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एक्सेंचर में 25,000 कर्मचारियों की नौकरियां ख़त्म करने का फैसला, दो लाख भारतीय करते हैं काम

कंपनी ने छंटनी का ठीकरा कर्मचारियों की कार्यकुशलता पर फोड़ा

देश की जानी मानी वैश्विक पेशेवर सेवा कंपनी एक्सेंचर ने 25 हज़ार कर्मचारियों को ले ऑफ पर भेजने का फैसला किया है। कंपनी के इस फैसले से हज़ारों भारतीयों की नौकरी खतरे में हैं।

इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार, भारत में एक्सेंचर के 2 लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।

कंपनी ने फैसला किया है अच्छा प्रदर्शन न करने वाले फ़ीसदी कर्मचारियों को ले ऑफ दिया जाएगा।

ऑस्ट्रेलियन फ़ाइनेंशियल रिव्यू के अनुसार, एक्सेंचर के सीईओ जूली स्वीट ने अगस्त के मध्य में कर्मचारियों के साथ एक बैठक की थी, जिसमें ले ऑफ का फैसला लिया गया।

जूली स्वीट के हवाले से कहा गया है कि पांच प्रतिशत कर्मचारियों को ले ऑफ़ दिया जाना कोई नई बात नहीं है, ये हर साल होता है।

कंपनी हर साल अच्छा प्रदर्शन न करने वाले पांच प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी करती है और उनकी जगह नई भर्तियां करती है लेकिन इस बार कोविड-19 के कारण उनका बिज़नेस सुस्त पड़ गया है, इसलिए निकाले गए कर्मचारियों की जगह नहीं भर्ती नहीं की जाएगी।

छंटनी ठीकरा कर्मचारियों के सिर

एक्सेंचर का कहना है कि, कंपनी वैश्विक स्तर पर अधिक कर्मचारियों को रखने के लिए कोई प्लान नहीं कर रही है।

जूली स्वीट के अनुसार, “प्रतिवर्ष खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को ले ऑफ के लिए चिह्नित किया गया है। इस मसले पर उनसे बात भी की गई है। हम देख रहे हैं क्या वे आगे अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं और क्या वे एक्सेंचर को लंबे समय तक सेवाएं देने के लायक हैं या नहीं।”

उन्होंने कहा कि, “इस समय बाज़ार में मांग नहीं है। यदि कंपनी कर्मचारियों से चलती है तो हम चलाते हैं। और काम पर कम वेतन वाले कर्मचारी को ही रखा जाता है।”

एक्सेंचर का ग्रोथ रेट 1.3 फ़ीसदी तक गिरा

कोविड-19 के कारण कंपनी की विकास दर 1.3 फ़ीसदी तक गिर गया है। इसमें 120 से अधिक देशों में एक्सेंचर के 509,000 लोग काम कर रहे हैं।

एक्सेंचर एक वैश्विक प्रबंधन परामर्श और पेशेवर सेवा फर्म है जो रणनीति, परामर्श, डिजिटल, प्रौद्योगिकी और संचालन सेवाएं प्रदान करती है।

सीएमआईई की ताज़ा रिपोर्ट से पता चलता है कि अप्रैल से जुलाई के बीच 1.8 करोड़ से अधिक नौकरियां ख़त्म हो गईं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अकेले जुलाई महीने में 50 लाख नौकरियां चली गईं। ये नौकरियां ऐसी हैं जिसमें वेतनधारी को कुछ हद तक सुरक्षा हासिल है।

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