नोएडा प्रदर्शनः बिसरख, सूरजपुर और कासना जेल के बीच भटकते रहे मज़दूर परिवार, आंखों देखा हाल
सोमवार को मज़दूरों के प्रदर्शन के बाद से गिरफ़्तारियों का दौर रुका नहीं है। मंगलवार को नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया था कि 300 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया और आगे भी चिह्नित करके किया जाएगा।
तो गिरफ़्तारियों का दौर 15 और 16 अप्रैल यानी बुधवार और गुरुवार को भी जारी रहा। कई मामले तो ऐसे सामने आए जिसमें फ़ैक्ट्री के एचआर ने वर्करों को बुलाकर फ़ैक्ट्री से गिरफ़्तार कराया।
जो लोग गिरफ़्तार हुए हैं, उनमें ऐसे निर्दोष लोग भी शामिल हैं जो दवा लेने गए थे, या लंच करके फ़ैक्ट्री लौट रहे थे या बाज़ार गए थे और भगदड़ में फंसने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया।
गुरुवार को कासना जेल के सामने मज़दूरों के परिजनों की भीड़ लगी थी और पूरे दिन धूप में वो अपने परिजनों से मिलने की कोशिश करते रहे।
मज़दूर अधिकार कार्यकर्ता और स्वतंत्र रिसर्चर राखी सहगल गुरुवार को दोपहर 12 बजे से शाम छह बजे तक कासना जेल के बाहर मौजूद थीं और मज़दूर परिवारों की मदद कर रही थीं।
उन्होंने वर्कर्स यूनिटी को जो बताया, वो इस प्रकार है-
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कासना जेल के बाहर कैसा था माहौल
मैं दोपहर 12 बजे तक कासना जेल पहुंच गई थी। वहां मज़दूरों के परिजन बेहद परेशान हाल में भटक रहे थे ये जानने के लिए उनके घर के सदस्य यहां हैं कि नहीं।
बहुत सारे लोगों का कहना था कि उनके परिजन लापता हैं, उनका पता नहीं चल पा रहा। कोई कह रहा है कि थाने जाओ, कोई कह रहा है कि सूरजपुर सीजेएम कोर्ट जाओ
यहां बहुत से लोग ग़लत जानकारी से भी काफ़ी परेशान रहे। यहां तक कि पुलिस भी बहुत ग़लत जानकारी दे रही थी। एक पुलिसकर्मी ने एक परिजन से कहा कि बिसरख एसीपी के यहां जाओ तो बेल हो जाएगी। लेकिन मज़दूरों की मदद करने वाले कुछ वालंटियर वकीलों ने बताया कि उन्हें गुमराह किया जा रहा है।
पुलिस कह रही है कि जहां से उठाया उसी थाने में जाओं वहीं से बेल हो जाएगी। ऐसे ऐसे फ़ोन आ रहे हैं कि थाने आ जाओ बेल यहीं से हो जाएगी। अभी शाम को एक परिजन ने फ़ोन कर बताया कि उन्हें फ़ोन आ रहे हैं कि थाने में आ जाओ और आकर बेल करवा लो।
कोई भी ज़िम्मेदार पुलिसकर्मी सही जानकारी नहीं दे रहा है। कोई कह रहा है कि सूरजपुर कोर्ट जाओ। सूरजपुर कोर्ट से कासना की दूरी 25 किलोमीटर दूर है। फिर वहां से कह रहे हैं कि बिसरख जाओ जो सूरजपुर से भी आठ किलोमीटर दूर उलटी साइड में है।
कुछ लोग सारे दिन बिसरख में बैठे थे। शाम को पहुंचे जेल तबतक मुलाक़ात का समय ख़त्म हो चुका था।
गुरुवार को धूप तेज थी। बहुत से लोग ग़ैरजानकारी या ग़लत जानकारी के चक्कर में बदहवास से घूम रहे थे। कुछ लोगों ने बताया कि वे सुबह छह बजे से और कुछ लोग तो रात से ही यहां आए हुए थे।
हालांकि पुलिस के यहां कई रंग दिखे। डांट रहे थे, चिल्ला भी रहे थे, धमका रहे थे। फिर बिस्कुट भी खिला रहे थे। जेलर भी बाहर आ रहे थे। बिना पर्चाी वालों को भी आधार कार्ड के आधार पर मिलने दिया। ये भी किया।
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वकील बन कर कर रहे ठगी
इस अफ़रातफरी में मज़दूर परिवारों को ठगने का भी मामला सामने आया। गुमराह करने का वाकया तो इस तरह का था कि कोई बोल रहा है मैं वकील हूं। अपने बच्चे का बेल करा लो। कोई कह रहा है कि थाने में हूं यहां बेल करा लोग।
कई वकीलों ने मज़दूरों के परिवारों से पैसे भी ऐंठ लिए हैं। एक महिला से एक वकील ने 13,000 रुपये बेल कराने के नाम पर ले लिया। कुछ सामाजिक कार्यकर्ता उस वकील की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं और पैसा वापस दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे ही एक व्यक्ति ने खुद को वकील बताते हुए, एक परिवार से 3,000 रुपये ले लिये।
जेल के बाहर का दृश्य बहुत पीड़ादायी था। माएं अपने बेटों बेटियों के लिए रो रही थीं। 200 किलोमीटर दूर से आए एक पिता रो रहे थे।
जो लोग जेल में अपने परिजनों से मिलने गए, वहां ऐसे बहुत से लोग मिले जिन्होंने गुहार लगाई कि उनके परिजनों को सूचना दे दी जाए, कई दिनों से वे खोज रहे होंगे।
उसमें कई लोगों ने कहा कि मेरे घर वालों को बता दो।
हालांकि सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी बहुत रूखा बर्ताव कर रहे थे। तीन बजे तक उनका बर्ताव यही था लेकिन चार बजे कुछ ऊंचे अधिकारी जेल आए, जिन्हें छोड़ने जेलर भी बाहर आया। बाद में पुलिस कर्मियों का रवैया थोड़ा नरम हुआ।
वहां मुलाक़ात के लिए पर्चियां ली जाती हैं। जिन्हें पर्ची मिल गई थी उनकी मुलाक़ात हो गई लेकिन जिनकी पर्ची नहीं बन पाई उन्हें आधार कार्ड और जानकारी दर्ज कर मिलने की इजाज़त दे दी गई।
हालांकि मुलाक़ातियों में कई महिलाएं थीं, लेकिन महिला पुलिस कर्मी वहां लगभग नहीं थीं।
जेल का गेट 5.30 बजे शाम को बंद कर दिया।
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फ़ैक्ट्री बुलाकर गिरफ़्तारी कराई
कुछ मज़दूरों के परिजनों ने मुझे बताया कि मैनेजर फ़ोन करके करके बुला रहे थे, उन्हें गिरफ्तार करवा रहे थे।
15 और 16 अप्रैल को भी गिरफ़्तारियां हुई हैं। कई लोग जो बुधवार को काम पर निकले थे या गुरुवार को निकले थे, उनका अता पता नहीं है। वहां रहते हुए जो मुझे लगा कि पहले लोगों को उठा कर हवालात में बंद कर दे रहे हैं और रात को जेल भेज दे रहे हैं।
आज एक लड़का मिला जिसने बताया कि उसकी बहन गुरुवार को 11 बजे निकली थी फिर लौटी नहीं।
एक लड़के का एमबीए का एग्ज़ाम चल रहा था। बुधवार को भी एग्ज़ाम था। वह केंट आरओ में काम करता था कुणाल शर्मा (बदला हुआ नाम)। उसके एचआर ने बुलाया कि सैलरी बढ़ा रहे हैं। उसने कहा कि उसे एग्ज़ाम में देर हो जाएगी। फिर भी बुलाया और 15 अप्रैल को कंपनी के अंदर गिरफ़्तार करा दिया।
एक बीपीएल कंपनी में सुनीता (बदला हुआ नाम) लड़की ने प्रोटेस्ट की वीडियो डाली थी। उसके भाई ने बताया कि यह वीडियो वायरल हो गई है. इसके बाद 16 अप्रैल गुरुवार को सेक्टर 88 से 11 बजे कंपनी से पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया।
एक अन्य लड़की रीना (बदला हुआ नाम) को गिरफ़्तार किया गया है। उसका भी कुछ पता भी नहीं चला।
कुछ ऐसे मामले भी आए कि फ़ैक्ट्री खोली, संदेश भेजे कि काम पर आ जाओ, उसके बाद भगदड़ मची तो गार्ड ने गेट बंद कर दिया जो लोग बाहर थे उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया।
उसी कंपनी का मैनेजर अपने लड़कों को ढूंढते हुए कासना जेल आया था।
एक लेडी कैंसर पैशेंट थी केसरी देवी (बदला हुआ नाम) अपने तीन बच्चों के साथ कासना जेल अपने पति को खोजते हुए पहुंची थीं। उनके पति को पुलिस ने नोएडा 63 से उठा लिया। अप्रैल का किराया देने के बाद भी मकान मालिक ने तुरंत खाली करने को कहा है और धमकियां दे रहा था।
केसरी देवी ने बताया कि मकान मालिक कह रहा है कि तुम्हारा पति तो जेल में है कि तुम रूम खाली कर दो।
कासना जेल जाने के बाद पता चला कि गिरफ़्तारियां कैसे कैसे हुईं।
कोई दवा लेने गया, कोई खाने खाने गया था उन्हें पकड़ लिया था।
एक मैनेजर बता रहा था कि कुछ लोग खाना खाकर लौट रहे थे उन्हें उठा लिया। कुछ लोग बिरयानी खाने गए थे उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया और जेल में डाल दिया।
एक व्यक्ति ने बताया कि उनकी पत्नी श्वेता (बदला हुआ नाम) के घर में शादी थी। वो भंगेल मार्केट से अपने बच्चों को कपड़े लेने गई थीं। ऑटो वाले ने एनएसईजेड पर मेट्रो पर उतारा। वह अपने बेटे से बात ही कर रही थीं कि भगदड़ हो गई और फिर पुलिस ने उन्हें उठा लिया। पति और सास उसे चार दिन से ढू्ंढ रहे थे। आखिरकार 16 तारीख को कासना जेल में उनकी मुलाकात हो पाई।
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कोर्ट में क्या क्या हुआ?
मज़दूरों को कानूनी सहायता देने के लिए कोआर्डिनेट करने वाले एक्टू से जुड़े एडवोकेट सूर्य प्रकाश ने बताया कि वकील विनोद भाटी के नेतृत्व में गुरुवार को कुछ लोगों की ज़मानत की अर्जी दाखिल कर दी गई है।
कुल 55 लोगों के नाम उनके पास आ गए हैं जिनमें 24 लोगों की पहचान हो चुकी है।
उधर, बिगुल मज़दूर संगठन के कार्यकर्ता रुपेश रॉय, शृष्टि गुप्ता, मनीषा और आकृति चौधरी की ज़मानत 15 अप्रैल को एडिशनल चीफ़स ज्यूडिशियल मजिस्ट्रे, सूरजपुर से खारिज हो गई। इन पर एफ़आईआर संख्या 163/26 दर्ज की गई है। इसमें कुछ गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
बाकी लोगों पर एफ़आईआर संख्या 153/26 दर्ज है, जिसमें कम संगीन धाराएं लगाई गई हैं। मसलन 151 सीआरपीसी यानी प्रिवेंटिव डिटेंशन की धारा। जो कि 170 बीएसएस हो गई है।
गुरुवार को सूरजपुर में वकीलों ने डीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन भी किया और मज़दूरों को जल्द रिहा करने की अपील की।
गुरुवार को सीटू ने नोएडा के मज़दूरों के समर्थन में पूरे देश में एकजुटता प्रदर्शन किया। 17 अप्रैल, शुक्रवार को एक्टू का देशव्यापी एकजुटता प्रदर्शन आयोजित है।
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