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‘महिला सशक्तिकरण की संस्थाएं बर्बाद कर प्रचार पर करोड़ों बहा रही योगी सरकार’

एआईपीएफ के वर्चुअल संवाद में महिलाओं ने कहा, बदनामी का दाग धोने को सरकार ने शुरू किया ‘मिशन शक्ति’

उत्तरप्रदेश में महिलाओं पर लगातार हो रही हिंसा, बलात्कार, एसिड अटैक आदि की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए नवरात्र के पहले दिन 17 अक्टूबर को ‘मिशन शक्ति’ अभियान धूमधाम से शुरू किया है। महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए चलाए इस अभियान में करोड़ों रुपये विज्ञापन, एलईडी वैन से फ्लैग आफ, वायस मैसेज, थानों व ग्रामीण जागरुकता पर खर्च होना है।

इस मामले पर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने महिलाओं के साथ वर्चुअल संवाद किया। जिससे मिशन शक्ति पर महिलाओं के मत को सामने लाया जा सके। संवाद में वर्कर्स फ्रंट की ओर से दिनकर कपूर ने पक्ष रखा।

उन्होंने कहा, मिशन शक्ति अभियान कवायद है, जब सरकार की नीति और मानसिकता दुरुस्त नहीं है। कट्टर हिंदुत्व के विचार से संचालित भाजपा सरकार महिलाओं को दोयम दर्जे का मानने नजरिया जब तब उजागर होता रहा है। यहां तक कि हाल ही की घटनाओं पर विधायकों और सांसदों के बयान शर्मनाक रहे हैं।

वर्चुअल संवाद में महिला समाख्या की प्रदेश अध्यक्ष प्रीती श्रीवास्तव, शगुफ्ता यासमीन, मंत्री सुनीता ने कहा कि पूरा प्रदेश महिलाओं की कब्रगाह में तब्दील हो गया है। पिछले हफ्ते गोंडा में तीन लड़कियों पर एसिड अटैक, प्रतापगढ़ और चित्रकूट में बलात्कार की शिकार पीडि़त लडकियों की आत्महत्या, झांसी में हॉस्टल में बलात्कार, आगरा व बाराबंकी में नाबालिग से रेप जैसी घटनाएं प्रदेश में तेजी से बढ़ रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मिशन शक्ति की घोषणा करने वाली सरकार, उसके विधायक, सांसद व उच्चाधिकारी अपराधियों को सजा दिलाने की जगह पीडि़ता की ही चरित्र हत्या करने में पूरी शक्ति लगा दे रहे हैं। हाईकोर्ट तक ने हाथरस मामले में इस पर गहरी आपत्ति दर्ज की और सरकार के आला अधिकारियों को फटकार लगाई।

उन्होंने मांग की कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त करना चाहती है तो उसे महिला समाख्या और 181 वूमेन हेल्पलाइन जैसे महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान व स्वावालंबी बनाने वाले कार्यक्रमों को पूरी क्षमता से चलाना चाहिए और उसके कर्मियों के बकाए वेतन का तत्काल भुगतान करना चाहिए।\

181 वूमेन हेल्पलाइन की कर्मचारी रेनू शर्मा, रीता, साजिया बानो, रेहाना, ज्याति, लक्ष्मी, रेखा सिंह, खुशबु, चारू जाट, रामलली, अनीता कुमारी आदि ने कहा कि सीएम अपने विज्ञापन और ट्वीटर में बार-बार 181 का जिक्र कर रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि निर्भया कांड के बाद बनी जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी की संस्तुति के आधार पर महिलाओं को संरक्षण देने के लिए अलग से बनाई गई ‘नंबर एक-काम अनेक’ जैसी 181 वूमेन हेल्पलाइन को सरकार ने बंद कर इसमें कार्यरत सैकड़ों महिलाओं को सडक़ पर ला दिया है। हद यह है कि बकाया वेतन तक नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा, सरकार ने 181 को पुलिस के सामान्य काल सेंटर 112 में समाहित कर दिया, जबकि 181 चालू ही इसलिए किया गया था क्योंकि हिंसा से पीडि़त महिलाएं पुलिस के साथ अपने को सहज नहीं पाती थीं। इस बात को खुद योगी सरकार ने 181 के लिए बनाए प्रोटोकाल में स्वीकार किया है।

यहीं नहीं इसी सरकार ने 181 हेल्पलाइन की तारीफ करते हुए शासनादेश में स्वीकार किया कि इस कार्यक्रम ने मात्र छह माह में सवा लाख महिलाओं को राहत देने का काम किया। तब, मिशन शक्ति चलाने वाली सरकार को यह बताना चाहिए कि उसका इस बहुआयामी 181 हेल्पलाइन को बंद करने का क्या तर्क है।

संवाद में शामिल महिलाओं ने कहा, यदि मिशन शक्ति जैसे अभियान के साथ प्रदेश में महिला समाख्या व 181 वूमेन हेल्पलाइन जैसी संस्थाएं पूरी क्षमता से चल रहीं होतीं तो शायद आज जो हालात हाथरस, बाराबंकी, गोंडा से लेकर पूरे प्रदेश में महिलाओं के हो रहे हं,ै उनसे एक हद तक बचा जा सकता था।

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