मणिपुर दरिंदगी के ख़िलाफ़ सभा कर रहे कार्यकर्ताओं पर हमला, कई के सिर फूटे, आरएसएसएस-बीजेपी पर आरोप

मणिपुर दरिंदगी के ख़िलाफ़ सभा कर रहे कार्यकर्ताओं पर हमला, कई के सिर फूटे, आरएसएसएस-बीजेपी पर आरोप

दो महीने से मणिपुर में जारी हिंसा के बाद आदिवासी कुकी महिलाओं के साथ बर्बरता और दरिंदगी की आ रही खबरों के बीच पूरे देश में आक्रोश है और लगभग हर शहर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

हरियाणा के फरीदाबाद में इसी तरह के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं और ट्रेड यूनियन एक्टिविस्ट पर हमले की ख़बर है।

रविवार को फरीदाबाद के गोछी में एक रैली का आयोजन इंकलाबी मजदूर केंद्र और परिवर्तनकामी छात्र संगठन की ओर से किया गया था।

ख़बर के अनुसार, रैली जब विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए आगे बढ़ी तो कुछ लोगों ने रैली को रोकने की कोशिश की।

प्रदर्शन में शामिल एक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि सहदेव नाम के एक गुंडातत्व के नेतृत्व में कुछ लड़कों ने रैली को रोकने की कोशिश की। लेकिन जब  रैली आगे बढ़ने लगी तो उनमें से एक गुंडे ने पीछे से लोहे के डंडे से प्रदर्शन में शामिल एक कार्यकर्ता पर हमला किया और भाग गया।

आईएमके ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस हमलावर का पीछा करते हुए जब दो लोग उनके पीछे गए तो गली में छिपे गुंडों ने उनपर जानलेवा हमला बोल दिया जिससे उनके सिर में चोटें आई हैं।

बयान में आरोप लगाया गया कि ये हमलावर आर एस एस – भाजपा जुड़े गुंडा तत्व हैं।

ताज़ा सूचना के मुताबिक, इस हमले में तीन प्रदर्शनकारी संतोष, दीपक और नितेश को गंभीर चोटें आई हैं। तीनों के सिर पर हमला किया गया है।

प्रदर्शन में शामिल संगठनों का आरोप है कि घटना के बाद गोछी थाने ने भी अपराधियों को बचाने की ही कोशिश की।

बयान के अनुसार, “शुरुवात में गोछी पुलिस चौकी में पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करते रहे। लेकिन जनदबाव बढ़ने के बाद पुलिस को इन फासीवादी गुंडों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।”

इंकलाबी मजदूर केंद्र और परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि ये घटना दिखाती है कि बीजेपी और आरएसएस किस तरह का भारत बनाना चाहते हैं। पहले बीजेपी द्वारा महज सत्ता के लिए मणिपुर में मैतई और कुकी के बीच में दंगे करवाए गए।

तीन महीनों से जारी इन राज्य प्रायोजित हिंसा में अब तक 160 लोग मारे जा चुके हैं। 50,000 लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। अनेकों महिलाओं के साथ बलात्कार जैसी घृणित घटनाएं घटी हैं। दो महिलाओं के साथ हुए वीभत्स कांड को तो पूरा देश देख ही चुका है।

इन घटनाओं का देश और दुनिया में हर जगह विरोध हो रहा है। हर जगह मोदी सरकार की थू-थू हो रही है। ऐसे में देश के भीतर अपने विरोध से बौखलाई बीजेपी और पूरी संघ मंडली अपने खिलाफ उठ रही हर आवाज को दबाने पर आमादा हैं।

Manipur main culprit
मणिपुर वायरल वीडियो के सैकड़ों अभियुक्तों में से एक को बीरेन सरकार की पुलिस ने घटना के करीब 80 दिन बाद गिरफ़्तार किया गया।

अभी तक मणिपुर मामले में क्या क्या हुआ?

मणिपुर में 3 मई को हिंसा शुरू हुई। तबसे वहां इंटरनेट बंद है और देश में सूचनाएं छन छन कर आ रही हैं। अधिकांश ईसाई आदिवासी कुकी और हिंदू मैतेई समुदायों के संघर्ष में अबतक 150 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, 60,000 लोग बेघर होकर राहत शिविरों में रह रहे हैं। इनमें अधिकांश आदिवासी कुकी हैं।

18 जुलाई बुधवार को तीन कुकी महिलाओं को मैतेई भीड़ द्वारा नंगा कर परेड कराने और फिर गैंग रेप करने का एक वीडियो सामने आया। देश भर में भारी आक्रोश के बीच नरेंद्र मोदी ने संसद सत्र शुरू होने के दिन संसद के बाहर एक चलताऊ बयान दिया और घड़ियालू आंसू बहाए। जिसका डेलीग्राफ़ ने फ्रंट पेज पर एक घड़ियाल की फोटो छापी और हेडिंग दी की 56 इंच की चमड़ी में संवेदना घुसते घुसते 79 दिन लगे तब घड़ियाली आंसू बहे।

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लेकिन मोदी के इस बयान की विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की क्योंकि उन्होंने मणिपुर में हो रही हिंसा की तुलना राजस्थान, छत्तीसगढ़ से की।

मोदी से संसद में बयान देने को लेकर नई संसद में शुरू हुआ मानसून का संसदीय सत्र पिछले पांच दिन से ठप पड़ा है। सरकार और उसके सहयोगी गैरकानूनी ट्रोल संगठन साफ़ तौर पर मणिपुर की हिंसा को जायज ठहराने, पश्चिम बंगाल, राजस्थान की घटना की आड़ में ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह मैतेई समुदाय से आते हैं और उन पर मैतेई दंगाई भीड़ का साथ देने और कुकी समुदाय को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं और उनका इस्तीफा मांगा जा रहा है लेकिन न तो मोदी और शाह की केंद्र सरकार उन्हें हटा रही है न वो इस्तीफा दे रहे है।

वायरल वीडियो घटना के मुख्य अभियुक्त समेत छह लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है। मैतेई महिलाों के संगठन मीरा पैबिस पर भी आरोप लग रहे हैं कि वो राहत और बचाव काम करने में सेना और पुलिस को रोक रही है।

22 जुलाई को द हिंदू ने एक और कुकी महिला के साथ हुई दरिंदगी की खबर छापी जिसमें उस लड़की ने आरोप लगाए हैं कि मीरा पैबिस की महिलाओं ने उसे पकड़ कर मैतेई उग्रवादी संगठन के उग्रवादियों के हवाले कर दिया जहां उसके साथ गैंगरेप किया गया और गोली मारने की तैयारी हो रही थी तभी एक हादसे में वो पहाड़ी से गिर कर सड़क पर आ गिरी जहां उसे एक ऑटो रिक्शा वाले ने पुलिस स्टेशन पहुंचाया।

इसी तरह बीबीसी की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया कि इम्फाल में नर्सिंग की कुकी स्टूडेंट को मैतेई भीड़ ने हास्टल से खींच कर मारा पीटा और मरा हुआ जानकर छोड़ा, जिससे उनकी जान बची।

इस हिंसा के बाद हज़ारों कुकी परिवार पड़ोस के राज्यों, मिजोरम, असम में चले गए हैं। मिजोरम में रह रहे मैतेई समुदाय को पूर्व उग्रवादी संगठनों के एक मंच ने चेतावनी जारी की है जिसके बाद उनका भी पलायन शुरू हो गया है।

इस समस्या का हल करने की बजाय मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने तुरंत हवाई जहाज भेजने की घोषणा कर दी। मानो वो चाहते ही यही थे।

कांग्रेस का आरोप है कि आरएसएस ने पूर्वोत्तर में  ईसाई समुदाय के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने का काम किया है। मणिपुर के चीफ़ सेक्रेटरी के आरएसएस से जुड़े होने के भी आरोप लगाए हैं।

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Workers Unity Team

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