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टीयूसीसी उत्तरप्रदेश ने श्रम कानूनों पर योगी सरकार को चेताया

संविधान और आईएलओ के नियमों का हवाला देकर श्रम कानूनों में बदलाव न करने की गुजारिश

ट्रेड यूनियन कोआर्डिनेशन सेंटर के राज्य महासचिव राकेश मिश्रा की ओर से सरकार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि  तीन वर्षों तक श्रम अधिनियमों से सभी कारखानों और प्रतिष्ठानों को निष्क्रिय करने से बंधुआ प्रथा का दोबारा से जन्म हो जाएगा, जो कि अमानवीय कार्यप्रणाली है।

यह छूट बंधुआ श्रम प्रथा उत्सादन अधिनियम 1976, कर्मचारी प्रतिकार अधिनियम 1923, भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवाशर्त विनियम) अधिनियम 1996, बच्चों और महिलाओं के नियोजन से संबंधित श्रम अधिनियम, वेतन संदाय अधिनियम 1936 के प्रावधानों को ठेस पहुंचाएंगे।

यही नहीं, छूट का अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद  21, 38, 41, 43 और 359(1) और आईएलओ नियमों का भी उल्लंघन है।

टीयूसीसी ने अस्थायी छूट अध्यादेश पर पुनर्विचार कर मजदूरों के मौलिक हितों को ध्यान में रखकर नीति अपनाने का अनुरोध किया गया है। अनुरोध स्वीकार न करने पर कानूनी तौर पर सरकार के इस कदम को चुनौती देने की बात कही है।

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