J&K : महीनों से धरने पर बैठे कश्मीरी पंडितों को एलजी ने वेतन देने से किया इंकार

J&K : महीनों से धरने पर बैठे कश्मीरी पंडितों को एलजी ने वेतन देने से किया इंकार

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने महीनों से धरने पर बैठे लोगों को कहा कि जम्मू में विरोध प्रदर्शन कर रहे कश्मीरी पंडितों सहित अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जाएगा यदि वे अपने काम पर नहीं लौटते हैं।

एलजी ने बुधवार, 21 दिसंबर को जम्मू में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा-

‘अगर वे घर पर बैठे हैं और अपने कर्तव्यों को फिर से शुरू नहीं कर रहे हैं तो हम उन्हें भुगतान नहीं कर सकते हैं।’

उपराज्यपाल ने कहा कि वह प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के संपर्क में हैं और उनकी जायज मांगों को सुना है।

एलजी के इस बयान के बाद प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वो जम्मू में काम पर वापस नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि यह बेहतर होगा कि सरकार उन्हें बर्खास्त कर दें, क्योंकि लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध संगठन द्वारा कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की हत्या के लिए चुने गए लोगों की सूची प्रकाशित किए जाने के बाद उनको जम्मू में मारे जाने का खतरा बना हुआ है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस सम्बन्ध में उनको घाटी में काम के दौरान उचित सुरक्षा नहीं दी जा रही है।

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ज्ञात हो कि अपने दो सहकर्मियों की निशाना बनाकर की गई हत्या के बाद मई 2022 में  घाटी छोड़ कर  जम्मू  जाने  वाले प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और जम्मू में तैनात आरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों के जारी प्रदर्शन के बीच उपराज्यपाल ने यह टिप्पणी की है।

उपराज्यपाल ने  कहा – “हमने सुनिश्चित किया है कि सभी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को जिला मुख्यालय में ट्रांसफर कर दिया जाए। केवल ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारी ही कश्मीर के गांवों में काम कर रहे हैं क्योंकि उन्हें शहर के क्षेत्रों में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।”

सुरक्षा स्थिति के मुद्दे पर एलजी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी पारिस्थिति की तंत्र में शामिल लोगों को कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों को सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगातार ट्रेस किया जाता है और समय-समय पर बुक किया जाता है।”

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जब द ट्रिब्यून द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या प्रशासन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की अनुमति देगा, उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक सिद्धांतों और कानून के दायरे में आयोजित किसी भी मार्च की अनुमति है।

गौरतलब है कि मई 2022 में कश्मीर में राहुल भट की हत्या के बाद से पिछले छह महीनों में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित जम्मू में राहत आयुक्त कार्यालय में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

सरकार ने हाल ही में संसद को सूचित किया था कि जम्मू-कश्मीर में अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद से और इस साल जुलाई के मध्य तक पांच कश्मीरी पंडित और 16 अन्य हिंदुओं तथा सिखों सहित 118 नागरिक मारे गए थे।

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WU Team

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