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बैंगलुरु आईफ़ोन मेकर कंपनी ने नुकसान के बारे में झूठ बोला था?

कंपनी ने पहले 438 करोड़ रु. के नुकसान की बात कही थी लेकिन अब वो 41.25 करोड़ रु. के नुकसान की बात कर रही है

बैंगलुरु के पास कोलार औद्योगिक क्षेत्र में 12 दिसम्बर को फूटे मज़दूरों के गुस्से के बाद हुए नुकसान के बारे में क्या विस्ट्रॉन ने झूठ बोला था?

ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि कंपनी ने 437 करोड़ रुपये के नुकसान के लिए 7,000 वर्करों पर एफ़आईआर दर्ज कराया था।लेकिन पांच दिन कंपनी ने अपना नुकसान 41.25 करोड़ रुपये बताया।

बैंगलुरू के कोलार में आईफोन बनाने वाली ताईवान की कंपनी विस्ट्रॉन ने कोलार के नरसापुरा में कर्मचारियों की हिंसा में अब 41.25 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा कियाहै। विस्ट्रॉन ने पुलिस को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है।

इस मामले का एक दूसरा पहलू यह भी है कि राज्य में निवेश को लेकर चर्चा के लिए हिंसा से महज एक दिन पहले ताईपेई इकोनामिक एंड कल्चरल सेंटर का एक प्रतिनिधि मंडल अपने महानिदेशक की अगुवाई में राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और कारखाना मंत्री जगदीश शेट्टीगर से मिला था।

यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब चीन के विकल्प के तौर पर भारत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों समेत विभिन्न उत्पादों का निर्यातक बनने की कोशिश में है।

गौरतलब है कि बीते रविवार की सुबह वेतन और ओवर टाइम को लेकर विस्ट्रॉन के वर्करों का प्रर्शन हिंसक हो गया था।

तोड़फोड़ और आगजनी के मामलों में पुलिस ने अब तक 158 वर्करों को गिरफ्तार किया है जबकि मामले में कुलचार एफआईआर दर्ज की गई हैं। राज्य सराकर ने विस्ट्रॉन को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि विस्ट्रॉन भारत को ग्लोबल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है और सरकार इसे काम का बेहतर माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं विस्ट्रॉन स्मार्ट डिवाइसेस के एमडी सुदीप्तो गुप्ता ने मामले में अबत कसहयोग के लिए राज्य सरकार को धन्यवाद दिया है।

जबकि वर्करों की बकाया सैलरी को लेकर अभी तक न तो सरकार की ओर से कोई कार्यवाही का आश्वासन दिया गया न तो कंपनी प्रबंधन की ओर से।

ज्ञात हो कि लॉकडाउन के बाद क़रीब 4 महीने से वर्करों की आधी सैलरी काटी जा रही थी और उसका भी भुगतान नियमित नहीं किया जा रहा था।

आईफ़ोन की ओर से भी अभी इस बारे में कोई बयान नहीं आया है।

कर्नाटक की बीजेपी सरकार ने इस घटना को निवेश के लिए अशुभ बताया है लेकिन श्रमिक असंतोष को लेकर कोई ठोस कार्यनीति बनाने पर चुप्पी साध रखी है।

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