वेदांता पॉवर प्लांटः प्रोडक्शन दोगुना करने के लिए बढ़ाया था लोड, 21 मारे गए, अनिल अग्रवाल समेत 19 पर केस

वेदांता पॉवर प्लांटः प्रोडक्शन दोगुना करने के लिए बढ़ाया था लोड, 21 मारे गए, अनिल अग्रवाल समेत 19 पर केस

दो दिन पहले छत्तीसगढ़ में सक्ती ज़िले के वेदांता के पावर प्लांट में हुए धमाके को लेकर वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल समेत 19 लोगों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज दर्ज किया गया है।

छत्तीसगढ़ के सीजी ख़बर के अनुसार, इस हादसे में मरने वालों की संख्या 21 पहुंच गई है जबकि 15 अन्य घायल हुए हैं। शुरू में 36 लोगों के बुरी तरह झुलसने की ख़बर आई थी, जिसमें मौके पर ही 9 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद मौतों की संख्या रोज़ बढ़ती रही।

बॉयलर फटने की शुरुआती जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि उत्पादन को दोगुना करने के लिए एक ही घंटे में 150 मेगावाट लोड बढ़ा दिया गया। दरअसल बॉयलर का सुपरहीटेड ट्यूब फट गया था जिससे 600 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान वाला भाप नीचे गिरा, जहां लोग काम कर रहे थे।

सक्ती पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया प्लांट प्रबंधन की लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में इसे महज एक तकनीकी दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर प्रबंधन लापरवाही का परिणाम बताया गया है।

बीबीसी की एक ख़बर के अनुसार, अब इस मामले में शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की है. जिन लोगों के पर एफ़आईआर दर्ज की गई है, उनमें जाने-माने उद्योगपति और वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल भी शामिल हैं।

अनिल अग्रवाल के अलावा सक्ती के पावर प्लांट प्रमुख देवेंद्र पटेल को भी आरोपी बनाया गया है।

पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि हादसे से दो दिन पहले से ही पावर प्लांट में कुछ तकनीकी समस्या आ रही थी, लेकिन उन तकनीकी समस्याओं को नज़रअंदाज किया गया।

गुरुवार को कांग्रेस के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरन दास महंत और कांग्रेस स्टेट प्रेसिडेंट दीपक बैज ने वेदांता पावर प्लांट का दौरा किया। उनके साथ विपक्ष के कई एमएलए भी थे।

अनिल अग्रवाल का बयान

इस घटना के बाद अनिल अग्रवाल ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “हादसे से प्रभावित हर व्यक्ति मेरे परिवार का हिस्सा है। आपके आँसू मेरे हैं, आपका दर्द मेरा अपना है। इस दुख की घड़ी में मैं पूरी तरह आपके साथ खड़ा हूं। हमारी ओर से आपको हर संभव सहायता और पूरा समर्थन मिलेगा। इस घटना की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जाएगा। इस मामले की तह तक जाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”

वेदांता प्रबंधन ने दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को 35 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। इसके अलावा राज्य सरकार ने मृतक के परिजनों को 5 लाख और केंद्र सरकार ने 2 लाख रुपये देने की घोषणा की है।

वेदांता का सुरक्षा रिकॉर्ड विवादित

वेदांता की सुविधाओं के खिलाफ सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। समूह के खनन, तेल, गैस और बिजली क्षेत्रों में बार-बार होने वाली मौतें एक बेहद चिंताजनक पैटर्न की ओर इशारा करती हैं।

वेदांता का सुरक्षा रिकॉर्ड लंबे समय से विवादों में रहा है। 2010 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के विश्लेषण से पता चला कि वेदांता रिसोर्सेज के अंतर्गत 67 मौतें दर्ज की गईं, जो उस समय खनन कंपनियों में सबसे अधिक थीं।

इसी अवधि में, छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक चिमनी गिरने से 40 श्रमिकों की मौत के बाद, ब्रिटिश सेफ्टी काउंसिल ने कंपनी को दिया गया सुरक्षा पुरस्कार वापस ले लिया। कंपनी ने प्रतिकूल मौसम को इसका कारण बताया, लेकिन पुलिस ने बाद में दोषियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया।

हालिया आंकड़े भी कंपनी के सुरक्षा दावों पर सवाल उठाते हैं। वेदांता की वार्षिक रिपोर्टों के अनुसार, कार्यस्थल पर होने वाली मौतों की संख्या वित्त वर्ष 2020 में 7 से बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में 13 हो गई। हालांकि वित्त वर्ष 2024 में इसमें कमी आई, लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यह संख्या फिर से बढ़ गई, जिसमें छह श्रमिकों और एक कर्मचारी की जान चली गई।

आंकड़ों से पता चलता है कि वेदांता, कोल इंडिया और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों के साथ, कार्यस्थल पर होने वाली मौतों के मामले में सबसे आगे है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी शिकायतों में पिछले वर्ष की 603 शिकायतों से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1,363 हो गई हैं, जो बिगड़ती कार्य परिस्थितियों की ओर इशारा करती हैं।

वेदांता के खिलाफ जनता का गुस्सा केवल औद्योगिक दुर्घटनाओं तक ही सीमित नहीं है। कंपनी को विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी मौतों को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा है।

2018 में, तमिलनाडु के थूथुकुडी में स्टरलाइट कॉपर संयंत्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे 14 लोगों की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी, स्थानीय लोगों ने पर्यावरण प्रदूषण का आरोप लगाया था। 2019 में, ओडिशा के लांजीगढ़ में सुरक्षाकर्मियों और आदिवासी समुदायों के बीच हुई झड़प में दो लोगों की मौत हो गई थी।

हाल ही में छत्तीसगढ़ में हुई घटना में, मरने वाले अधिकांश श्रमिक एनजीएसएल नामक एक उपठेकेदार के माध्यम से कार्यरत थे। कंपनी ने परिवारों के लिए मुआवज़ा और रोज़गार सहायता की घोषणा की है, और प्रधानमंत्री ने भी अनुग्रह राशि की घोषणा की है, लेकिन इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति कंपनी के परिचालन और सुरक्षा प्रथाओं के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा करती है।

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Workers Unity Team

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