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‘कंसेंट’ बनाने वाली बीएमएस ने स्वीकारा इंटक का न्यौता

सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों की निंदा कर ट्रेड यूनियनों के प्रदर्शन में शामिल होने को तैयार

By आशीष आनंद

मजदूर आंदोलनों से दूर रहकर दक्षिणपंथी प्रचार करने वाली, भाजपा सरकार की सहयोगी माने जाने वाली और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संचालित भारतीय मजदूर संघ भी बाकी केंद्रीय श्रम संघों के साथ मैदान में उतरेगा।

कांग्रेस पार्टी की सहयोगी ट्रेड यूनियन इंटक के अध्यक्ष जी. संजीवा रेड्डी को बीएमएस महासचिव वृजेश उपाध्याय ने जवाबी पत्र भेजकर प्रदर्शन में शामिल होने का न्यौता स्वीकार लिया है।

पत्र में सरकार के मजदूर विरोधी रुख को चुनौती देने को सही कदम ठहराया है।

इस बात पर खुशी भी जताई कि मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में उनके प्रदर्शन को महत्वपूर्ण माना गया है।

फिर बीएमएस कंसेंट को मजबूत क्यों कर रहा

याद होगा, जिस समय जनवरी 2019 में सभी ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल की, बीएमएस ने खुलकर सरकार का साथ दिया। पहले हड़ताल की तैयारी का हिस्सा बनी और ऐन वक्त पर हड़ताल को विपक्ष की साजिश घोषित कर दिया।

यही नहीं, जी संजीवा रेड्डी और राहुल गांधी के बीच एक पत्र वायरल किया, जिसे साजिश के सबूत के तौर पर पेश किया। इसी बीच बीएमएस ने कंफेडरेशन आफ सेंट्रल ट्रेड यूनियंस( कंसेंट) का गठन किया।

इस कंसेंट की बदौलत ही केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री ने हड़ताल को बेअसर और मामूली करार दिया, जब वे हड़ताल के ही दिन कैबिनेट में कोड बिल रख रहे थे।

कंसेंट में इंटक का ही दूसरा धड़ा, टीयूसीसी एक धड़ा समेत कुछ श्रम संघ हैं। पिछले दिनों कंसेंट का ढांचा स्थानीय स्तर तक विकसित करने की कोशिशें शुरू हुई हैं।

श्रम मंत्री संतोष गंगवार सालभर पहले ये भी बयान दे चुके हैं कि भविष्य में चार पांच सेंट्रल ट्रेड यूनियनें ही बचेंगी।

दो नावों पर पैर, या एक तीर से दो निशाने

बीएमएस के सामने समस्या ये है कि इस समय मजदूरों की सरकार से नाराज़गी में खामोशी उसे बेईमान बना देगी, लेकिन उसको आरएसएस-भाजपा के एजेंडा पर भी काम करना है।

देशव्यापी प्रदर्शन में शामिल होकर अपने कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करना है, या फिर कुछ स्वतंत्र गतिविधि करना मजबूरी है। लेकिन, सरकार और उसके नेतृत्व को देश हित में भी बताना है।

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