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कमरे का किराया देने के भी पैसे नहीं थे, बिहार के मज़दूर ने हैदराबाद में लगाई फांसी

सरकार की नसीहत के बावजूद कुछ मकान मालिक किराया छोड़ने के मूड में नहीं

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद लॉकडाउन में मकान मालिक कमरे के किराए में कोई रियायत नहीं करते दिख रहे हैं।

हैदराबाद से ख़बर है कि कमरे का किराया न दे पाने चलते बिहार के रहने वाले एक मज़दूर ने हैदराबाद में आत्महत्या कर ली।

स्थानीय मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, काम बंद होने और पैसे न होने से परेशान 24 साल के मोहम्मद आमिर ने बीते सोमवार को पंखे से लटककर फांसी लगा ली।

आमिर हैदराबाद के उप्पल इलाके में रह रहे थे और मूल रूप से बिहार के लखीसराय के रहने वाले थे।

वो हैदराबाद में ऑटो डेंटिंग का काम करते थे जोकि लॉकडाउन में बंद हो गया।

पुलिस के अनुसार, आमिर ने घर वालों को बताया था कि उनके पास कमरे का किराया देने के भी पैसे नहीं हैं।

लॉकडाउन के कारण सभी फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं। लोग आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, ऐसे में सैकड़ों मज़दूर घरों का किराया भी नहीं चुका पा रहें हैं और ना ही सरकार कोई स्पष्ट नीति बना रही है।

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मकान मालिक उन पर लगातार दबाव बना रहे हैं किराया चुकाने के लिए।

वर्कर्स यूनिटी को रोज़ मज़दूरों की ओर से ऐसे फ़ोन आते हैं जिसमें कहा जाता है कि मकान मालिक ने किराया माफ़ नहीं किया और उन पर दबाव बनाया जा रहा है।

गुड़गांव में एक मेडिकल स्टाफ़ ने वर्कर्स यूनिटी को फ़ोन पर बताया उनका मकान मालिक आधा किराया देने पर भी राज़ी नहीं है और पूरा किराया देने का दबाव बना रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र ने लॉकडाउन की घोषणा करते हुए नियोक्ताओं और मकान मालिकों को नरमी बरतने की नसीहत दी थी। इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मकान मालिकों से किराया न लेने की बात कही।

लेकिन सरकार की सिफ़ारिश और निर्देश में अंतर होता है जिससे कुछ मकान मालिक इस उहापोह का फ़ायदा उठाने में लग गए हैं।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

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