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लेबर कोड से भारत बनेगा आत्मनिर्भर? भारी विरोध के बावजूद श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा

किसानों का भला करने के बाद अब मोदी सरकार मज़दूरों का भला करने पर उतारू

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने कहा है कि श्रम सुधारों के प्रस्तावों से नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को लाभ होगा जिससे दोनों आत्मनिर्भर भारत बनाने में योगदान दे सकेंगे।

उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी के एकीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसे प्रस्तावों से कर्मचारी को लाभ होगा तो लेबर कोड के ज़रिए शिकायतों का बोझ घटने से नियोक्ता के लिए काम काम करना आसान होगा।

बीते बुधवार को एसोचैम के एक कार्यक्रम में गंगवार ने कहा कि लेबर कोड को सरल बनाने के लिए श्रम मंत्रालय ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को छोटा करने का फैसला लिया है।

अब आठ अलग अलग एक्ट के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन की बजाय केवल एक कराना ही पर्याप्त होगा।

इसके अलावा विभिन्न कानूनों के अंतर्गत तीन लाइसेंसों की जगह एक लाइसेंस की ज़रूरत पडेगी।

उन्होंने बताया कि व्यापारिक इकाईयों का भार कम करने क लिए तमाम मंज़ूरियों, लाइसेंसों और स्वीकृतियों के लिए डीम्ड अप्रूवल सुविधा शुरू की जाएगी।

इसके अलावा इंडस्ट्रियल रिलेंशंस कोड के तहत विवाद निपटाने के लिए एक सरल और पारदर्शी तंत्र भी बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि अब एक निश्चित समय के लिए कामपर रखे जाने वाले मज़दूरों को भी वही लाभ प्राप्त हो सकेंगे, जो अब तक केवल नियमित कर्मचारियों को मिलते थे।

श्रम मंत्री ने बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कोरोना से जुड़े 52 लाख क्लेम का निपटारा किया है।

ईपीएफओ ने इन नॉन-रिफंडेबल एडवांस क्लेम्स के तहत 13,300 करोड़ रुपये चुकाए हैं।

श्रम मंत्रालय ने इस साल मार्च में ईपीएफ खाते से विदड्रॉल के लिए जरूरी प्रावधान का अर्जेंट नोटिफिकेशन जारी किया था।

इसके तहत ईपीएफ सब्सक्राइबर्स अपने खाते से तीन महीने के बेसिक पे और डीए के बराबर राशि या ईपीएफ खाते की 75 फीसदी राशि निकाल सकते थे और इसे फिर वापस लौटाने की जरूरत नहीं होगी।

इस प्रावधान के तहत दोनों में जो राशि कम होगी उतनी निकासी करने का प्रावधान किया गया था।

उल्लेखनीय है कि 44 श्रम क़ानूनों को ख़त्म करके चार लेबर कोड बनाए जाने का यूनियनें और मज़दूर संगठन पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार लगातार मनमाने तोड़ मरोड़ करती जा रही है।

श्रम मंत्री पर मनमाना काम करने और बिना यूनियनों की सलाह के श्रम क़ानून ख़त्म किए जाने का विरोध दर्ज कराया था, लेकिन श्रम मंत्री लगातार इसे मज़दूरों के हक़ में बताने से बाज नहीं आ रहे।

ज्ञात हो कि पिछले मानसून सत्र में मोदी सरकार ने ज़बरदस्ती तीन लेबर कोड पास करा लिए थे जबकि इससे ठीक पहले तीन कृषि क़ानून भी पास करा लिए थे, जबकि विपक्ष ने इस पर चर्चा की मांग को लेकर वॉकआउट कर गया था।

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