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‘कृषि उपज, वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) कानून 2020’- किसान बचेंगे या मोदी-3

‘एक देश एक बाज़ार’ देश के गरीबों को गेहूं, चावल, दाल, तेल आदि के लिए भी मोहताज कर देगा

By एसवी सिंह

रविवार 20 सितम्बर को राज्य सभा में संसदीय मान्यताओं का पैरों टेल कुचलते हुए जो दो बिल पास कराए गए, ये उनमें से एक है। कृषि उपज की सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन  मूल्य (MSP) पर खरीदी के लिए देश भर में कृषि उपज मंडियों (APMS) की कुल तादाद 28000 है जिनका एक निर्धारित खरीदी क्षेत्र होता है जहाँ सरकार द्वारा खरीदी की जाती है।

इस नए कानून का उद्देश्य है जीवनावश्यक अनाजों तथा दूध, अंडा, मछली आदि की खरीद, व्यापार और बिक्री को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त करना है। साथ ही निजी कंपनियों को खुले बाज़ार में किसी भी अनाज की कितनी भी खरीदी कर उसे कहीं भी ले जाकर बेचना सुनिश्चित करना है। ना कोई लाइसेंस की जरूरत ना कोई टैक्स देने की जरूरत।

सिर्फ राज्य भर में ही नहीं एक राज्य से दूसरे किसी भी राज्य में पुरे देश भर में मुक्त व्यापार सुनिश्चित करना। मोदी सरकार का नारा है; ‘एक देश एक बाज़ार’। मौजूदा सरकार को अनेकता, विविधता से बहुत नफ़रत है, सब कुछ एक जैसा होना चाहिए।

जी एस टी ने ‘एक देश एक कर’ लाया जिसने छोटे व्यापारियों के व्यापार को ध्वस्त कर उसे बड़े एकाधिकारी पूंजीपतियों के हवाले कर दिया ठीक उसी तरह कृषि उत्पाद में ‘एक देश एक बाज़ार’ गरीब किसानों को जमीनों से बेदखल ही नहीं करेगा बल्कि पुरे देश के गरीबों को गेहूं, चावल, दाल, तेल आदि के लिए भी मोहताज कर देगा।

सब कुछ कॉर्पोरेट के गोदामों में जमा होगा और फिर वो अधिकतम मुनाफ़ा वसूलने के लिए हौड़ करेंगे!! साथ ही इतने विशाल, विविधतापूर्ण देश में ‘एक देश- सब कुछ एक’ की सनक ‘एक देश’ का सत्यानाश करके छोड़ेगी!! सरकार अनाज खरीद बिक्री का कोई हिसाब भी नहीं रखेगी। सब कुछ धन्ना सेठों के ‘विवेक’ पर निर्भर होगा!!

इस बिल को ‘अनाज मंडी बाई पास बिल’ भी कहा जा रहा है जो बिलकुल सही है। सरकार को देश के खजाने की और गरीबों की कितनी चिंता है ये इस बात से भी साबित होता है कि निजी कंपनियों की खरीद के लिए कृषि उपज मंडियों से होने वाली कर वसूली जिसके द्वारा अकेले पंजाब राज्य ने पिछले साल कुल 350 रुपये की आय अर्जित की, सरकार उसे पूरी तरह माफ करने जा रही है जबकि दूसरी तरफ़ गरीब किसान मजदूरों का खून निचोड़ते हुए डीजल-पेट्रोल पर 250% तक टैक्स लगा रही है और उसे बढ़ाती ही जा रही है।

एकाधिकारी पूंजीपति, जो बाज़ार में मुक्त स्पर्धा को समाप्त कर उसे एकाधिकारी कैसे बनाया जाए, इस विधा में विशेष योग्यता रखते हैं, उन्हें सरकार शुरू में ही 14% कर छूट देकर उनका मैदान साफ करने जा रही है। मोदी जी ठीक कह रहे हैं की कृषि उपज मंडियों को समाप्त नहीं किया जाएगा।

दरअसल, उन्हें समाप्त करने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी वे स्वतः अपनी मौत मर जाएंगी!! पूंजीवाद किसी को मारने का गुनाह नहीं करता, वो खुद दम घुटकर मर जाए बस ये सुनिश्चित करता है। इसके साथ ही कृषि जिन्सों की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग भी शुरू करने जा रही है ठीक वैसे ही जैसे शेयर मार्किट में दूसरी वस्तुओं की ट्रेडिंग होती है।

भारत का गरीब किसान जो अपने हस्ताक्षर नहीं कर पाता, हर जगह अंगूठा टेकने को मजबूर होता है, अब ऑन लाइन ट्रेडिंग करके ‘अपनी आमदनी डबल करेगा’!!

(यथार्थ पत्रिका से साभार)

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