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Pinjra Tod- दिल्ली पुलिस पर लड़कियों ने लगाए बैड टच के आरोप, कई छात्राएं घायल

सोमवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी की लड़कियों के एक प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग किया जिसमें कुछ छात्राओं को चोटें आई हैं।

ये लड़कियां महिला छात्रावास में तरह तरह की मर्दवादी भेदभाव वाली पाबंदियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही थीं।

देश की राजधानी के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में लड़कियों और लड़कों के हॉस्टल में अलग अलग नियम क़ानून हैं।

छह बजे के बाद हॉस्टल में बंद कर दिया जाता है

लड़कियों को हॉस्टल में छह बजे के बाद आने जाने पर पाबंदी है, चाहे जितनी भी इमरजेंसी हो।

इस भेदभाव और मर्दवादी नियम के ख़िलाफ़ पहले भी वो कई बार प्रदर्शन कर चुकी हैं।

उनकी मांगों में हॉस्टल की संख्या बढ़ाने और हॉस्टल फीस को कम करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है।

आम तौर पर बाहर से आकर पढ़ने वाली लड़कियों के लिए हॉस्टल फीस चुकाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि एक साल की फीस लाख लाख रुपए तक है।

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पिंजरा तोड़ अभियान की मांग में हॉस्टल की फ़ीस कम करने की मांग भी शामिल है। तस्वीरः पिंजरा तोड़ से साभार

प्रोटेस्ट का अनोखा तरीका

लड़कियों का कहना है कि शिक्षा इस देश के हर नागरिक का मूल अधिकार है और हॉस्टल की फीस ऊंची करके इसे ग़रीबों, मज़दूरों, दलितों, आदिवासियों के बच्चों की पहुंच से दूर किया जा रहा है।

इन मांगों और हॉस्टल कर्फ्यू से आज़ादी की मांग करने का उन्होंने अनोखा तरीका निकाला।

उन्होंने रात में सड़कों पर जश्न मनाते हुए प्रदर्शन का तरीका अपनाया।

सोमवार को शाम दिल्ली यूनिवर्सिटी गेट पर जब फिर से प्रदर्शन शुरू हुआ तो लड़कियों ने वीसी को बुलाने की मांग रखी और मिलने का इरादा जताया।

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पिंजरा तोड़ अभियान, महिला हॉस्टल में तरह तरह की पाबंदियों के ख़िलाफ़ छात्राओं का अभियान है। तस्वीरः पिंजरा तोड़ से साभार

पुलिस पर बैड टच का आरोप

जब वीसी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया तो विश्वविद्यालय के सामने बिज़ी मॉल रोड जाम कर दिया।

पुलिस आई तब भी लड़कियां अपनी मांग पर अड़ी थीं, छात्राएं सड़क पर ही लेट गईं।

पुलिस ने बल प्रयोग किया और हटाने की कोशिश की जिसमें कुछ छात्राओं को चोटें आईं।

कुछ लड़कियों ने पुलिस पर ग़लत तरीक़े से छूने के आरोप भी लगाए, जिसे वीडियो में सुना जा सकता है।

मशक्कत के बाद पुलिस ने लड़कियों को कुछ देर के लिए हिरासत में ले लिया।

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क्या है अभियान

असल में लड़कियां इन हॉस्टल नियमों को महिलाओं को घर में क़ैद कर देने वाला बताती हैं।

इन लड़कियों ने लंबे समय से इसके ख़िलाफ़ अभियान छेड़ रखा है।

ये अभियान पिंजरा तोड़ के नाम से लोकप्रिय हुआ और देखते देखते पिंजरा तोड़ देश के कई हिस्से में फैल चुका है।

डीयू के बाद जामिया, अलीगढ़, बीएचयू, पंजाब, रोहतक, कोट्टायम, भुवनेश्वर में लड़कियों ने रात में हॉस्टल गेट के ताले तोड़े।

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