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गुजरात अंबुजा में परमानेंट मज़दूरों को घर बैठा ठेका मज़दूरों से कराया जा रहा काम

30 जून से मज़दूरों के बच्चों ने बाल सत्याग्रह करने की दी चेतावनी

उत्तराखंड के सितारगंज में स्थित गुजरात अंबुजा के मज़दूरों की पांच महीने से जारी लड़ाई का कोई हल दिखाई नहीं दे रहा है।

कंपनी के 208 मज़दूर पिछले 5 महीने से संघर्ष कर रहे हैं। 28 जनवरी से मांग पत्र और अन्य मांगों को लेकर मज़दूर हड़ताल पर चले गए थे।

लेकिन लॉकडाउन के चलते मैनेजमेंट ने इनकी मांगों से पल्ला झाड़ लिया।

कंपनी की मज़दूर यूनियन ने भूख हड़ताल, क्रमिक अनशन और स्थानीय विधायक का घेराव समेत प्रशासनिक और क़ानूनी स्तर पर हर जगह गुहार लगाई लेकिन कोई हल नहीं निकला।

अब मज़दूरों के परिवार और बच्चों ने 30 से स्थानीय विधायक के आवास पर बाल सत्याग्रह करने का फैसला किया है।

कंपनी में हड़ताल जारी है और यूनियन का कहना है कि अप्रशिक्षित मजदूरों से उत्पादन करवाया जा रहा है।

कंपनी पर प्रदूषण बढा़ने का आरोप

प्रशिक्षित और कुशल कामगार वाले कारखाने को अप्रशिक्षित मज़दूरों से चलवाने के गैरकानूनी कार्य की यूनियन ने लेबर डिपार्टमेंट में शिकायत भी की लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ।

बीते 26 जून को श्रमिक परिवार के बच्चों द्वारा जिलाधिकारी व स्थानीय विधायक को चि्टठी लिख कर कहा है कि कंपनी को ठेका मज़दूरों के माध्यम से लोडिंग अनलोडिंग जैसे कार्यों के लिए ही केवल लाइसेंस मिला है। इसके बावजूद उन्हें भारी कामों में लगा दिया गया।

कंपनी द्वारा स्टार्च के उत्पादन से भारी मात्रा में पानी प्रदूषित हो रहा है, जिसपर  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी नोटिस जारी की थी, लेकिन कंपनी के ऊपर कोई भी कार्यवाही नहीं हुई।

यूनियन के नेता कैलाश पांडे का कहना है कि अति संवेदनशील बॉयलर प्लांट व अति ज्वलनशील हाइड्रोजन गैस के प्लांट को भी ठेका मजदूरों के हवाले कर खूनी खेल खेलने की साजिश रच दी गई है।

उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि कभी भी एलजीजी पॉलिमर विशाखापट्टन, केमिकल प्लांट भरूच, NTPC के रायबरेली संयत्र व यूनियन कार्बाइड के भोपाल जैसे हादसे होने का ख़तरा बढ़ गया है।

कई मज़दूरों को नियुक्ति पत्र नहीं मिला

यूनियन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि NGT की ओर से 2018 में पर्यावरण के ख़िलाफ़ आपराधिक साजिश रचने के आरोप में डीएम ऊधमसिंह नगर को एक सप्ताह के भीतर गुजरात अम्बुजा कंपनी को बंद करने का आदेश दिया गया था।

यूनियन का आरोप है कि कंपनी में जल शोधन के ETP प्लांट में प्रतिदिन करीब 30 लाख लीटर पानी का इस्तेमाल होता है। यह प्रक्रिया बहुत ही जटिल है और इसमें कुशल श्रमिक लगते हैं, इसे ठेका मज़दूरों के हवाले कर दिया गया है।

14 जनवरी 2020 को एसडीएम सितारगंज और लेबर डिपार्टमेंट की मध्यस्थता में कंपनी में समझौता हुवा था कि 177 ऐसे स्थाई मजदूर जिन्हें कंपनी ने नियुक्ति पत्र नहीं दिया है, उन्हें कंपनी से नहीं निकाला जाएगा।

मज़दूरों का कहना है कि कंपनी में नियुक्ति पत्र वाले कुल 208 स्थाई मजदूर काम पर हैं, लेकिन लेबर डिपार्टमेंट भी कंपनी की भाषा बोलते हुए कहता है कि कंपनी रोल में 139 मजदूर ही कार्यरत हैं जिनमें से 22 निलंबित हैं।

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