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दिल्ली में रेलवे के किनारे 48 हज़ार झुग्गियां हटाने से फिलहाल एक महीने की राहत

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक महीने के अंदर पूरी योजना तैयार करने का दिया हलफ़नामा

दिल्ली में रेलवे की जमीन पर बसी 48 हजार झुग्गियों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक महीने के लिए राहत मिल गई है।

अजय माकन की याचिका पर हो रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा कि इस बारे में चार सप्ताह के अंदर पूरी योजना कोर्ट के सामने पेश करने का वादा किया।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शहरी विकास मंत्रालय 4 सप्ताह में समाधान निकालेंगे और तब तक झुग्गियों को हटाया नहीं जाएगा।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को एक महीने के लिए टाल दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ के झुग्गियों को तीन महीने के अंदर खाली कराए जाने के आदेश के बाद कांग्रेस नेता अजय माकन ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

माकन ने दिल्ली की रेलवे लाइन के आस-पास 48 हज़ार झुगियों को हटाने के फैसले को वापस की अपील की है।

उनकी गोली होगी अपना सीना होगाः शकूर बस्ती के झुग्गीवासी

दिल्ली की 48000 झुग्गियों को तोड़ने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर क्या कहते हैं दिल्ली के शकूर बस्ती के लोग?

Gepostet von Workers Unity am Samstag, 5. September 2020

याचिका के अनुसार, इस फ़ैसले से क़रीब ढाई लाख लोग प्रभावित होंगे। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इन झुग्गियों को तीन महीने में हटाने का आदेश दिया है, लेकिन इस मामले में झुग्गी वासियों की बात नहीं सुनी गई।

याचिका में माकन ने कहा कि, ‘दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में निर्देश दिया था कि बिना पुनर्वास और वैकल्पिक आवास मुहैया कराए बिना झुग्गियों को नहीं हटाया जा सकता लेकिन रेलवे और दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस आदेश से अंधेरे में रखा।’

माकन ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी और केंद्र की मोदी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को अंधेरे में रखने का आरोप लगाया।

लोग भी इस बात को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी तो मोदी सरकार और केजरीवाल सरकार के प्रतिनिधियों ने झुग्गी वासियों का पक्ष क्यों नहीं रखा।

याचिकाकर्ताओं में माकन के साथ झुग्गीवासी कैलाश भी हैं। कैलाश ने अपनी याचिका में कहा है कि दिल्ली झुग्गी और जेजे पुनर्वास और पुनर्वास नीति, 2015 और प्रोटोकॉल (झुग्गियों को हटाने के लिए) में उनकी झुग्गियों को हटाने से पहले पुनर्वास की एक प्रक्रिया है।

https://www.youtube.com/watch?v=4G-sJmeAT8E&t=31s

बेघर व्यक्तियों को आश्रय और आजीविका की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए मजबूर किया जाएगा और वह COVID-19 के चलते हानिकारक होगा।

बता दें कि दिल्ली को संसद में पास एक क़ानून के तहत विशेषाधिकार दिए गए हैं जिसमें पुनर्वास की प्रक्रिया का पूरा उल्लेख है।

जब 2017 में रेलवे के किनारे बसी झुग्गियों को रेलवे ने अचानक उजाड़ना शुरू किया तो इसका कड़ा प्रतिरोध हुआ।

उसी दौरान अजय माकन ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और वहां से पुनर्वास के इंतज़ाम होने तक उजाड़ने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।

वरिष्ठ वकील कमलेश कुमार कहते हैं कि उस दौरान रेलवे ने झुग्गियों को हटाने और पुनर्वास में आने वाले खर्च को वहन करने का वादा किया था।

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