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लॉकडाउन में काम पर नहीं जा सका परमानेंट मज़दूर तो डीबी इंजीनियरिंग ने काम से निकाला

कृष्णकांत को कंपनी ने लॉकडाउन का पास नहीं बनाकर दिया था

By खुशबू सिंह

नोएडा सेक्टर 6 में स्थित डीबी इंजीनियरिंग कंपनी में पिछले ढ़ाई सालों से स्थाई तौर पर काम करने वाले कृष्णकांत को कंपनी ने बिना किसी कारण के काम से निकाल दिया है।

तीन महीने से कृष्णकांत के पास कोई काम नहीं है। कारण पुछने के लिए इन्होंने कई बार कंपनी के मैनेजर को फ़ोन भी किया पर कोई जवाब नहीं मिलता है।

प्रबंधन के इस रवैये से परेशान कृष्णकांत ने कई जगह मदद की गुहार लगाई लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं कि।

इनका दावा है कि कंपनी प्रबंधन को पत्र भी लिखा है, पर उसका भी कोई उत्तर नहीं मिला।

वीएमसी मशीन डिपार्टमेंट में काम करने वाले कृष्णकांत ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि, “17 मई से कंपनी चालू है। ई-पास न होने के नाते मैं काम पर नहीं जा सका। पास के लिए कंपनी मैनेजर को फ़ोन भी किया, लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की।”

पीएफ का पैसा कटता है, पर मिलता नहीं

कृष्णकांत कहते हैं, “काम न छूट जाए इसलिए बिना पास के कई बार काम पर जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस वाले मार के भगा देते थे।”

फिर वो बताते हैं, “31 मई को मेरा इलाका रेड जोन में चला गया। फिर तो घर से भी नहीं निकलने देते थे। कंपनी प्रबंधन से कई बार पास मागां पर नहीं मिला। मैं काम पर नहीं जासका इसलिए मुझे 1 जून को काम से निकाल दिया।”

उन्होंने कहा, “काम से निकाले जाने के बाद कारण जानने के लिए मैंने कई बार मैंनेजर को फ़ोन किया पर वे फ़ोन नहीं उठाते हैं।”

कृष्णकांत ने कहा, “निकालने से पहले कोई हिसाब नहीं दिया। वेतन से पीएफ का पैसा तो कटता है, पर कभी किसी को पीएफ मिला नहीं। लोग काम खोने के डर से चुप हैं।”

आगे उन्होंने कहा, “यहां पर मज़दूरों को कभी भी निकाल दिया जाता है। जबकि सभी मज़दूर स्थाई हैं। हमेशा काम से निकालने की धमकी दी जाती है।”

कंपनी की सफ़ाई

वहीं इस बारे में डीबी इंजीनियरिंग के प्रोडक्शन मैनेजर कुलदीप त्यागी ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि, “प्रोडक्शन समय पर देने का हम पर बहुत प्रेसर रहता है। यदि कोई कर्मचारी बिना बताए छुट्टी कर लेता है तो दिक्त होती है।”

मैनेजर ने दावा किया कि ‘कृष्णकांत तो हमेशा से बिना बताए छुट्टी करते थे। कंपनी में इनका रिकॉर्ड खराब है। लॉकडाउन के समय ये दो महीना गायब थे। किसी को कोई खबर नहीं किया।’

हिसाब दिये जाने को लेकर उन्होंने कहा कि, “वे कभी भी आकर अपना पैसा ले सकते हैं। यहां किसी का पैसा खाया नहीं जाता है। इस बीच कई बार कंपनी की तरफ से उन्हें फ़ोन किया गया पर कोई जवाब न मिलन के कारण प्रबंधन को काम बढ़ाने के लिए ये फैसला लेना पड़ा।

डीबी इंजीनियरिंग में 100 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। सभी कर्मचारी स्थाई हैं, और यहां पर लोहे की चादर बानाई जाती हैं।

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