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पुणे में रिक्शा पंचायत ने रिक्शा चालकों के लिए आर्थिक पैकेज की मांग की

सरकारी कर्मचारियों की तरह रिक्शा चालकों को 14,000 रु. वेतन देने की मांग

लॉकडाउन में रिक्शा चालकों को होनेवाली आर्थिक परेशानियों में सरकार की उपेक्षा ने जले पर नमक का काम किया।

लेकिन लॉकडाउन हटने के बाद भी सरकार की ओर से कोई मदद न मिलने से दिक्कतें बढ़ी हैं।

बीते एक अक्टूबर को महाराष्ट्र के पुणे शहर में रिक्शा चालकों ने प्रदर्शन किया और राज्य की उद्धव ठाकरे नीत सरकार से तुरंत राहत की घोषणा करने की मांग की।

रिक्शा पंचायत का दावा है कि इस प्रदर्शन में सैकड़ों रिक्शा चालकों ने हिस्सा लिया। डॉ. बाबा आढावजी के नेतृत्व में रिक्शा चालकों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।

रिक्शा पंचायत ने सरकार से रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए तुरंत कल्याणकारी मंडल बनाने की मांग रखी है। इसके अलावा मेडिकल हेल्थ, बच्चों की शिक्षा के लिए मदद देने और नाजायज बीमा योजनाओं को ख़त्म करने का आग्रह किया।

pune rikshwa panchayat

प्रदर्शन के दौरान एक आम सभा आयोजित की गई जिसमें वक्ताओं ने कहा कि रिक्शा एक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था है और लॉकडाउन के दौरान इसकी आर्थिक व्यवस्था पर गंभीर चोट पहुंची है। इससे निपटने के लिए हर रिक्शा चालक को सरकारी एस.टी. और पी.एम.पी. कर्मचारियों की तरह हर महीना 14 हजार रुपये वेतन दिया जाए।

इस सभा में ये भी मांग रखी गयी कि कर्ज से लिए गए रिक्शे की इएमआई प्रशासन भरे और फाइनांस कंपनियों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न से रिक्शा चालकों को बचाया जाए। साथ ही किसान कर्ज़ मुक्ति की तर्ज पर पैकेज घोषित किए जाने की भी मांग रखी गई।

रिक्शा पंचायत ने रिक्शा सेवा के लिए एक ऐप का प्रस्ताव दिया है जिसे प्रशासन की ओर से तुरंत मंज़ूरी दिए जाने की भी मांग की गई।

लॉकडाउन के दौरान रिक्शा बंद होने के चलते पुणे आरटीओ से चार महीने के वाहन इंश्योरेंस की इएमआई वापस करने का मांग रखी गई।

आर्थिक सहायता, राशन और अन्य मदद की मांग के अलावा पंचायत ने रिक्शा चालकों की एक और परेशानी को तत्काल हल करने की मांग की।

असल में रिक्शा फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए पूना से 35 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पंचायत की कोशिशों के खासदार निधि से मिले 50 रुपये से आलंदी इलाके में मंज़ूर ट्रैक का काम तेज़ी से पूरा करने की मांग की गई।

(तस्वीरें व इनपुटः सामाजिक कार्यकर्ता सुभम, पुणे)

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