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भारतीय रेलेव देश की जनता की धरोहर है, निजीकरण हुआ तो पूरे देश में करेंगे बड़ा आंदोलन – सीटू

भारतीय रेल देश की जनता की धरोहर है। बेचने नहीं देंगे- गंगेश्वर दत्त शर्मा

आत्मनिर्भरता का राग अलापने वाली मोदी सरकार इस देश की धरोहर को चुन-चुन कर उद्योगपतियों को सर्मित कर रही है। इस देश का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर रेलवे भी निजीकरण की सूची में शामिल है।

हालांकि सरकार के इस फैसले के खिलाफ लोग जगह – जगह प्रदर्शन भी कर रहे हैं। रेलवे निजीकरण के खिलाफ सीटू ने जम के विरोध प्रदर्शन किया।

रेलवे के निजीकरण के विरोध में सीआईटीयू के अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन के आह्वान पर सीटू जिला कमेटी गौतम बुध्द नगर के कार्यकर्ताओं ने सेक्टर 8 नोएडा बांस बल्ली मार्केट पर विरोध प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सीटू जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि, “सीआईटीयू भारतीय रेलवे को निजीकरण करने के केंद्र सरकार के फैसले का कड़ा विरोध करता है। क्योंकि सदियों से स्थापित रेल नेटवर्क का उपयोग करके निजी क्षेत्र के उद्योगपति खूब लाभ कमाने वाली यात्री ट्रेनें चलाएंगे और आम जनता को जमकर लूटा जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा,  “भारतीय रेल हमारे देश के करोड़ों लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन प्रदान करने वाली सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था है। देश के करोड़ों लोगों की आजीविका रेलवे पर निर्भर है साथ ही रेलवे में कार्यरत लाखों लाख कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना पैदा होगी”।

गंगेश्वर दत्त शर्मा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि,  “भारतीय रेल देश की जनता की धरोहर है जिसे किसी हालत में सरकार को बेचने नहीं देंगे और हम कर्मचारियों, आम जनता को लामबंद कर पूरे देश में बड़ा आंदोलन करेंगे”।

सीटू जिला महामंत्री राम सागर ने अपने संबोधन की शुरुआत इस नारे के साथ की, “भारतीय रेल हमारी-आपकी है किसी के बाप की नहीं, उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे एक सार्वजनिक सेवा है। यह लाभ कमाने वाला उधम नहीं है और इस व्यवस्था को हम तहस-नहस नहीं होने देंगे”।

“इसका डटकर विरोध किया जाएगा उन्होंने सरकार से कहा कि भारतीय रेल सार्वजनिक परिवहन सेवा है इसे और मजबूत करने की जरूरत है न की इसका निजीकरण कर कमजोर करने की”।

विरोध प्रदर्शन में सीटू कार्यकर्ता पूनम देवी, भीखू प्रसाद, अमित मिश्रा, हरकिशन सिंह, गंगेश्वर दत्त शर्मा, रामसागर, जगलाल, शाकिर, विजय गुप्ता, राजेंद्र गुप्ता आदि ने हिस्सा लिया था।

इसके पहले रेलवे मज़दूर संघ ने भी सरकार को चेताया था। “यदि रेलवे निजीकरण हुआ तो हम भारतीय रेल के इतिहास का सबसे बड़ा प्रदर्शन करेंगे जो कि 1960,1968 और 1974 में हुआ था, जिसने रेलवे की जड़ों को हिला कर रख दिया था”।

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