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सालों से काम करने वाले मज़दूरों को आगरा के सेठ ने निकाला, तीन महीने की सैलरी हड़पी

वर्कर्स यूनिटी लीगल हेल्पलाइन पर शिकायतों की भरमार, मज़दूर चिट्ठी लिख कर कर रहे हैं शिकायत

By खुशबू सिंह

आठ-नौ साल से ‘चाइनीज गैलरी विक्रेत’ दुकान में काम कर रहे अमित सैनी को उनके मालिक विजय प्रकाश गुप्ता ने बिना वेतन का भुगतान किए ही उन्हें काम से निकाल दिया।

लॉकडाउन के दौरान मज़दूर वर्ग और मेहनतकश वर्ग को राहत देने की तमाम घोषणाओं के बावजूद मज़दूरों के साथ ऐसी घटनाएं अब रोज़ की सुर्खियां हो गई है।

न तो उन्हें लॉकडाउन की सैलरी मिली और ना ही नौकरी की कोई गारंटी बची है क्योंकि अब दसियों से साल से काम कर रहे वर्करों को मालिक वर्ग बाहर का रास्ता दिखा रहा है।

वर्कर्स यूनिटी की ओर से बनाए गए लीगल हेल्पलाइन पर इस तरह की दर्जनों शिकायतें आ रही हैं।

इसी तरह की एक शिकायत अमित ने की है। उन्होंने वर्कर्स यूनिटी को चिट्ठी लिख कर कहा है कि, ‘उनके मालिक विजय प्रकाश गुप्ता ने मार्च से लेकर जून तक का वेतन नहीं दिया है।’

12-12 घंटे काम और किश्तों में सैलरी

अमित वेतन के सिलसिले में ‘जब भी अपने मालिक को फ़ोन करते हैं तो वो फ़ोन नहीं उठाते हैं, और ना ही मिलते हैं।’

दरअसल लॉकडाउन के समय से ही कई कर्मचारियों को कंपनी मालिक और दुकानदार उन्हें बिना वेतन दिए, काम से लगातार निकाल रहे हैं।

इसी बात को मद्दे नजर रखते हुए, वर्कर्स यूनिटी ने उन मज़दूरों के लिए लीगल हेल्पलाइन नंबर जारी किया है जिन्हें अभी तक वेतन नहीं मिला है या ग़ैर क़ानूनी रूप से निकाल दिया गया है।

इसी हेल्पलाइन नंबर पर आगरा के रहने वाले अमित सैनी ने लिखित शिकायत भेजी है।

उन्होंने लिखा है, ‘उनके मालिक उनसे रोजाना 12-14 घंटे काम करवाते हैं और वेतन के नाम पर अभी तक कुछ नहीं दिया है और काम से भी निकाल दिया है।’

अमित के अनुसार, ‘उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब है और कर्ज लेकर परिवार का पेट पाल रहे हैं। मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है और ना ही कोई रोज़गार मिल रहा है।’

तीन महीने की सैलरी हड़पी

अमित हर महीने 9,000 हज़ार रुपये कमा लेते थे। ये नौ हज़ार भी उनके मालिक उन्हें हमेशा किस्तों में अदा करते थे।

अमित के मालिक विजय प्रकाश गुप्ता की आगरा में चाइनीज़ गैलरी नाम की दुकान है और वो थोक विक्रेता भी हैं।

अमित बताते हैं कि पीपल मंडी खालसा गली, आगरा में पिछले 35 साल से गुप्ता परिवार का ये व्यवसाय है, जहां गोदाम, दुकान और घर साथ साथ हैं।

अमित लिखते हैं, “कोरोना के चलते माननी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन घोषित किया जिससे मज़दूर वर्ग पर बहुत ज़्यादा असर पड़ा है और उन्हीं में मैं भी एक हूं।”

अमित के अनुसार उनके मालिक इतने रसूखदार हैं कि उन्हें इंसाफ़ मिलता दिखाई नहीं दे रहा है जबकि मार्च से लेकर मई तक सैलरी भी नहीं मिली है, जिसकी वजह से घर की माली हालत बहुत खस्ता हो गई है।

लॉकडाउन की घोषणा के समय मोदी ने कहा था कि मेहनतकश वर्ग को कोई परेशानी नहीं होगी और मालिक वर्ग उनका ख्याल रखेगा। इस संबंध में एक अध्यादेश जारी कर लॉकडाउन के दौरान की सैलरी देने की बात कही गई थी।

सरकार की शह पर मालिकों के पौ बारह

लेकिन क़रीब 60 दिन के लॉकडाउन के बाद मोदी सरकार ने न केवल अपना ये आदेश वापस ले लिया बल्कि सुप्रीम कोर्ट में भी हलफ़नामा देकर अपने वादे से मुकर गई।

यही नहीं इस दौरान मोदी सरकार की शह पर राज्य सरकारों ने अपने राज्यों में श्रम क़ानूनों को ही पूरी तरह ख़त्म कर दिया।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने तो तीन साल तक श्रम क़ानूनों को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।

इसका ख़ामियाजा ये हुआ कि मालिक वर्ग मोदी सरकार का इशारा पाकर न केवल मज़दूरों की सैलरी हड़प ली बल्कि उन्हें नौकरी से भी रुख़्सत कर दिया।

अब चूंकि कोई श्रम क़ानून हैं ही नहीं जो मज़दूरों के हितों की रक्षा कर पाएं इसलिए मज़दूर हर तरह के शोषण और उत्पीड़न के शिकार होने के लिए छोड़ दिए गए हैं।

(नोटः अगर आपकी भी कोई शिकायत हो तो वर्कर्स यूनिटी लीगल हेल्पलाइन के ह्वाट्सएप नंबर- 85069 29429 पर अपनी शिकायत लिख भेजें। हर संभव क़ानूनी मदद की कोशिश की जाएगी।)

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं। वर्कर्स यूनिटी के टेलीग्राम चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें।)

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