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बिजली कर्मचारियों और योगी सरकार के बीच वार्ता टूटी, 5 अक्टूबर से हड़ताल का आह्वान

दो साल पहले ऊर्जा मंत्री के साथ हुए लिखित समझौते को तोड़ने का आरोप लगा रहे कर्मचारी

उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण को निजी हाथों में दिए जाने को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) अरविंद कुमार के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। ऐसा लग रहा है कि पांच अक्टूबर से बिजली कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे।

पिछले चार दिनों से उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। उनकी मांग है कि निजीकरण से कर्मचारी हितों को नुकसान पहुंचेगा इसलिए इसे तत्काल रोक दिय जाए।

शनिवार को हुई वार्ता में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि 5 अप्रैल, 2018 को ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा के साथ लिखित समझौत हुआ था कि निजीकरण नहीं किया जाएगा।

समझौते के अनुसार, ‘‘उप्र में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही विद्युत वितरण में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियन्ताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। कर्मचारियों एवं अभियन्ताओं को विश्वास में लिये बिना उप्र में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नही किया जायेगा।’’

समिति ने कहा कि इस समझौता का योगी सरकार ने उल्लंघन कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है और इसे तत्काल रोकना होगा।

5 अक्टूबर से हड़ताल

संघर्ष समिति का प्रस्ताव है कि समझौते के अनुसार निजीकरण की प्रक्रिया रद्द कर सुधार की कार्ययोजना बनाई जाए।

बैठक बेनतीजा रही क्योंकि ऊर्जा निगम प्रबन्धन निजीकरण पर अड़ा रहा एवं निजीकरण करने के प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग को अस्वीकार कर दिया।

कार्य बहिष्कार के चौथे दिन लखनऊ समेत अनपरा, ओबरा, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, बुलन्दशहर, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर, कानपुर, झांसी, मुरादाबाद, बरेली, बांदा, आगरा, अलीगढ़, पनकी, पारीछा, हरदुआगंज, बस्ती, अयोध्या, देवीपाटन, पिपरी समेत सभी जनपद मुख्यालयों एवं परियोजनाओं पर प्रदर्शन और सभाएं आयोजित की गईं।

लखनऊ में शक्ति भवन के सामने हुई विरोध सभा में संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण किये जाने के प्रस्ताव के विरोध में बीते एक सितम्बर से आंदोलन कर रहे हैं लेकिन प्रबन्धन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है बल्कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हड़ताल बताकर सरकार को गुमराह किया जा रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि प्रबंधन ज़बरदस्ती हड़ताल थोपने की योजना पर काम कर रहा है।

संघर्ष समिति की नोटिस के अनुसार, बिजलीकर्मी बीते 4 दिनों से 3 घंटे का कार्य बहिष्कार कर रहे हैं और 5 अक्टूबर से पूरे दिन का कार्य बहिष्कार किया जायेगा।

बिजली घरों का चार्ज देने के निर्देश से सकते में कर्मचारी

नोटिस में स्पष्ट लिखा गया है कि कार्य बहिष्कार के दौरान बिजली का ग्रिड फेल न हो और आम नागरिको को तकलीफ न हो इस हेतु बिजली उत्पादन गृहों, 765/400 के0वी0 विद्युत उपकेन्द्र और प्रणाली नियंत्रण में पाली में काम करने वाले कर्मचारियों को कार्य बहिष्कार से अलग रखा गया है।

समिति का कहना है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन के रवैये से ऊर्जा निगमों में अनावश्यक टकराव का वातावरण एवं औद्योगिक आशांति उत्पन्न हो रही है।

संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने पॉवर ग्रिड कारपोरेशन, प्रशासनिक अधिकारियों तथा लेखपालों आदि को तमाम बिजलीघरों और संस्थानों का चार्ज देने के निर्देश दिये गये है, जो पूरी तरह असंवैधानिक और आवांछित है।

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण कार्यरत बिजली कर्मचारियों का चार्ज यदि बाहरी एजेन्सियों और प्रशासनिक/अन्य अधिकारियों को सौंपने की कोशिश की गयी तो इसके गंभीर परिणाम होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी पावर कारपोरेशन प्रबन्धन की होगी।

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