उनके कमरों में धकेला जा रहा है जबकि उनके पास खाने के लिए राशन और न पीने के लिए पानी है।

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