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उत्तराखंड सिडकुल में मज़दूरों ने संयुक्त मोर्चा बना संघर्ष के लिए कमर कसी

कई कंपनियों ने वेतन कटौती की, ले ऑफ़ दिया और अब ट्रांसफ़र का काग़ज थमा दिया है

लॉकडाउन के बाद से खुली फैक्ट्रियों में मज़दूरों को अब बेधड़क निकाला जा रहा है। कहीं उनका वेतन काटा जा रहा है तो, कहीं काम से बिना नोटिस निकाला जा रहा है।

पंतनगर सिडकुल में बिल्डिंग मैटीरियल कंपनी इंटरार्क के 195 मज़दूरों का चेन्नई ट्रांसफ़र किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

संघर्ष को तेज़ करने के लिए किच्छा व पंतनगर में एक संयुक्त संगठन बनाया गया है,आखिल भारतिए इन्टरार्क मजदूर फ़ेडरेशन, जिसका अध्यक्ष दलजीत सिंह को बनाया गया है।

इसके अलावा मज़दूरों ने एक संयुक्त मोर्चा बनाकर संघर्ष का आह्वान किया है। गांधी मैदान में हुई कार्यकारिणी की बैठक में तय किया गया कि अगर मालिकों की मनमानी बंद नहीं होती है तो मज़दूर वर्ग बड़े आंदोलन की ओर बढ़ेगा।

एक स्थानिय अखबार के अनुसार, बैठक में श्रमिक संयुक्त मोर्चा कार्यकारिणी ने सांकेतिक धरना देकर अपनी मंशा को साफ कर दिया है।

रविवार को बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ‘सिडकुल की फैक्ट्रियों में लंबे समय से मज़दूरों के साथ शोषण हो रहा है। लॉकडाउन के दौरान फैक्ट्रियां बंद होने का प्रबंधन पूरा फायदा उठा रहा है।’

निकालने की साज़िश

मज़दूरों ने आरोप लगाया है कि, ‘आर्थिक तंगी का हवाला देकर मज़दूरों को काम से निकाला जा रहा है और कई मज़दूरों को एक राज्य से दूसरे राज्य ट्रांसफ़र किए जाने की साजिश रची जा रही है, ताकि उन्हें निकाला जा सके।’

एक मज़दूर नेता ने आरोप लगाया कि श्रम क़ानूनों में जिस तरह मोदी सरकार ने बदलाव किए और उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह सरकार ने उसे लागू किया है इससे साफ़ होता है कि ये सब बीजेपी की सरकारों के इशारे पर हो रहा है।’

आरोप है कि लॉकडाउन के दौरान अधिकतर मज़दूरों को आधा ही वेतन दिया गया। कई फैक्ट्रियों ने तो मज़दूरों को अभी तक पूरा वेतन नहीं दिया है।

इंटरार्क मज़दूर यूनियन के एक नेता ने बताया कि चेन्नई में इस समय पूरा लॉकडाउन चल रहा है, ऐसे में वहां ट्रांसफ़र किया जाना निकालने की साजिश है।

एक अनुमान के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान एक झटके में पूरे देश में 12 करोड़ लोग बेरोज़ग़ार हो गए और ये सिलसिला अभी भी जारी है।

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