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वीनस में हर दिन मज़दूरों की अंगुलियां हो रही हैं शहीद, 23 मज़दूर इंसाफ के लिए कर रहे हैं संघर्ष

हरियाणा के वीनस फैक्ट्री में खराब मशीन पर मज़दूर को काम करने के लिए किया मज़बूर

हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित वीनस फैक्ट्री में मज़दूरों का हाथ कटना आम बात है। यहां हर दिन मज़दूर फैक्ट्री दुर्घटना का शिकार होते हैं।

मज़दूर मोर्चा के अनुसार दुर्घटना को लेकर श्रम मंत्रालय द्वारा फैक्ट्रियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

29 जुलाई को सेक्टर 25 में स्थित वीनस फैक्ट्री में काम करने वाले 24 साल के सागर नाम के मज़दूर की दो अंगुलियां कट गई थी।

सागर ने मज़दूर मोर्चा को बताया कि, “10 जुलाई को कंपनी ने मुझे हेल्पर की तौर पर नियुक्त किया। 12 घंटे के काम में 9,000 हज़ार महीना देने को कहा।”

सागर ने आगे कहा, “29 जुलाई को 25,000 हज़ार वेतन पर काम करने वाले अनुभवी मज़दूर नहीं आए, तो दिपक नाम के सुपरवाइजर ने मुझे जबरन मशीन चलाने को कहा। जब मैंने मना किया तो काम छोड़ कर घर चले जाने को कहा।”

प्रबंधन ने मज़दूर पर शिकायत न करने के लिए बनाया दबाव

सागर कहते हैं, “काम का अनुभव न होने के कारण मैं मज़बूरी में वहां काम करने लगा। अचानक मशीन में कोई खराबी आगई। इस बात की जानकारी मैंने सुपरवाइजर और राजकुमार नाम के मैंनेजर को दी पर किसी ने नहीं सुना और मुझ पर काम करने का दबाव बनाया।”

मशीन खराब होने के नाते कुछ समय के भीतर सागर की  दो अंगुलियां कट गई।

वीनस के एक मज़दूर ने बताया कि, “जब सागर की अंगुलियां कटी तो पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। पर उनके साथ अस्पताल नहीं गई। वहीं सागर को फैक्ट्री प्रबंधन नीलम चौक के पास एक प्राइवेट अस्पताल सूर्या में ले गया और कोई क़ानूनी कार्रवाई न करने का दबाव बनाने लगा”

मज़दूर कहते हैं, “प्रबंधन के दबाव में न आकर सागर ने सरकारी अस्पताल से अपना इलाज कराया। और क़ानून डॉक्टर ने घटना के बारे में पुलिस को इतलाह कर दिया। दवाई करने के बाद सागर का एमएआर बनाया गया। इसका पैसा भी सागर ने अपने ही जेब से दिया। मज़दूर के अनुसार अगर पुलिस वहां होती तो पैसे नहीं लगते।”

स्थानीय पुलिस स्टेशन में सागर और अन्य मज़दूरों ने शिकायत लिख कर दी। जिसके तहत पुलिस ने भारतीय दंड सहिता 287,337 और 34 के अंतर्गत शिकायत दर्ज कर ली।

दुर्घटना हुई सुबह 10 बजे, एफआईआर दर्ज हुई रात 9.35 बजे

मज़दूर के साथ दुर्घटना सुबह 10 बजे हुई थी और पुलिस ने शिकायत क्रमांक 335 रात 9.35 को दर्ज किया।

एक अन्य मज़दूर कहते हैं, “सागर का इलाज सूर्या अस्पताल में कराने के पीछे प्रबंधन की चाल थी। उनकी न तो ईएसआई कवर कराया और न श्रम विभाग को जानकारी देना चाहती थी। ”

कंपनी प्रबंधन इस मसले को पुलिस से छुपा कर रखना चाहता था, लेकिन सागर की हिम्मत के कारण पुलिस को दुर्घटना के 12 घंटे के भीतर मामला दर्ज करना पड़ा। और श्रम विभाग को दुर्घटना की रिपोर्ट भेजने के लिए फैक्ट्री प्रबंधन को मज़बूर कर दिया।

30 जुलाई को पीड़ित मज़दूर अपने परिवार और अन्य मजदूरों के साथ वीनस कंपनी के सामने धरने पर बैठ गए।

मज़दूर मोर्चा के अनुसार, जल्दबाजी में एएसआई विकास अपने पुलिस कर्मियों के साथ वहां पहुंचे और सागर को एफआईआर की कॉपी सौप दी।

सागर के साथ प्रदर्शन कर रहे 23 मज़दूरों की अंगुलियां कटी हुई हैं। इन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला है। न्याय के लिए ये मज़दूर लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

पुलिस प्रबंधन को बचाने की कर रही है कोशिश

मज़दूरों के अधिकार की रक्षा करने के लिए हरियाणा सरकार ने एक श्रम मंत्रालय बनाया है। यहां वरिष्ठ अधिकारी तले कई अफसर काम करते हैं।

इस का दो ब्रांच है। श्रम निरीक्षक से लेकर श्रम आयुक्त तक के आधिकारियों का काम  है कि, मज़दूरों के साथ हो रहे शोषण को रोकना, उन्हें समय पर काम अनुसार वेतन दिलाना और उनके हक के लिए बने क़ानून को लागू कराना।

दूसरा ब्रांच जिसमे फैक्ट्री इंस्पेक्टर से लेकर मुख्य फैक्ट्री इंस्पेक्टर होते हैं जिन्हें आजकल सहायक निदेशक, उपनिदेशक, निदेशक आदि कहा जाता है। इनका काम तमाम कारखानों की जांच करना व तय करना कि सुरक्षा के सभी उपकरण एवं प्रबंध हर तरह से दुरुस्त रहे।

वहां पर मौजूद मज़दूर चर्चा कर रहे थे कि, पुलिस कंपनी प्रबंधन को बचाना चाहती है। वे सागर को ही गलत ठहराने में जुटे हैं।

सागर को कंपनी ने हेल्पर के रुप में नियुक्त किया था। बिना किसी ट्रेनिंग के। मौजुदा समय में कंपनी स्थाई मज़दूरों को काम से निकाल कर सस्ते मज़दूरों को रख रही है।

इस समय सागर इंसाफ के लिए अपने परिवार समेत वीनस के सामने धरने पर बैठे हैं। पर उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है।

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