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एफसीसी क्लच इंडिया ने 90 ठेका मज़दूरों को निकाला, समय पर ड्यूटी न जॉइन करने का हवाला

15 साल से मज़दूर एफसीसी क्लच इंडिया में काम कर रहे थे। 22 मार्च को कंपनी ने निकाल दिया

By खुशबू सिंह

गुड़गांव के मानेसर प्लांट में एफसीसी क्लच इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में पिछले 15 सालों से ठेके पर काम कर रहे 90 मज़दूरों को कंपनी ने 22 मई को अचानक काम से निकाल दिया।

प्रबंधन ने हवाला दिया है कि लॉकडाउन के बाद जब कंपनी खुली तो निकाले गए 90 मज़दूर समय पर नहीं पहुंचे थे।

एफसीसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में काम करने वाले मज़दूर अलग-अलग राज्यों से ताल्लुक रखते हैं। पर अब ये बिना काम के 22 मई से गुज़ारा कर रहे हैं और लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस में काम करने वाले मज़दूर अरविंद ने हमें बताया कि, “लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद 17 मई को कंपनी चालू हुई। उस समय हम लोग अपने-अपने गृहराज्य में थे। कंपनी ने हमें ड्यूटी जॉइन करने के लिए केवल 24 घंटे का समय दिया था।”

प्रबंधन ने ड्यूटी जॉइन करने के लिए 24 घंटे का दिया था समय

उनका कहना है, “24 घंटे के भीतर पहुँचना मुमकिन नहीं था, क्योंकि गाड़ी,बस सब बंद था। फिर क्या हमें 22 मई को काम से निकाल दिया।”

एफसीसी इंडिया मज़दूर संघ के प्रधान कृतपाल सिंह ने हमें बताया कि, कंपनी ने 17 मई को गेट पर नोटिस लगाकर आदेश दिया कि यहां पर काम करने वाले सभी मज़दूरों को 7 दिन के भीतर ड्यूटी जॉइन करनी पड़ेगी।

फिर उन्होंने बताया कि, “जो लोग समय पर काम पर पहुंच गए थे उन्हे भी निकाल दिया है। आज हम लोग श्रम मंत्रालय के बाहर धरना दे रहे हैं। ये धरना न्याय मिलने तक जारी रहेगा।”

इस मसले पर कंपनी प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए हमने कंपनी के एचआर मुकेश महाजन को फ़ोन किया। पहले तो उन्होंने आनाकानी की फिर कहा कि, “मज़दूरों को क्यों निकाला गया है। इस पर बात करने के लिए मैं सही पर्सन नहीं हूं। आप को बात करनी है तो मालिक को फ़ोन कर लिजीए।”

मोटोकॉर्प में 250 ठेका मज़दूरों को निकाला

आप को बता दे कि एफसीसी क्लच इंडिया में 2-व्हीलर और 4-व्हीलर गाडियों का कल्च बनाया जाता है। ये कंपनी बजाज, मारूती, होंडा जैसी नामी कंपनियों के लिए कल्च बनाती है।

इस कंपनी में लगभग 600 मज़दूर काम करते हैं जिसमें से 90 ठेका मज़दूरों को निकाल दिया गया है।

इससे पहले 7 अगस्त को एक खबर सामने आई थी कि, दुनिया की प्रमुख 2-व्हीलर कम्पनी हीरो मोटोकॉर्प के गुडगाँव प्लांट में जून-जुलाई महीने में कोरोना के बहाने 15-20 सालों से कार्यरत करीब 250 ठेका मज़दूरों को काम से निकाल दिया गया है।

इसी तरह से देश भर में कंपनियां मज़दूरों को कोरोना की आड़ में काम से निकाल रही हैं। सरकार और कंपनी मालिकों की इस निती के ख़िलाफ ट्रेड यूनियनों ने हल्ला बोल दिया है। ट्रेड यूनियनों ने 9 अगस्त से जेल भरों आंदोलन का आव्हन भी किया है।

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