पंजाब में दलितों के पट्टे की ज़मीन में ‘आप’ का अड़ंगा, भगवंत मान का घर घेरा

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पंजाब में पंचायती खेती की ज़मीन को दलितों के लिए लीज़ दिए जाने के नियमों में बदलाव को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है। गुरुवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के घर का बड़ी संख्या में लोगों ने घेराव किया।

राज्य में चुनाव ख़त्म होने के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार को इस बात का अनुमान बिलकुल भी नहीं होगा कि उनके खिलाफ इतनी जल्दी और इतने बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हो जायेगा।

भूमिहीन खेतिहर मज़दूरों और दलित संगठन ज़मीन प्राप्ति संघर्ष समिति (जेडपीएससी) ने गुरुवार को पंचायती ज़मीन की नीलामी के लिए लीज नीति में नए बदलावों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

सड़क पर उतरे मजदूरों ने राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान के घर के बाहर नारेबाजी की। विरोध कर रहे दलित भूमिहीन मजदूरों की मांग है कि जो 1008 एकड़ पंचायती जमीन के तीसरे हिस्से को दलितों के लिए आरक्षित करने के पुराने नियम बहाल किए जाएं।

सीएम का घर घेरा

गुरुवार को हुए प्रदर्शन के बाद भगवंत मान ने दलित और भूमिहीन संगठनों के साथ आगामी 24 मई को बैठक करने का आश्वासन दिया इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

असल में पिछली कांग्रेस की  सरकार ने 2018 में लीज़ नीति में बदलाव किया था जिसमें कहा गया था कि ज़मीन का पट्टा तीन साल के लिए लिया जा सकता है।

दूसरा, दलितों को दिए जाने वाले पट्टे की नीलामी की न्यूनतम मूल्य में बढ़ोत्तरी नहीं की जाएगी। तीसरा, सामूहिक रूप से अगर दलित पट्टा लेना चाहते हैं तो उन्हें  व्यक्तिगत लोगों पर तरजीह दी जाएगी।

लेकिन जब इसी साल की शुरुआत में पंजाब चुनाव में भारी जीत हासिल कर आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आई तो उसने आते सबसे पहला काम ये किया कि 2018 के नोटिफिकेश को रद्द कर दिया और नई नीति लागू कर दी।

बीते 10 मार्च को अधिसूचित पंचायती भूमि के लिए नई पट्टा नीति के तहत अब उपरोक्त तीनों प्रावधानों को रद्द कर दिया गया और इसे आनन फानन में 16 मार्च से लागू भी कर दिया गया।

क्या है नई पट्टा नीति?

नई पट्टा नीति के तहत अब दलित तीन साल के लिए ज़मीन का पट्टा नहीं ले सकते हैं। दूसरा, अब हर साल आरक्षित ज़मीन की नीलामी बढ़े रेट पर होगी और तीसरा, सामूहिक रूप से दलित जो पट्टा लेना चाहते थे अब उन्हें वरीयता नहीं मिलेगी।

जेडपीएससी के नेता गुरमुख सिंह ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि ‘नई सरकार ने जो नीतियों में बदलाव किया है उसकी वजह से गांव गांव में तनाव बढ़ गया है। शुक्रवार को ही मालवा इलाके के कुछ गांवों में ज़मीन के पट्टे को लेकर दलित भूमिहीनों और दबंग जाट किसानों के बीच फसाद हुए हैं।’

गुरमुख सिंह कहते हैं कि ‘धान की खेती का समय आ रहा है और जिस तरह तेजी से महंगाई बढ़ी है दलित और भूमिहीन खेतिहर मज़दूर भी अपनी मज़दूरी बढ़ाए जाने को लेकर मांग कर रहे हैं। अभी पंजाब के गांव गांव में दलित भूमिहीन खेतिहर मज़दूर इकट्ठा होकर मोर्चा निकाल रहे हैं।’

ज़मीन का पट्टा है बड़ा मुद्दा

उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के दौरान धान की  बीजाई के लिए खेतिहर मज़दूरों ने जब अधिक मज़दूरी मांगी तो कई गांव में पंचायत बुलाकर बहिष्कार और ज़ुर्माने का आह्वान किया था, जिसे किसान संगठनों की मध्यस्थता के बाद सुलझाया गया।

पंजाब में पंचायत की ज़मीन का पट्टा एक बहुत ही विवादास्पद मुद्दा रहा है। राज्य के क़ानून के मुताबिक पंचायत की एक तिहाई ज़मीन का पट्टा दलितों के लिए आरक्षित है।

लेकिन दबंग और बड़े किसान ज़बरदस्ती इस ज़मीन का पट्टा हासिल कर लेते हैं या डमी कैंडिडेट को खड़ा कर हथिया लेते हैं और वास्तविक पट्टेदार को ज़मीन नहीं मिल पाती।

कांग्रेस सरकार में जब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह को हटा कर चरणजीत सिंह चन्नी को राज्य की  बागडोर सौंपी गई तो दलित पृष्ठ भूमि से आने की वजह से दलितों और भूमिहीनों में पट्टे की ज़मीन को लेकर न्याय की उम्मीद बढ़ गई थी।

चन्नी ने आते ही ये घोषणा की थी कि जो अतिरिक्त ज़मीन है उसकी पैमाईश करके उसे बांटा जाएगा। इस बावत उन्होंने एक निर्देश भी जारी कर दिया था, लेकिन दबाव में आकर उसे कुछ ही घंटों में वापस ले लिया गया।

पंजाब चुनावों में पट्टे की ज़मीन का मुद्दा भी अहम भूमिका अदा करता है और ऊंची जात के दबंग जट सिख समुदाय इसे लेकर एकजुट हो जाते हैं। जबकि दलित भूमिहीन खेतिहर मज़दूर बीते कुछ समय से पट्टे की ज़मीन से लेकर 10 मरला का प्लाट दिए जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने माइक्रो फाइनेंसिंग के तहत लिए गए कर्ज को माफ करने की भी मांग भी रखी है।

आम आदमी पार्टी से राज्य की जनता को बहुत उम्मीदें थीं लेकिन जिस फुर्ती के साथ भगवंत मान ने एक विवादास्पद मुद्दे को सिर्फ छुआ ही नहीं बल्कि उसकी यथास्थिति बदली है, उसे देख कर नहीं लगता कि जनता की कोई उम्मीद पूरी होने वाली है।

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